अमृत भारत योजना: 75 रेलवे स्टेशनों का उद्घाटन, ब्रजेश पाठक बोले — 2047 का विकसित भारत लक्ष्य होगा पूरा
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने 17 जुलाई 2026 को लखनऊ के पुनर्विकसित ऐशबाग जंक्शन रेलवे स्टेशन से कहा कि मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और सुदृढ़ संपर्क-व्यवस्था के बल पर भारत तेज़ी से समृद्धि की राह पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक विकसित भारत बनाने के संकल्प को देश अवश्य पूरा करेगा।
मुख्य घटनाक्रम
पाठक अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत देशभर के 75 पुनर्विकसित रेलवे स्टेशनों के उद्घाटन समारोह में वर्चुअल रूप से सम्मिलित हुए। प्रधानमंत्री मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इन स्टेशनों का एक साथ लोकार्पण किया। पाठक इस अवसर पर ऐशबाग जंक्शन से मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे।
भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का शुभारंभ
इसी समारोह में प्रधानमंत्री मोदी ने हरियाणा के जींद जंक्शन से देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। यह ट्रेन जींद और सोनीपत रेलवे स्टेशनों के बीच 89 किलोमीटर के मार्ग पर संचालित की जाएगी। पाठक ने बताया कि जींद में ही हाइड्रोजन स्टोरेज और रीफ्यूलिंग की स्वदेशी सुविधा भी विकसित की गई है, जो पर्यावरण-अनुकूल परिवहन की दिशा में एक अहम कदम है।
अमृत भारत स्टेशनों की विशेषताएँ
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि पुनर्विकसित स्टेशनों को दीर्घकालिक मास्टर प्लान के तहत हवाई अड्डे जैसी आधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया है। इनमें मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी, बेहतर सुरक्षा प्रबंध, चौड़े सर्कुलेटिंग एरिया, अलग आगमन व प्रस्थान द्वार, लिफ्ट और एस्केलेटर, आधुनिक प्रतीक्षालय, मुफ्त वाई-फाई तथा दिव्यांगजन-अनुकूल सुविधाएँ शामिल हैं। स्टेशनों के डिज़ाइन में स्थानीय कला, संस्कृति और वास्तुकला को आधुनिक बुनियादी ढाँचे के साथ जोड़ा गया है — विरासत और आधुनिकता का यह संगम इन स्टेशनों की पहचान बन रहा है।
सरकार की प्राथमिकताएँ
पाठक ने कहा कि केंद्र और प्रदेश की 'डबल इंजन सरकार' हर वर्ग के हित में कार्य कर रही है। उन्होंने ज़ोर दिया कि इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार और सुगम यातायात सुनिश्चित करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी विकास कार्यों में प्राथमिकता दी जा रही है। हाइड्रोजन ट्रेन को उन्होंने इसी नीतिगत दिशा का प्रत्यक्ष उदाहरण बताया।
क्या होगा आगे
अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत देशभर में और स्टेशनों के पुनर्विकास की प्रक्रिया जारी है। हाइड्रोजन ट्रेन के सफल संचालन के बाद इस तकनीक को अन्य मार्गों पर विस्तारित करने की संभावना तलाशी जाएगी, जो भारतीय रेलवे के हरित भविष्य की नींव रख सकती है।