25 सितंबर 2026
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मनमोहन सिंह की जयंती पर हैदराबाद के गचीबौली में कांस्य प्रतिमा का अनावरण आज

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मनमोहन सिंह की जयंती पर हैदराबाद के गचीबौली में कांस्य प्रतिमा का अनावरण आज

सारांश

तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने डॉ. मनमोहन सिंह की जयंती पर हैदराबाद के प्रमुख आईटी हब गचीबौली में उनकी कांस्य प्रतिमा का अनावरण किया। 1991 के आर्थिक सुधारों के वास्तुकार और दो बार के प्रधानमंत्री को तेलंगाना राज्य गठन में उनकी निर्णायक भूमिका के लिए भी सम्मानित किया गया।

मुख्य बातें

तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए.
रेवंत रेड्डी ने 25 सितंबर 2026 को पूर्व प्रधानमंत्री डॉ.
मनमोहन सिंह की जयंती पर उनकी कांस्य प्रतिमा का अनावरण किया।
प्रतिमा हैदराबाद के प्रमुख आईटी क्लस्टर गचीबौली स्थित विप्रो सर्कल पर स्थापित की गई है।
मंत्री पोन्नम प्रभाकर ने शुक्रवार को तैयारियों का निरीक्षण किया और 1991 के आर्थिक सुधारों को ऐतिहासिक बताया।
तेलंगाना सरकार ने 2009 से 2014 के बीच राज्य गठन की प्रक्रिया में डॉ.
मनमोहन सिंह की भूमिका को आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया।
मनरेगा, सूचना का अधिकार और शिक्षा का अधिकार — तीन जन-कल्याण कानूनों को उनकी विरासत के रूप में रेखांकित किया गया।

तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी शनिवार, 25 सितंबर 2026 को हैदराबाद में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की जयंती के अवसर पर उनकी कांस्य प्रतिमा का अनावरण करेंगे। यह प्रतिमा प्रमुख आईटी क्लस्टर गचीबौली स्थित विप्रो सर्कल पर स्थापित की गई है।

अनावरण समारोह की तैयारियाँ

हैदराबाद के प्रभारी मंत्री पोन्नम प्रभाकर ने शुक्रवार को अनावरण समारोह की तैयारियों का स्वयं निरीक्षण किया। उन्होंने इस अवसर पर डॉ. मनमोहन सिंह की सेवाओं को स्मरण किया और कहा कि यह प्रतिमा केवल एक स्मारक नहीं, बल्कि एक 'चिरस्थायी प्रतीक' है।

पोन्नम प्रभाकर के अनुसार, यह प्रतिमा आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्र निर्माण में डॉ. मनमोहन सिंह की भूमिका, उनकी आर्थिक दूरदर्शिता, सार्वजनिक सेवा के प्रति समर्पण और सरल नेतृत्व शैली की याद दिलाती रहेगी।

डॉ. मनमोहन सिंह का आर्थिक योगदान

पोन्नम प्रभाकर ने कहा कि डॉ. मनमोहन सिंह का नाम भारतीय इतिहास में एक 'विश्व स्तर पर सम्मानित अर्थशास्त्री' के रूप में सदैव अंकित रहेगा। उन्होंने रेखांकित किया कि 1991 में वित्त मंत्री के रूप में डॉ. मनमोहन सिंह द्वारा लागू किए गए आर्थिक सुधारों ने भारतीय अर्थव्यवस्था में ऐतिहासिक बदलावों का मार्ग प्रशस्त किया।

2004 से 2014 तक प्रधानमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल में राष्ट्रीय विकास, जन कल्याण और आर्थिक स्थिरता के लिए दिए गए योगदान को मंत्री ने 'अविस्मरणीय' बताया।

ऐतिहासिक कानून और जन-कल्याण कार्यक्रम

मंत्री पोन्नम प्रभाकर ने प्रधानमंत्री के रूप में डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल में लागू तीन प्रमुख कानूनों का उल्लेख किया — महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा), सूचना का अधिकार अधिनियम और शिक्षा का अधिकार अधिनियम। उन्होंने कहा कि इन कानूनों ने करोड़ों भारतीयों के अधिकारों और अवसरों का विस्तार किया।

गौरतलब है कि ये तीनों कानून आज भी सामाजिक सुरक्षा और नागरिक अधिकारों की आधारशिला माने जाते हैं और इनकी प्रासंगिकता नीतिगत विमर्श में बनी हुई है।

