बांग्लादेश महंगाई संकट: ADB का 8.7% का अनुमान, संरचनात्मक कमज़ोरियाँ असली कारण
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश में लगातार बनी हुई महंगाई केवल वैश्विक बाज़ार की उथल-पुथल या अस्थायी आपूर्ति व्यवधान का परिणाम नहीं है — इसकी जड़ें देश की गहरी संरचनात्मक आर्थिक कमज़ोरियों और नीतिगत खामियों में हैं। द बिज़नेस स्टैंडर्ड (बांग्लादेश) की एक नई रिपोर्ट में यह विश्लेषण सामने आया है, जो बताती है कि एशियाई विकास बैंक (ADB) के सितंबर पूर्वानुमान के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में औसत वार्षिक महंगाई 8.7 प्रतिशत तक पहुँच सकती है।
महंगाई के मूल कारण
रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश में महंगाई को बढ़ावा देने वाले कारक बहुस्तरीय हैं। कमज़ोर बाज़ार प्रतिस्पर्धा, आपूर्ति श्रृंखला में बाधाएँ, परिवहन और भंडारण की अपर्याप्त व्यवस्था, बाज़ार में अत्यधिक एकाधिकार और व्यापक आर्थिक नीतियों में देरी — ये सभी मिलकर महंगाई के दबाव को स्थायी बनाते आ रहे हैं। इसके अलावा खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतें, मुद्रा विनिमय दर में गिरावट और आयातित ईंधन की बढ़ी लागत को भी प्रमुख कारक बताया गया है।
बाज़ार की विषम प्रवृत्ति
रिपोर्ट में एक महत्त्वपूर्ण असंतुलन की ओर ध्यान दिलाया गया है: जब लागत बढ़ती है तो वस्तुओं के दाम तत्काल और तेज़ी से ऊपर जाते हैं, लेकिन जब लागत घटती है तो कीमतें उसी गति से नीचे नहीं आतीं। इस असमानता के लिए कमज़ोर बाज़ार निगरानी तंत्र और अप्रभावी प्रतिस्पर्धा नीति को ज़िम्मेदार ठहराया गया है। यह ऐसे समय में विशेष रूप से चिंताजनक है जब आम उपभोक्ता पहले से ही बढ़ती कीमतों का बोझ उठा रहे हैं।
राजकोषीय संकट और उधारी का बोझ
राजस्व संग्रह भी संरचनात्मक रूप से कमज़ोर बना हुआ है। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में 2.26 लाख करोड़ टका के राजकोषीय घाटे का अनुमान लगाया गया है, जिसमें से 1.25 लाख करोड़ टका घरेलू स्रोतों से जुटाने की योजना है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि सरकारी व्यय टिकाऊ राजस्व की तुलना में तेज़ी से बढ़ता रहा, तो सरकार की उधारी पर निर्भरता और गहरी होगी। इससे घरेलू तरलता पर दबाव बढ़ेगा और वित्तपोषण की लागत में भी इज़ाफ़ा होगा।
मौद्रिक नीति और सामाजिक व्यय का तनाव
रिपोर्ट स्वीकार करती है कि सख्त मौद्रिक नीति से महंगाई पर कुछ हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है। हालाँकि, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और सार्वजनिक क्षेत्र के वेतन पर सरकार का बढ़ता व्यय इस प्रयास को कमज़ोर करता है। यदि घाटे की भरपाई के लिए अत्यधिक उदार वित्तपोषण किया गया, तो महंगाई का दबाव और तीव्र हो सकता है। गौरतलब है कि 2026-27 में महंगाई 9 प्रतिशत रहने का अनुमान ADB ने लगाया है।
निजी निवेश और सुधारों की ज़रूरत
रिपोर्ट के अनुसार, नीतिगत अनिश्चितता, नियामकीय जटिलताएँ, ऊर्जा संकट और संस्थागत कमज़ोरियाँ मिलकर निजी निवेश को भी बाधित कर रही हैं। रिपोर्ट ने सरकार से मध्यम अवधि की विश्वसनीय राजकोषीय योजना तैयार करने की अपील की है जिसमें नए खर्चों को टिकाऊ राजस्व स्रोतों से जोड़ा जाए। साथ ही ऊर्जा क्षेत्र की अक्षमताओं, ईंधन मूल्य निर्धारण व्यवस्था, पेट्रोलियम उत्पादों पर कर बोझ और संबंधित संस्थानों की वित्तीय कमज़ोरियों पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता बताई गई है। यदि इन संरचनात्मक सुधारों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था दीर्घकालिक महंगाई के दुष्चक्र में फँसी रह सकती है।