मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन: 2027 में पहला चरण, जापानी E20 ट्रेनें 2030 तक — MEA का स्पष्टीकरण
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार, 17 जुलाई को नई दिल्ली में आयोजित साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में स्पष्ट किया कि मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (MAHSR) परियोजना तय योजना के अनुरूप आगे बढ़ रही है और 2027 तक इसका पहला चरण शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने जापान के एक पूर्व मंत्री द्वारा सोशल मीडिया पर लगाए गए वादाखिलाफी के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह 'एक व्यक्ति की राय है, जो तथ्यों से काफी अलग है।'
मुख्य घटनाक्रम
प्रवक्ता जायसवाल ने बताया कि भारत और जापान के बीच बातचीत सुचारु रूप से जारी है। जापान की E-20 सीरीज की हाई-स्पीड ट्रेनें परियोजना का हिस्सा होंगी, लेकिन ये 2030 के शुरुआती वर्षों में ही उपलब्ध हो सकेंगी क्योंकि वे अभी निर्माणाधीन हैं। इस अंतराल को देखते हुए दोनों देशों ने सहमति बनाई है कि पहले चरण की शुरुआत भारतीय हाई-स्पीड ट्रेन से की जाएगी।
उन्होंने यह भी बताया कि इस संबंध में सिग्नलिंग उपकरण का ऑर्डर दिया जा चुका है और वह अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है। परियोजना का निर्माण कार्य तेज़ गति से प्रगति पर है।
जापानी पूर्व मंत्री के आरोप और भारत का जवाब
दरअसल, हाल ही में जापान के एक पूर्व मंत्री ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के ज़रिए भारत पर बुलेट ट्रेन परियोजना में देरी और वादाखिलाफी के गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने यह भी दावा किया था कि जापान की ओर से एक अलग प्रस्ताव दिया गया था।
जायसवाल ने इन दोनों दावों को खारिज करते हुए कहा, 'जापान की ओर से कोई अलग प्रस्ताव नहीं मिला था।' उन्होंने स्पष्ट किया कि उक्त पोस्ट किसी आधिकारिक जापानी सरकारी रुख को नहीं दर्शाती।
परियोजना की वर्तमान स्थिति
मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना है, जो दोनों महानगरों के बीच की दूरी को कुछ ही घंटों में तय करने का लक्ष्य रखती है। यह परियोजना भारत-जापान द्विपक्षीय सहयोग का एक प्रमुख स्तंभ है, जिसमें जापान की ओर से तकनीकी और वित्तीय सहायता शामिल है।
गौरतलब है कि यह परियोजना भूमि अधिग्रहण और तकनीकी जटिलताओं के कारण अपनी मूल समयसीमा से पिछड़ी है। ऐसे में 2027 में पहले चरण की शुरुआत और 2030 तक जापानी ट्रेनों की उपलब्धता एक संशोधित किंतु ठोस रोडमैप प्रस्तुत करती है।
आगे क्या होगा
दोनों देशों का साझा लक्ष्य है कि हाई-स्पीड ट्रेन सेवा जल्द से जल्द शुरू हो। पहले चरण में भारतीय हाई-स्पीड ट्रेन का संचालन होगा, जबकि जापानी E-20 ट्रेनें आने के बाद उन्हें मार्ग पर तैनात किया जाएगा। सिग्नलिंग प्रणाली का ऑर्डर पहले ही दिया जा चुका है, जो परियोजना की प्रगति का संकेत देता है।