ब्रिक्स एमएसएमई फोरम 2026: मांझी बोले — एमएसएमई को नवाचार, निर्यात और रोजगार का इंजन बनाना होगा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री जीतनराम मांझी ने 20 जून 2026 को आगरा में आयोजित 'ब्रिक्स एमएसएमई फोरम 2026' के उद्घाटन समारोह में कहा कि एमएसएमई क्षेत्र देश के समावेशी और सतत आर्थिक विकास की आधारशिला है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि इस क्षेत्र को नवाचार, निर्यात और रोजगार सृजन का प्रमुख माध्यम बनाना आज की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
मुख्य घटनाक्रम
यह फोरम तीसरी ब्रिक्स एसएमई वर्किंग ग्रुप बैठक के ठीक बाद आयोजित किया गया। इसमें ब्रिक्स सदस्य और साझेदार देशों के सरकारी प्रतिनिधि, नीति निर्माता, उद्योग जगत के नेता और निजी क्षेत्र के विशेषज्ञ सम्मिलित हुए। एमएसएमई पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने, सतत विकास को बढ़ावा देने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को बढ़ाने जैसे विषयों पर विस्तार से विमर्श किया गया।
मांझी का संदेश: सामूहिक प्रयास ही समाधान
मंत्री मांझी ने स्वीकार किया कि एमएसएमई क्षेत्र आज वित्तीय सहायता, नई तकनीक को अपनाने, स्थिरता और बाजार तक पहुँच जैसी बहुआयामी चुनौतियों से जूझ रहा है। उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों का समाधान केवल सामूहिक प्रयासों से ही संभव है। उनके अनुसार, ब्रिक्स देशों के पास अपार क्षमताएं और एक-दूसरे की पूरक ताकतें मौजूद हैं — यदि सदस्य देश निरंतर संवाद और सहयोग को बढ़ावा दें, तो एक ऐसा मजबूत ढाँचा तैयार किया जा सकता है जो एमएसएमई को वैश्विक स्तर पर सशक्त बनाए।
उत्तर प्रदेश की भूमिका
उत्तर प्रदेश के एमएसएमई मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि यूपी अब देश के सबसे तेज़ी से विकसित हो रहे आर्थिक क्षेत्रों में शामिल हो चुका है, और इसमें एमएसएमई क्षेत्र का योगदान निर्णायक रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार बुनियादी ढाँचे के विकास, नीतिगत सहयोग, कौशल विकास और डिजिटल सशक्तीकरण पर लगातार काम कर रही है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
एमएसएमई मंत्रालय के सचिव भारत खेड़ा ने कहा कि एमएसएमई केवल आर्थिक इकाइयाँ नहीं हैं — ये नवाचार, रोजगार, उद्यमिता और क्षेत्रीय विकास के प्रमुख इंजन हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि तकनीक अपनाने, टिकाऊ विनिर्माण, डिजिटल परिवर्तन, कौशल विकास और बाजार तक पहुँच जैसे क्षेत्रों में ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग की अपार संभावनाएं हैं।
आगे की राह
इस फोरम को ब्रिक्स देशों के बीच आर्थिक सहयोग को नई दिशा देने और एमएसएमई क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है और एमएसएमई इस रणनीति की धुरी हैं।