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भारत-दक्षिण अफ्रीका एमएसएमई बैठक: वित्त, डिजिटलीकरण और कौशल विकास पर बनी सहमति

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भारत-दक्षिण अफ्रीका एमएसएमई बैठक: वित्त, डिजिटलीकरण और कौशल विकास पर बनी सहमति

सारांश

भारत और दक्षिण अफ्रीका ने नई दिल्ली में एमएसएमई क्षेत्र में सहयोग की नई संभावनाएँ तलाशीं — वित्त, डिजिटलीकरण और कौशल विकास इस साझेदारी के केंद्र में रहे। मंत्री जीतन राम मांझी और स्टेला नडाबेनी की अगुवाई में हुई यह बैठक दोनों देशों के बीच एमएसएमई-केंद्रित आर्थिक संबंधों को नई दिशा देने का प्रयास है।

मुख्य बातें

एमएसएमई मंत्री जीतन राम मांझी और दक्षिण अफ्रीका की लघु व्यवसाय विकास मंत्री स्टेला टेम्बिसा नडाबेनी की अध्यक्षता में 2 जून 2026 को नई दिल्ली में द्विपक्षीय बैठक हुई।
दोनों देशों ने वित्त तक पहुँच , औपचारिकरण , डिजिटलीकरण और कौशल विकास को सहयोग के प्रमुख क्षेत्र माना।
एमएसएमई मंत्रालय ने 'नई औद्योगिक क्रांति पर ब्रिक्स साझेदारी' के तहत दूसरी एसएमई कार्य समूह बैठक भी आयोजित की।
ब्रिक्स देशों के बीच प्रौद्योगिकी तक पहुँच , नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र और कौशल विकास में गहरे सहयोग पर सहमति बनी।
एमएसएमई को क्षेत्रीय और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में एकीकृत करने के लिए बहु-आयामी दृष्टिकोण अपनाने पर ज़ोर दिया गया।

नई दिल्ली में 2 जून 2026 को आयोजित एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक में भारत और दक्षिण अफ्रीका ने एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा देने पर विस्तृत चर्चा की। दोनों देशों ने आर्थिक विकास, रोज़गार सृजन और समावेशी विकास में इस क्षेत्र की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित करते हुए साझा प्रतिबद्धता जताई।

बैठक का नेतृत्व और स्वरूप

यह बैठक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय के तत्वावधान में आयोजित हुई। भारतीय पक्ष की अध्यक्षता एमएसएमई मंत्री जीतन राम मांझी ने की, जबकि दक्षिण अफ्रीकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वहाँ की लघु व्यवसाय विकास मंत्री स्टेला टेम्बिसा नडाबेनी ने किया। आधिकारिक बयान के अनुसार, यह बैठक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय जुड़ाव को गहरा करने की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

सहयोग के प्रमुख क्षेत्र

दोनों पक्षों ने जिन संभावित सहयोग-क्षेत्रों पर सहमति जताई, उनमें वित्त तक पहुँच को व्यापक बनाना, उद्यमों के औपचारिकरण को प्रोत्साहन देना, डिजिटलीकरण की गति तेज़ करना, तथा उद्यमिता और कौशल विकास को मज़बूत करना प्रमुख रूप से शामिल हैं। साथ ही एमएसएमई को क्षेत्रीय और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में एकीकृत करने के लिए एक बहु-आयामी दृष्टिकोण अपनाने पर भी ज़ोर दिया गया।

ब्रिक्स एसएमई कार्य समूह की भूमिका

इसी क्रम में एमएसएमई मंत्रालय की ओर से 'नई औद्योगिक क्रांति पर ब्रिक्स साझेदारी' के अंतर्गत दूसरी 'एसएमई कार्य समूह बैठक' भी आयोजित की गई, जिसमें ब्रिक्स देशों ने सक्रिय भागीदारी की। इस मंच ने सदस्य देशों को अनुभव और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियाँ साझा करने का अवसर दिया। गौरतलब है कि यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक स्तर पर एमएसएमई को आपूर्ति श्रृंखला पुनर्गठन और तकनीकी परिवर्तन की दोहरी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।

