बांग्लादेश में सर्दियों में महंगाई का खतरा: तेल और कृषि लागत से खाद्य कीमतें बढ़ने की आशंका
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश में आने वाले सर्दियों के मौसम में महंगाई की नई लहर आने की आशंका जताई जा रही है। द डेली स्टार की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में वृद्धि और कृषि उत्पादन लागत में बढ़ोतरी के कारण खाद्य पदार्थों के दाम तेज़ी से बढ़ सकते हैं। विशेषज्ञों ने चेताया है कि यदि समय रहते नीतिगत कदम नहीं उठाए गए, तो कमज़ोर और निम्न आय वर्ग के परिवार इसकी सबसे ज़्यादा मार झेलेंगे।
कृषि लागत में उछाल से खाद्य संकट का खतरा
बांग्लादेश इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट स्टडीज (BIDS) के महानिदेशक एकेएम इनामुल हक ने एक नागरिक समाज मंच की चर्चा में कहा कि तेल की कीमतों में वृद्धि से उर्वरक, कीटनाशक और अन्य कृषि संसाधनों की लागत बढ़ गई है, जिससे कृषि उत्पादन लागत लगभग दोगुनी हो गई है। उन्होंने नीति निर्माताओं को सचेत करते हुए कहा कि यह मानकर नहीं चलना चाहिए कि आर्थिक हालात जल्द सुधरेंगे — बल्कि स्थिति और बिगड़ने की संभावना को ध्यान में रखते हुए तैयारी करनी होगी।
यह ऐसे समय में आया है जब विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में बांग्लादेश की आर्थिक विकास दर घटकर 3.4 प्रतिशत रह गई है — जो सरकार के 6.5 प्रतिशत के लक्ष्य से काफी कम है। वित्त वर्ष 2026-27 में भी विकास दर इसी स्तर पर बने रहने का अनुमान लगाया गया है।
ग्रामीण परिवारों पर असमान बोझ
हक ने सार्वजनिक खाद्य वितरण प्रणाली की समीक्षा की ज़रूरत पर ज़ोर दिया और विशेष रूप से ग्रामीण परिवारों की स्थिति पर ध्यान दिलाया। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में कर्ज़दार परिवारों का अनुपात 51 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जबकि महानगरों में यह 32 प्रतिशत और अन्य शहरी क्षेत्रों में 40 प्रतिशत है।
उन्होंने चेताया कि यदि सरकारी राहत तंत्र केवल शहरी क्षेत्रों पर केंद्रित रहा, तो मौसमी आय की अनिश्चितता से जूझ रहे ग्रामीण परिवारों तक सहायता नहीं पहुंच पाएगी। गौरतलब है कि कई ऐसे परिवार भी आर्थिक दबाव में हैं जो आधिकारिक गरीबी के आंकड़ों में दर्ज नहीं हैं।
अर्थशास्त्रियों की सिफारिशें
ढाका विश्वविद्यालय की अर्थशास्त्र की प्रोफेसर सयमा हक बिदिशा ने कहा कि यदि आर्थिक विकास असमानता कम नहीं करता और सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित नहीं होती, तो खाद्य सुरक्षा और आम लोगों तक विकास का लाभ पहुंचाना संभव नहीं होगा। उन्होंने कपड़ा उद्योग के अलावा अन्य क्षेत्रों के श्रमिकों के लिए भी न्यूनतम वेतन व्यवस्था लागू करने और असंगठित क्षेत्र के मज़दूरों की स्थिति पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया।
हक ने बाज़ार की निगरानी मज़बूत करने और आपूर्ति श्रृंखला में सुधार की भी वकालत की। उनका कहना था कि केवल मूल्य आयोग बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा — बाज़ार व्यवस्था को भी दुरुस्त करना होगा।
तीन बड़ी चुनौतियों से एक साथ लड़ता बांग्लादेश
रिपोर्टों के अनुसार, बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था इस समय एक साथ तीन बड़ी चुनौतियों का सामना कर रही है — आर्थिक विकास की धीमी रफ़्तार, बढ़ता व्यापार घाटा और बैंकिंग क्षेत्र की गंभीर कमज़ोरियाँ। इन तीनों का मिला-जुला असर खाद्य पदार्थों की कीमतों और आम नागरिकों की क्रय शक्ति पर और गहरा हो सकता है।
अर्थशास्त्रियों ने सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को मज़बूत करने, बाज़ार प्रबंधन में सुधार और आर्थिक विकास का लाभ समान रूप से वितरित करने की ज़रूरत पर एकमत से ज़ोर दिया है। अब देखना यह होगा कि बांग्लादेश की सरकार सर्दी से पहले इन चेतावनियों पर कितनी तेज़ी से अमल करती है।