26 सितंबर 2026
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मनमोहन सिंह की जयंती पर खड़गे और कांग्रेस नेताओं ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि, आर्थिक सुधारों की विरासत को किया याद

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मनमोहन सिंह की जयंती पर खड़गे और कांग्रेस नेताओं ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि, आर्थिक सुधारों की विरासत को किया याद

सारांश

मनमोहन सिंह की जयंती पर कांग्रेस ने एकजुट होकर उनकी विरासत को याद किया — 1991 के उदारीकरण से लेकर मनरेगा और RTI तक। खड़गे से लेकर शिवकुमार और सुरजेवाला तक, हर नेता ने उन्हें समावेशी विकास के प्रतीक के रूप में स्मरण किया।

मुख्य बातें

26 सितंबर 2026 को पूर्व प्रधानमंत्री डॉ.
मनमोहन सिंह की जयंती पर कांग्रेस नेताओं ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक्स पर लिखा कि उनके ऐतिहासिक आर्थिक सुधारों ने लाखों लोगों को गरीबी से बाहर निकालने में मदद की।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के.
शिवकुमार ने बेंगलुरु मेट्रो की आधारशिला और राज्य के विकास में डॉ.
सिंह की दूरदर्शिता को रेखांकित किया।
1991 में वित्त मंत्री के रूप में शुरू किए गए आर्थिक उदारीकरण और 2004-2014 के दौरान मनरेगा, RTI तथा शिक्षा का अधिकार जैसे कानूनों को उनकी स्थायी विरासत बताया गया।
हिमाचल के CM सुक्खू , पूर्व CM गहलोत और कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने भी एक्स पर श्रद्धांजलि संदेश साझा किए।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे सहित कई वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने 26 सितंबर 2026 को पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। नेताओं ने भारत की आर्थिक प्रगति, राष्ट्र-निर्माण और समावेशी विकास में उनके अतुलनीय योगदान को याद किया।

खड़गे का श्रद्धांजलि संदेश

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक्स पर लिखा, 'हम भारत के राष्ट्र-निर्माण में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के असाधारण योगदान को गहरे सम्मान के साथ याद करते हैं। एक दूरदर्शी राजनेता के तौर पर, उनके ऐतिहासिक आर्थिक सुधारों ने भारत की विकास की दिशा बदल दी, नए अवसर पैदा किए और लाखों लोगों को गरीबी से बाहर निकालने में मदद की।' उन्होंने आगे कहा कि डॉ. सिंह की विनम्रता, ईमानदारी और समझदारी उनके सार्वजनिक जीवन की पहचान रही तथा उनकी सरकार का अधिकार-आधारित ढाँचा उनकी सोच का स्थायी प्रमाण है।

खड़गे ने यह भी कहा कि डॉ. सिंह की 'ईमानदार जन-सेवा, समावेशी विकास और बड़े बदलाव लाने वाले सुधारों की विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।'

मुख्यमंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं की प्रतिक्रियाएँ

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने एक्स पर श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि डॉ. मनमोहन सिंह ने सार्वजनिक जीवन में बुद्धिमानी, विनम्रता और ईमानदारी का परिचय दिया। उन्होंने विशेष रूप से बेंगलुरु मेट्रो की आधारशिला रखते समय डॉ. सिंह की उस दूरदर्शिता का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कर्नाटक और बेंगलुरु के विकास को अविभाज्य बताया था।

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंतंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने एक्स पर लिखा कि डॉ. सिंह ने दूरदृष्टि और आर्थिक समझ से भारत की अर्थव्यवस्था को नई गति दी और गरीब, दलित तथा वंचित तबकों के जीवन में अवसर बढ़ाना उनके आर्थिक दृष्टिकोण का अहम हिस्सा रहा।

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि डॉ. सिंह की विद्वता, सौम्यता और सरलता सभी के लिए प्रेरणादायक है और देश को आर्थिक शक्ति बनाने में उनके अतुलनीय योगदान को सदैव याद किया जाएगा।

कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने एक्स पर लिखा कि डॉ. सिंह की 'समावेशी विकास की दृष्टि और अटूट राजनीतिक ईमानदारी ने 21वीं सदी में भारत के एक स्वर्णिम युग की नींव रखी।'