तकनीकी अंतर पाटने पर जोर

बैठक में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि एमएसएमई की तकनीकी तत्परता बढ़ाने, डिजिटल समावेशन को व्यापक करने और नवाचार क्षमताओं को सुदृढ़ करने के लिए ब्रिक्स अर्थव्यवस्थाओं के बीच गहरा सहयोग अनिवार्य है। प्रौद्योगिकी तक पहुँच और कौशल विकास को इस दिशा में सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ माना गया।

आगे की राह

दोनों देशों के बीच हुई इस चर्चा से उम्मीद है कि आने वाले समय में ठोस द्विपक्षीय समझौतों और संयुक्त कार्यक्रमों का मार्ग प्रशस्त होगा। यह बैठक भारत-दक्षिण अफ्रीका आर्थिक संबंधों को एमएसएमई के माध्यम से नई ऊँचाई देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ठोस प्रतिबद्धताओं का अभाव ध्यान खींचता है — न कोई संयुक्त कार्यक्रम घोषित हुआ, न कोई वित्तीय लक्ष्य तय हुआ। भारत का एमएसएमई क्षेत्र GDP में लगभग 30% और निर्यात में 45% से अधिक का योगदान देता है, फिर भी वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में इसकी हिस्सेदारी सीमित बनी हुई है। दक्षिण अफ्रीका के साथ साझेदारी तभी अर्थपूर्ण होगी जब इसे मापने योग्य लक्ष्यों — जैसे संयुक्त निर्यात संख्या या प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौतों — से जोड़ा जाए। अन्यथा यह बैठकों की उस लंबी श्रृंखला में जुड़ जाएगी जो घोषणाओं तक सिमट कर रह जाती हैं।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत और दक्षिण अफ्रीका की एमएसएमई बैठक में क्या तय हुआ?
दोनों देशों ने वित्त तक पहुँच, डिजिटलीकरण, औपचारिकरण और कौशल विकास को एमएसएमई सहयोग के प्रमुख क्षेत्र माना। साथ ही एमएसएमई को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में एकीकृत करने के लिए बहु-आयामी दृष्टिकोण अपनाने पर सहमति बनी।
इस बैठक की अध्यक्षता किसने की?
भारतीय पक्ष का नेतृत्व एमएसएमई मंत्री जीतन राम मांझी ने किया, जबकि दक्षिण अफ्रीकी प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई लघु व्यवसाय विकास मंत्री स्टेला टेम्बिसा नडाबेनी ने की।
ब्रिक्स एसएमई कार्य समूह बैठक का क्या महत्व है?
'नई औद्योगिक क्रांति पर ब्रिक्स साझेदारी' के तहत यह दूसरी एसएमई कार्य समूह बैठक थी, जिसमें ब्रिक्स देशों ने अनुभव और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियाँ साझा कीं। इसमें प्रौद्योगिकी, नवाचार और कौशल विकास में गहरे सहयोग की आवश्यकता को रेखांकित किया गया।
एमएसएमई को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में शामिल करने के लिए क्या कदम सुझाए गए?
बैठक में अधिक डिजिटल समावेशन, मज़बूत नवाचार क्षमताओं और बेहतर तकनीकी तत्परता के माध्यम से तकनीकी अंतर पाटने पर जोर दिया गया। इसके लिए बहु-आयामी दृष्टिकोण अपनाने की बात कही गई।
यह बैठक भारत-दक्षिण अफ्रीका संबंधों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
यह बैठक दोनों देशों के बीच एमएसएमई-केंद्रित द्विपक्षीय जुड़ाव को गहरा करने की दिशा में एक औपचारिक कदम है। इससे आने वाले समय में ठोस समझौतों और संयुक्त कार्यक्रमों की नींव पड़ने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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