FSSAI का शराब कंपनियों पर बड़ा एक्शन: अनधिकृत फ्लेवर और भ्रामक 'एज्ड' लेबल पर कारण बताओ नोटिस जारी
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने 9 जुलाई 2026 को शराब उत्पादक कई कंपनियों के विरुद्ध औपचारिक कार्रवाई शुरू करते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। रम, व्हिस्की, वोदका और बीयर जैसे मादक पेय पदार्थों में अनधिकृत सिंथेटिक फ्लेवर के इस्तेमाल और उत्पाद की आयु को लेकर भ्रामक दावे करना इन नोटिसों का आधार है। नियामक ने स्पष्ट किया है कि असंतोषजनक जवाब मिलने पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
क्या है मामला
FSSAI की जांच और तकनीकी विश्लेषण में खुलासा हुआ कि कुछ कंपनियां अपने उत्पादों में ऐसे अतिरिक्त सिंथेटिक फ्लेवर मिला रही थीं जो व्हिस्की, वाइन और अन्य मादक पेय पदार्थों के प्राकृतिक स्वाद एवं खुशबू की नकल करते हैं। नियामक के अनुसार, इस तरह के अनधिकृत फ्लेवर का उपयोग न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि इससे उपभोक्ताओं को उत्पाद की वास्तविक गुणवत्ता के बारे में गुमराह भी किया जाता है।
भ्रामक 'एज्ड' लेबलिंग पर आपत्ति
नियामक ने शराब की बोतलों पर 'एज्ड', '8 साल पुरानी' या '12 साल पुरानी' जैसे दावों के इस्तेमाल पर गंभीर आपत्ति जताई है। मौजूदा नियमों के अनुसार, यदि किसी उत्पाद के लेबल पर आयु का दावा किया जाता है तो वह मिश्रण में मौजूद सबसे कम उम्र वाली स्पिरिट के आधार पर होना चाहिए। जांच में पाया गया कि कुछ कंपनियां मिश्रण में बहुत कम मात्रा में पुरानी स्पिरिट मिलाकर पूरी बोतल को 'एज्ड' बताकर प्रीमियम कीमत पर बेच रही थीं — जिसे FSSAI ने भ्रामक और नियमों के विरुद्ध करार दिया है।
कंपनियों को क्या निर्देश दिए गए
FSSAI ने सभी संबंधित कंपनियों से पूछा है कि उन्होंने खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन क्यों किया। साथ ही बाज़ार में उपलब्ध संबंधित बैचों की लेबलिंग में सुधार करने या आवश्यकता पड़ने पर उन्हें वापस मंगाने के निर्देश भी दिए गए हैं। नियामक ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जानकारी साझा करते हुए इन उल्लंघनों की पुष्टि की।
कार्रवाई न होने पर क्या होगा
FSSAI ने चेतावनी दी है कि यदि कंपनियों का जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत मुकदमा दर्ज किया जा सकता है। इसके अलावा भारी जुर्माना, लाइसेंस निलंबन या लाइसेंस रद्द करने जैसी सख्त कार्रवाई भी संभव है। गौरतलब है कि यह कार्रवाई ऐसे समय में आई है जब भारत में प्रीमियम अल्कोहल बाज़ार तेज़ी से बढ़ रहा है और उपभोक्ता जागरूकता को लेकर नियामकीय दबाव भी बढ़ा है।
FSSAI का उद्देश्य
नियामक का कहना है कि खाद्य एवं पेय पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना और उपभोक्ताओं को सटीक जानकारी उपलब्ध कराना उसकी प्राथमिक ज़िम्मेदारी है। किसी भी प्रकार की भ्रामक लेबलिंग या अनधिकृत सामग्री के इस्तेमाल को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आगे FSSAI की निगरानी और सख्त होने की संभावना है, जिससे शराब उद्योग में लेबलिंग मानकों पर नई बहस छिड़ सकती है।