डॉ. मनमोहन सिंह की विरासत

डॉ. मनमोहन सिंह का नाम भारतीय इतिहास में उस अर्थशास्त्री के रूप में अंकित है, जिन्होंने देश की आर्थिक प्रगति की मजबूत नींव रखी। 1991 में वित्त मंत्री के रूप में उनके द्वारा शुरू किए गए आर्थिक उदारीकरण के सुधारों ने भारतीय अर्थव्यवस्था की दिशा को ऐतिहासिक रूप से बदला।

2004 से 2014 तक प्रधानमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा), सूचना का अधिकार अधिनियम और शिक्षा का अधिकार अधिनियम जैसे ऐतिहासिक कानून लागू हुए, जिन्होंने नागरिकों के अधिकारों और अवसरों को व्यापक रूप से विस्तार दिया।

आम जनता और राजनीतिक विरासत पर असर

गौरतलब है कि डॉ. सिंह का योगदान केवल एक दल या विचारधारा तक सीमित नहीं रहा — उनके आर्थिक सुधारों को आज भी अर्थशास्त्री और नीति-निर्माता संदर्भ बिंदु के रूप में उद्धृत करते हैं। उनकी जयंती पर जारी इन श्रद्धांजलियों से स्पष्ट है कि उनकी राजनीतिक और आर्थिक विरासत कांग्रेस की पहचान का एक केंद्रीय स्तंभ बनी हुई है।

आने वाले समय में कांग्रेस पार्टी डॉ. सिंह की नीतिगत विरासत को अपने राजनीतिक विमर्श में और मजबूती से उठाती रहेगी, यह इन श्रद्धांजलियों के स्वर से स्पष्ट संकेत मिलता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

1991 के सुधारों की विरासत पर एकाधिकार का दावा विवादास्पद है, क्योंकि उन नीतियों के सामाजिक परिणामों पर आज भी बहस जारी है। जो बात मुख्यधारा की कवरेज अक्सर चूक जाती है, वह यह है कि इन श्रद्धांजलियों में नीतिगत आलोचना का कोई स्थान नहीं — डॉ. सिंह की विरासत को पार्टी चुनावी लड़ाई के हथियार के रूप में भी इस्तेमाल कर रही है।
RashtraPress
26 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डॉ. मनमोहन सिंह की जयंती कब है और इस बार किसने श्रद्धांजलि दी?
डॉ. मनमोहन सिंह की जयंती 26 सितंबर को मनाई जाती है। 2026 में इस अवसर पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार, हिमाचल के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला समेत अनेक वरिष्ठ नेताओं ने एक्स पर श्रद्धांजलि संदेश साझा किए।
डॉ. मनमोहन सिंह के 1991 के आर्थिक सुधार क्यों ऐतिहासिक माने जाते हैं?
1991 में वित्त मंत्री के रूप में डॉ. मनमोहन सिंह ने भारतीय अर्थव्यवस्था को उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण की राह पर ले जाने वाले सुधार लागू किए, जिसने भारत की विकास दिशा को आमूल बदल दिया। इन सुधारों को भारत के सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक नीतिगत परिवर्तनों में गिना जाता है।
प्रधानमंत्री के रूप में डॉ. मनमोहन सिंह ने कौन-सी प्रमुख योजनाएँ लागू कीं?
2004 से 2014 तक प्रधानमंत्री रहते हुए डॉ. मनमोहन सिंह ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा), सूचना का अधिकार अधिनियम और शिक्षा का अधिकार अधिनियम जैसे ऐतिहासिक कानून लागू किए। इन नीतियों ने गरीब और वंचित वर्गों के अधिकारों को कानूनी आधार दिया।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री शिवकुमार ने डॉ. सिंह को बेंगलुरु के संदर्भ में क्यों याद किया?
डी.के. शिवकुमार ने बताया कि बेंगलुरु मेट्रो की आधारशिला रखते समय डॉ. मनमोहन सिंह ने कर्नाटक और बेंगलुरु के विकास को एक-दूसरे से अविभाज्य बताया था। उनकी इस दूरदर्शिता को शिवकुमार ने प्रेरणा का स्रोत बताया।
मनमोहन सिंह की राजनीतिक विरासत आज कांग्रेस के लिए कितनी महत्वपूर्ण है?
जयंती पर दी गई एकजुट श्रद्धांजलियों से स्पष्ट है कि कांग्रेस डॉ. सिंह की आर्थिक और नीतिगत विरासत को अपनी राजनीतिक पहचान के केंद्र में रखना चाहती है। पार्टी उनके उदारीकरण से लेकर अधिकार-आधारित शासन तक के सफर को अपने विपक्षी विमर्श में प्रमुखता से उठाती है।
राष्ट्र प्रेस
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