29 जुलाई 2026
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जंतर-मंतर प्रदर्शन में 'गोली लगने' का दावा झूठा: दिल्ली पुलिस ने एमएलसी रिपोर्ट के आधार पर किया खंडन

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जंतर-मंतर प्रदर्शन में 'गोली लगने' का दावा झूठा: दिल्ली पुलिस ने एमएलसी रिपोर्ट के आधार पर किया खंडन

सारांश

20 जुलाई के जंतर-मंतर प्रदर्शन में 'गोली लगने' का वायरल दावा झूठा निकला। दिल्ली पुलिस ने एमएलसी रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि चोट मामूली और कुंद वस्तु से लगी थी — गोली के घाव का कोई सबूत नहीं। पुलिस ने नागरिकों से सोशल मीडिया पर जानकारी शेयर करने से पहले सत्यापन की अपील की।

मुख्य बातें

दिल्ली पुलिस ने 29 जुलाई को सोशल मीडिया पर वायरल 'गोली लगने' के दावे को गुमराह करने वाला बताते हुए खारिज किया।
एमएलसी रिपोर्ट के अनुसार चोट दाहिने ट्रैगस के पास कटे-फटे घाव की है, जिसे 'ब्लंट' और मामूली श्रेणी में रखा गया है।
डॉक्टर की राय में गोली लगने के घाव का कोई सबूत नहीं मिला।
20 जुलाई को 'कॉकरोच जनता पार्टी' के नेतृत्व में भीड़ ने जंतर-मंतर से संसद की ओर मार्च किया था, जिसके बाद पुलिस ने आंसू गैस और लाठीचार्ज किया।
पुलिस ने नागरिकों से भरोसेमंद स्रोतों से जानकारी सत्यापित करने के बाद ही शेयर करने की अपील की।

दिल्ली पुलिस ने 29 जुलाई 2026 को सोशल मीडिया पर तेज़ी से फैल रहे उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें आरोप लगाया गया था कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान एक प्रदर्शनकारी को गोली लगी थी। पुलिस ने स्पष्ट किया कि घटना के बाद तैयार की गई मेडिको-लीगल केस (एमएलसी) रिपोर्ट में गोली लगने के घाव का कोई सबूत नहीं मिला।

एमएलसी रिपोर्ट क्या कहती है

पुलिस के अनुसार, एमएलसी में दाहिने ट्रैगस (कान के निकट कार्टिलेज का छोटा उभार) के सामने एक कटे-फटे घाव का उल्लेख है। डॉक्टर ने इस चोट को 'ब्लंट' (कुंद वस्तु से लगी चोट) की श्रेणी में रखा है और इसे मामूली बताया है।

पुलिस ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, "डॉक्टर की राय में चोट को मामूली बताया गया है और गोली लगने के घाव का कोई सबूत नहीं है, इसलिए गोली लगने से चोट का दावा एमएलसी में बताई गई मेडिकल जांच के नतीजों से साबित नहीं होता।"

20 जुलाई को क्या हुआ था

20 जुलाई को नई दिल्ली में विरोध प्रदर्शन उस समय हिंसक हो गया, जब 'कॉकरोच जनता पार्टी' के नेतृत्व में भीड़ ने जंतर-मंतर से संसद की ओर मार्च करने का प्रयास किया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस छोड़ी और लाठीचार्ज किया, जिसके बाद झड़पें हुईं और कई लोगों को हिरासत में लिया गया।

गौरतलब है कि इसी घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया पर एक वायरल वीडियो के साथ गोली लगने के दावे तेज़ी से फैले, जिन्हें पुलिस ने अब गुमराह करने वाला करार दिया है।

सोशल मीडिया पर फर्जी दावों को लेकर पुलिस की चेतावनी

दिल्ली पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर किसी भी जानकारी को शेयर करने से पहले भरोसेमंद स्रोतों से उसकी पुष्टि करें। पुलिस ने कहा, "लोगों को सलाह दी जाती है कि वे ऐसे दावों को शेयर करने से पहले सत्यापित स्रोतों से जानकारी की पुष्टि कर लें।"

