मुंबई के 'के रुस्तम' का फूड लाइसेंस निलंबित, एफडीए ने स्वच्छता उल्लंघन पर तत्काल बंद का आदेश दिया
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई के चर्चगेट स्थित 80 वर्ष से अधिक पुराने और विश्वप्रसिद्ध आइसक्रीम ब्रांड 'के रुस्तम' का फूड लाइसेंस खाद्य और औषधि प्रशासन (एफडीए) ने 9 जुलाई 2026 को निलंबित कर दिया है। खाद्य सुरक्षा एवं स्वच्छता मानकों के गंभीर उल्लंघन के आधार पर एफडीए ने प्रतिष्ठान को तत्काल प्रभाव से बंद करने का आदेश जारी किया है।
मुख्य घटनाक्रम
ब्रेबॉर्न स्टेडियम के निकट स्थित 'के रुस्तम' अपने आइसक्रीम सैंडविच के लिए देश-विदेश में पहचाना जाता है। एफडीए की अचानक की गई जांच में कई गंभीर अनियमितताएं उजागर हुईं, जिसके बाद यह कदम उठाया गया। यह कार्रवाई एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंडे के 'जीरो टॉलरेंस' अभियान के तहत की गई है, जिसके अंतर्गत मुंबई के प्रमुख खाद्य प्रतिष्ठानों में स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा मानकों की समीक्षा की जा रही है।
जांच में क्या खामियां मिलीं
एफडीए की जांच टीम को खाद्य सामग्री तैयार करने और संभालने वाले क्षेत्रों में स्वच्छता के गंभीर उल्लंघन मिले। डेयरी उत्पादों के भंडारण के लिए निर्धारित तापमान और रेफ्रिजरेशन मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था, जिससे खाद्य पदार्थ खराब होने और बैक्टीरिया पनपने का खतरा बना हुआ था।
इसके अतिरिक्त, कई खाद्य उत्पादों पर अनिवार्य लेबल, निर्माण तिथि और बैच नंबर जैसी ज़रूरी जानकारी अनुपस्थित पाई गई। आइसक्रीम तैयार करने और परोसने वाले कर्मचारियों के पास कानूनन अनिवार्य मेडिकल फिटनेस प्रमाणपत्र भी उपलब्ध नहीं थे।
एफडीए की कार्रवाई
इन अनियमितताओं को देखते हुए एफडीए ने 'के रुस्तम' का फूड लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर प्रतिष्ठान का संचालन बंद करने का आदेश दिया है। अधिकारियों के अनुसार, सभी कमियों को दूर कर नियमों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करने के बाद ही आगे की प्रक्रिया पर विचार किया जाएगा।
आम जनता और उपभोक्ताओं पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब मुंबई में खाद्य सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। 'के रुस्तम' जैसे दशकों पुराने और लोकप्रिय प्रतिष्ठान पर इस तरह की कार्रवाई उपभोक्ताओं में भरोसे को लेकर सवाल उठाती है। गौरतलब है कि एफडीए का यह 'जीरो टॉलरेंस' अभियान मुंबई के कई नामी खाद्य प्रतिष्ठानों को प्रभावित कर रहा है।
क्या होगा आगे
प्रतिष्ठान के संचालकों को सभी चिह्नित कमियों को दूर करना होगा और एफडीए की संतुष्टि के बाद ही पुनः संचालन की अनुमति मिल सकती है। आलोचकों का कहना है कि इस कार्रवाई से अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों को भी स्वच्छता मानकों के प्रति सजग होने का संदेश मिलेगा।