बांग्लादेश पर स्टैगफ्लेशन का खतरा: महंगाई 8.26%, विश्व बैंक का GDP अनुमान सिर्फ 3.9%
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर स्टैगफ्लेशन — यानी ऊँची महंगाई और धीमी आर्थिक वृद्धि का एक साथ दबाव — तेज़ी से बढ़ रहा है। ढाका स्थित समाचार पत्र द फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, निजी निवेश में सुस्ती, परिवारों की घटती क्रय शक्ति और श्रम बाज़ार की संरचनात्मक कमज़ोरियाँ मिलकर देश की आर्थिक चुनौतियों को और गहरा कर रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक संघर्ष ने इन समस्याओं को उत्पन्न नहीं किया, बल्कि पहले से मौजूद कमज़ोरियों को और उजागर कर दिया है।
महंगाई की स्थिति
रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश में समग्र महंगाई दर अगस्त में मामूली रूप से घटकर 8.26 प्रतिशत रही, जबकि जुलाई में यह 8.32 प्रतिशत थी। हालाँकि, इसी अवधि में गैर-खाद्य महंगाई बढ़कर 9.32 प्रतिशत पर पहुँच गई — जो आवास, परिवहन, स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा जैसी अनिवार्य ज़रूरतों पर बढ़ते बोझ को दर्शाती है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि इन ज़रूरी खर्चों में वृद्धि से निम्न और मध्यम आय वर्ग के परिवारों की अन्य वस्तुओं पर खर्च करने की क्षमता लगातार कम हो रही है, जिससे उपभोक्ता माँग पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
वेतन वृद्धि की रफ़्तार भी महंगाई की तुलना में पिछड़ी हुई है। अगस्त में वेतन वृद्धि लगभग 8.05 प्रतिशत रही — समग्र महंगाई दर से कम — जिससे वास्तविक क्रय शक्ति लगातार घट रही है।
श्रम बाज़ार की असली तस्वीर
रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि बांग्लादेश में आधिकारिक बेरोज़गारी के आँकड़े अपेक्षाकृत कम हैं, लेकिन यह तस्वीर का केवल एक हिस्सा है। बड़े पैमाने पर अल्परोज़गार, अनियमित कामकाज और कम उत्पादकता वाली नौकरियाँ श्रम बाज़ार की गंभीर चुनौतियों को उजागर करती हैं। यह ऐसे समय में आया है जब पारंपरिक स्टैगफ्लेशन के मापदंड — जो केवल बेरोज़गारी को देखते हैं — देश की वास्तविक स्थिति को पकड़ने में अपर्याप्त साबित हो रहे हैं।
भू-राजनीतिक दबाव और संरचनात्मक समस्याएँ
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष ने वैश्विक स्तर पर ऊर्जा, परिवहन और आयात की लागत बढ़ाकर बांग्लादेश पर अतिरिक्त दबाव डाला है। हालाँकि, विश्लेषकों का मानना है कि भू-राजनीतिक तनाव कम होने और तेल की कीमतों में गिरावट के बाद भी देश की आर्थिक समस्याएँ पूरी तरह समाप्त नहीं होंगी। निजी निवेश की कमज़ोरी, बैंकिंग क्षेत्र पर बढ़ता दबाव, नियामकीय अनिश्चितता और कारोबारियों के घटते भरोसे जैसी संरचनात्मक बाधाएँ अलग से जड़ें जमाए बैठी हैं।
गौरतलब है कि यह केवल बाहरी झटकों का परिणाम नहीं है — विशेषज्ञ लंबे समय से इन आंतरिक संरचनात्मक कमज़ोरियों की ओर ध्यान दिलाते रहे हैं।
आर्थिक वृद्धि के अनुमान
विश्व बैंक ने बांग्लादेश के लिए वित्त वर्ष 2025-26 में आर्थिक वृद्धि दर 3.9 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 3.5 प्रतिशत की वृद्धि दर का अनुमान व्यक्त किया है। विश्लेषकों का कहना है कि इतनी धीमी वृद्धि दर से पर्याप्त उत्पादक रोज़गार पैदा करना, लोगों की आय बढ़ाना और निजी निवेश को गति देना अत्यंत कठिन होगा।
आगे की राह
विशेषज्ञों के अनुसार, बांग्लादेश के सामने चुनौती केवल महंगाई को नियंत्रित करने की नहीं है — बल्कि आर्थिक विकास को मज़बूत बनाने, रोज़गार के अवसर बढ़ाने और निवेशकों का भरोसा बहाल करने की भी है। जब तक इन बुनियादी समस्याओं का समाधान नहीं होता, वैश्विक परिस्थितियों में सुधार के बावजूद देश की अर्थव्यवस्था पर स्टैगफ्लेशन का दबाव बना रह सकता है।