यह ऐसे समय में आया है जब संवेदनशील घटनाओं के बाद सोशल मीडिया पर भ्रामक सामग्री के प्रसार को लेकर कानून-प्रवर्तन एजेंसियाँ पहले से सतर्क हैं।

एमएलसी रिपोर्ट का महत्व

एमएलसी, यानी मेडिको-लीगल केस रिपोर्ट, एक आधिकारिक चिकित्सा दस्तावेज़ है जो चोटों या ऐसी स्थितियों में तैयार किया जाता है जिनमें कानूनी जाँच की संभावना हो। कानून प्रवर्तन एजेंसियाँ चोट की प्रकृति निर्धारित करने और जिम्मेदारी तय करने के लिए इन रिपोर्टों पर निर्भर करती हैं। इस मामले में एमएलसी रिपोर्ट ने वायरल दावों का खंडन करने में निर्णायक भूमिका निभाई।

फिलहाल पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जाँच जारी है और किसी भी नए तथ्य के सामने आने पर अद्यतन जानकारी साझा की जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे केवल एक तरफ से देखना उचित नहीं होगा — एमएलसी रिपोर्ट एक आधिकारिक दस्तावेज़ है, परंतु वह पुलिस की निगरानी में ही तैयार होती है, जो इस मामले में एक पक्ष भी है। यह ऐसे समय में आया है जब प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव की स्वतंत्र जाँच की माँग उठ रही है। वायरल दावों का फैलना और उनका तत्काल खंडन — दोनों ही यह दर्शाते हैं कि संवेदनशील घटनाओं में सूचना-युद्ध अब मैदान जितना ही अहम हो गया है। असली ज़रूरत एक स्वतंत्र चिकित्सा समीक्षा और पारदर्शी जाँच की है, ताकि दोनों पक्षों के दावों की विश्वसनीयता परखी जा सके।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जंतर-मंतर प्रदर्शन में 'गोली लगने' का दावा क्या था?
सोशल मीडिया पर एक वायरल वीडियो के साथ दावा किया गया था कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान एक प्रदर्शनकारी को गोली लगी। दिल्ली पुलिस ने इस दावे को एमएलसी रिपोर्ट के आधार पर गलत बताया है।
दिल्ली पुलिस ने इस दावे को कैसे खारिज किया?
पुलिस ने घटना के बाद तैयार की गई मेडिको-लीगल केस (एमएलसी) रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें चोट को 'ब्लंट' (कुंद वस्तु से लगी) और मामूली श्रेणी में रखा गया है। डॉक्टर की राय में गोली लगने के घाव का कोई सबूत नहीं पाया गया।
20 जुलाई को जंतर-मंतर पर क्या हुआ था?
'कॉकरोच जनता पार्टी' के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने जंतर-मंतर से संसद की ओर मार्च करने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने आंसू गैस और लाठीचार्ज किया। इस दौरान झड़पें हुईं और कई लोगों को हिरासत में लिया गया।
एमएलसी रिपोर्ट क्या होती है और इसका महत्व क्यों है?
मेडिको-लीगल केस (एमएलसी) रिपोर्ट एक आधिकारिक चिकित्सा दस्तावेज़ है जो चोटों या कानूनी जाँच वाली स्थितियों में तैयार की जाती है। कानून प्रवर्तन एजेंसियाँ चोट की प्रकृति निर्धारित करने और जिम्मेदारी तय करने के लिए इस पर निर्भर करती हैं।
सोशल मीडिया पर ऐसे दावे शेयर करने से बचने के लिए क्या करें?
दिल्ली पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी दावे को शेयर करने से पहले भरोसेमंद और सत्यापित स्रोतों से जानकारी की पुष्टि करें। भ्रामक सामग्री फैलाना कानूनी रूप से भी दंडनीय हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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