तेलंगाना राज्य गठन में भूमिका

तेलंगाना सरकार ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है कि 2009 में तत्कालीन यूपीए सरकार द्वारा अलग राज्य की प्रक्रिया शुरू करने और 2014 में आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम के माध्यम से तेलंगाना राज्य के वास्तविक गठन तक के पूरे घटनाक्रम में डॉ. मनमोहन सिंह की भूमिका निर्णायक रही।

पोन्नम प्रभाकर ने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए कहा कि करीमनगर संसदीय क्षेत्र के विकास के लिए कई पहलें डॉ. मनमोहन सिंह के सहयोग और मार्गदर्शन के कारण ही संभव हो पाईं। उन्होंने कहा कि डॉ. मनमोहन सिंह द्वारा सार्वजनिक मुद्दों पर दिखाया गया सकारात्मक दृष्टिकोण उनके लिए सदा प्रेरणास्रोत रहेगा।

आगे क्या

शनिवार को होने वाला यह अनावरण समारोह तेलंगाना में कांग्रेस सरकार के लिए राजनीतिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। गचीबौली जैसे प्रमुख आईटी केंद्र में प्रतिमा की स्थापना, डॉ. मनमोहन सिंह की तकनीक और उदारीकरण की विरासत को भी रेखांकित करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि तेलंगाना में सत्तारूढ़ कांग्रेस का एक सुविचारित राजनीतिक संकेत भी है — यह याद दिलाना कि राज्य का अस्तित्व किसकी देन है। दिलचस्प यह है कि स्थान का चुनाव भी प्रतीकात्मक है: आईटी हब में 1991 के उदारीकरण के वास्तुकार की प्रतिमा, उस नीतिगत विरासत को दृश्यमान करती है जिसने हैदराबाद को वैश्विक टेक मानचित्र पर रखा। हालाँकि, यह कार्यक्रम ऐसे समय में हो रहा है जब कांग्रेस केंद्र में विपक्ष में है और 2026 के चुनावी माहौल में विरासत की राजनीति तेज़ हो रही है — ऐसे में इस अनावरण का चुनावी निहितार्थ नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
RashtraPress
25 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हैदराबाद में मनमोहन सिंह की प्रतिमा कहाँ स्थापित की गई है?
डॉ. मनमोहन सिंह की कांस्य प्रतिमा हैदराबाद के प्रमुख आईटी क्लस्टर गचीबौली स्थित विप्रो सर्कल पर स्थापित की गई है। यह स्थान शहर के तकनीक और व्यापार केंद्र के रूप में जाना जाता है।
मनमोहन सिंह की प्रतिमा का अनावरण किसने किया?
तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने 25 सितंबर 2026 को डॉ. मनमोहन सिंह की जयंती पर इस प्रतिमा का अनावरण किया। समारोह की तैयारियों का निरीक्षण हैदराबाद के प्रभारी मंत्री पोन्नम प्रभाकर ने शुक्रवार को किया था।
तेलंगाना सरकार ने मनमोहन सिंह को क्यों सम्मानित किया?
तेलंगाना सरकार ने डॉ. मनमोहन सिंह को उनकी आर्थिक दूरदर्शिता, 1991 के उदारीकरण सुधारों और तेलंगाना राज्य गठन में निभाई गई निर्णायक भूमिका के लिए सम्मानित किया। सरकार ने आधिकारिक तौर पर माना है कि 2009 में यूपीए सरकार द्वारा अलग राज्य की प्रक्रिया शुरू करने से लेकर 2014 में आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम तक डॉ. मनमोहन सिंह की भूमिका ऐतिहासिक रही।
डॉ. मनमोहन सिंह की आर्थिक विरासत क्या है?
डॉ. मनमोहन सिंह ने 1991 में वित्त मंत्री के रूप में भारत में ऐतिहासिक आर्थिक उदारीकरण लागू किया, जिसने देश की अर्थव्यवस्था की दिशा बदल दी। 2004 से 2014 तक प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने मनरेगा, सूचना का अधिकार अधिनियम और शिक्षा का अधिकार अधिनियम जैसे महत्वपूर्ण जन-कल्याण कानून लागू किए।
मनमोहन सिंह का तेलंगाना राज्य गठन में क्या योगदान था?
डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने 2009 में तेलंगाना को अलग राज्य बनाने की प्रक्रिया शुरू की और 2014 में आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम के माध्यम से तेलंगाना राज्य का गठन संभव हुआ। तेलंगाना सरकार ने इस भूमिका को आधिकारिक रूप से ऐतिहासिक माना है।
राष्ट्र प्रेस
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