भारतीय रेलवे विद्युतीकरण: 90 साल में 30%, 10 साल में 70% — PM मोदी ने लाल किले से गिनाई उपलब्धियाँ
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2026 को लाल किले की प्राचीर से स्वतंत्रता दिवस संबोधन में भारतीय रेलवे विद्युतीकरण की ऐतिहासिक गति का उल्लेख करते हुए कहा कि जो काम 90 वर्षों में मात्र 30 प्रतिशत तक पहुँचा, वह पिछले 10 वर्षों में 70 प्रतिशत और पूर्ण कर लिया गया। उन्होंने इसे देश की कार्य-संस्कृति और लक्ष्य-प्राप्ति की नई गति का प्रमाण बताया।
विद्युतीकरण की शताब्दी-लंबी यात्रा
प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि भारत में रेलवे विद्युतीकरण की शुरुआत वर्ष 1925 में हुई थी। इसके बाद के 90 वर्षों में — यानी लगभग एक सदी की अवधि में — देश के रेलवे नेटवर्क का केवल 30 प्रतिशत हिस्सा ही विद्युतीकृत हो पाया। उन्होंने कहा, "आपको जानकर आश्चर्य होगा कि हमारे देश में रेलवे विद्युतीकरण का काम 1925 में शुरू हुआ था। इसके बाद 90 वर्षों में केवल 30 प्रतिशत रेलवे नेटवर्क का विद्युतीकरण हो पाया।"
यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी स्वतंत्रता के 78वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है और बुनियादी ढाँचे की गति को राष्ट्रीय विमर्श का केंद्र बनाया जा रहा है। गौरतलब है कि दशकों तक रेलवे विद्युतीकरण नीतिगत प्राथमिकता की सूची में निचले पायदान पर रहा।
पिछले दशक की ऐतिहासिक उपलब्धि
मोदी ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में जिस संकल्प और गति से काम किया गया, उसके परिणामस्वरूप शेष 70 प्रतिशत नेटवर्क का विद्युतीकरण पूर्ण कर लिया गया। उनके शब्दों में, "90 साल में 30 प्रतिशत और 10 साल में 70 प्रतिशत — यही लक्ष्य प्राप्ति की गति और कार्य संस्कृति का प्रमाण है।"
आज भारत के ब्रॉड गेज रेलवे नेटवर्क का लगभग 99.6 प्रतिशत हिस्सा विद्युतीकृत हो चुका है, जिससे भारत दुनिया के सबसे बड़े विद्युतीकृत रेलवे नेटवर्क वाले देशों में शामिल हो गया है।
वैश्विक तुलना में भारत की स्थिति
रेलवे विद्युतीकरण के मामले में भारत अब कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं से आगे निकल चुका है। तुलनात्मक आँकड़ों के अनुसार, चीन का रेलवे नेटवर्क लगभग 82 प्रतिशत, स्पेन का 67 प्रतिशत, जापान का 64 प्रतिशत, फ्रांस का 60 प्रतिशत और यूनाइटेड किंगडम का मात्र 39 प्रतिशत तक विद्युतीकृत है।
केवल स्विट्जरलैंड ही 100 प्रतिशत विद्युतीकरण के साथ भारत से आगे है, हालाँकि उसका रेल नेटवर्क भारत की तुलना में काफी छोटा है।
पर्यावरण और अर्थव्यवस्था पर असर
प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि व्यापक विद्युतीकरण से डीजल आयात पर निर्भरता घटी है, विदेशी मुद्रा की बचत हुई है और कार्बन उत्सर्जन में कमी आई है। बिजली-चालित ट्रेनों के बढ़ते उपयोग से रेलवे अधिक ऊर्जा-कुशल और पर्यावरण-अनुकूल बना है।
हाइड्रोजन ट्रेन — भविष्य की ओर कदम
मोदी ने घोषणा की कि भारत ने हाल ही में हाइड्रोजन ईंधन से चलने वाली अपनी पहली ट्रेन शुरू की है। उन्होंने कहा, "यह अपनी तरह की सबसे लंबी और सबसे शक्तिशाली ट्रेन है।" लगभग 2,600 यात्रियों की क्षमता वाली यह ट्रेन स्वच्छ ईंधन-आधारित रेल परिवहन की संभावनाओं को प्रदर्शित करेगी।
सरकार का मानना है कि हाइड्रोजन तकनीक भविष्य में पारंपरिक डीजल-आधारित ट्रेनों का पर्यावरण-अनुकूल विकल्प बन सकती है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत का लक्ष्य केवल विश्व की बराबरी करना नहीं, बल्कि भविष्य की तकनीकों में अग्रणी भूमिका निभाना है — और रेलवे आधुनिकीकरण इसी दिशा में एक निर्णायक कदम है।