17 जुलाई 2026
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मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन: 2027 में पहला चरण, जापानी E20 ट्रेनें 2030 तक — MEA का स्पष्टीकरण

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मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन: 2027 में पहला चरण, जापानी E20 ट्रेनें 2030 तक — MEA का स्पष्टीकरण

सारांश

भारत के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन का पहला चरण 2027 में शुरू होगा और जापानी E-20 ट्रेनें 2030 तक आएंगी। जापान के एक पूर्व मंत्री के वादाखिलाफी के आरोपों को 'तथ्यों से अलग एक व्यक्ति की राय' बताकर खारिज किया गया।

मुख्य बातें

MEA प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 17 जुलाई को साप्ताहिक ब्रीफिंग में मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना की प्रगति को संतोषजनक बताया।
परियोजना का पहला चरण 2027 में शुरू होगा और शुरुआत भारतीय हाई-स्पीड ट्रेन से की जाएगी।
जापान की E-20 सीरीज ट्रेनें 2030 के शुरुआती वर्षों में उपलब्ध होंगी क्योंकि वे अभी निर्माणाधीन हैं।
सिग्नलिंग उपकरण का ऑर्डर दिया जा चुका है और वह अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है।
जापान के एक पूर्व मंत्री के वादाखिलाफी के आरोपों और अलग प्रस्ताव के दावे को MEA ने सिरे से खारिज किया।

विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार, 17 जुलाई को नई दिल्ली में आयोजित साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में स्पष्ट किया कि मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (MAHSR) परियोजना तय योजना के अनुरूप आगे बढ़ रही है और 2027 तक इसका पहला चरण शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने जापान के एक पूर्व मंत्री द्वारा सोशल मीडिया पर लगाए गए वादाखिलाफी के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह 'एक व्यक्ति की राय है, जो तथ्यों से काफी अलग है।'

मुख्य घटनाक्रम

प्रवक्ता जायसवाल ने बताया कि भारत और जापान के बीच बातचीत सुचारु रूप से जारी है। जापान की E-20 सीरीज की हाई-स्पीड ट्रेनें परियोजना का हिस्सा होंगी, लेकिन ये 2030 के शुरुआती वर्षों में ही उपलब्ध हो सकेंगी क्योंकि वे अभी निर्माणाधीन हैं। इस अंतराल को देखते हुए दोनों देशों ने सहमति बनाई है कि पहले चरण की शुरुआत भारतीय हाई-स्पीड ट्रेन से की जाएगी।

उन्होंने यह भी बताया कि इस संबंध में सिग्नलिंग उपकरण का ऑर्डर दिया जा चुका है और वह अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है। परियोजना का निर्माण कार्य तेज़ गति से प्रगति पर है।

जापानी पूर्व मंत्री के आरोप और भारत का जवाब

दरअसल, हाल ही में जापान के एक पूर्व मंत्री ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के ज़रिए भारत पर बुलेट ट्रेन परियोजना में देरी और वादाखिलाफी के गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने यह भी दावा किया था कि जापान की ओर से एक अलग प्रस्ताव दिया गया था।

जायसवाल ने इन दोनों दावों को खारिज करते हुए कहा, 'जापान की ओर से कोई अलग प्रस्ताव नहीं मिला था।' उन्होंने स्पष्ट किया कि उक्त पोस्ट किसी आधिकारिक जापानी सरकारी रुख को नहीं दर्शाती।

परियोजना की वर्तमान स्थिति

मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना है, जो दोनों महानगरों के बीच की दूरी को कुछ ही घंटों में तय करने का लक्ष्य रखती है। यह परियोजना भारत-जापान द्विपक्षीय सहयोग का एक प्रमुख स्तंभ है, जिसमें जापान की ओर से तकनीकी और वित्तीय सहायता शामिल है।

गौरतलब है कि यह परियोजना भूमि अधिग्रहण और तकनीकी जटिलताओं के कारण अपनी मूल समयसीमा से पिछड़ी है। ऐसे में 2027 में पहले चरण की शुरुआत और 2030 तक जापानी ट्रेनों की उपलब्धता एक संशोधित किंतु ठोस रोडमैप प्रस्तुत करती है।

आगे क्या होगा

दोनों देशों का साझा लक्ष्य है कि हाई-स्पीड ट्रेन सेवा जल्द से जल्द शुरू हो। पहले चरण में भारतीय हाई-स्पीड ट्रेन का संचालन होगा, जबकि जापानी E-20 ट्रेनें आने के बाद उन्हें मार्ग पर तैनात किया जाएगा। सिग्नलिंग प्रणाली का ऑर्डर पहले ही दिया जा चुका है, जो परियोजना की प्रगति का संकेत देता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि 2027 में 'पहला चरण' कितने किलोमीटर का होगा और इसमें यात्री सेवा शामिल होगी या केवल परीक्षण। परियोजना की मूल समयसीमा पहले ही कई बार खिसक चुकी है, और भूमि अधिग्रहण की चुनौतियाँ पूरी तरह हल नहीं हुई हैं। जापानी पूर्व मंत्री की पोस्ट को 'एक व्यक्ति की राय' कहकर खारिज करना कूटनीतिक रूप से सुविधाजनक है, परंतु यह उन संरचनात्मक मतभेदों को संबोधित नहीं करता जो तकनीकी हस्तांतरण और समयसीमा को लेकर दोनों पक्षों के बीच कथित तौर पर बने हुए हैं।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन का पहला चरण कब शुरू होगा?
MEA के अनुसार, मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना का पहला चरण 2027 में शुरू होगा। इस चरण में भारतीय हाई-स्पीड ट्रेन का उपयोग किया जाएगा क्योंकि जापान की E-20 सीरीज ट्रेनें 2030 तक ही उपलब्ध हो सकेंगी।
जापान की E-20 ट्रेनें बुलेट ट्रेन परियोजना में कब आएंगी?
जापान की E-20 सीरीज ट्रेनें 2030 के शुरुआती वर्षों में उपलब्ध होने की उम्मीद है क्योंकि ये अभी निर्माणाधीन हैं। तब तक भारतीय हाई-स्पीड ट्रेन से सेवा शुरू करने की योजना है।
जापान के पूर्व मंत्री ने भारत पर क्या आरोप लगाए थे?
जापान के एक पूर्व मंत्री ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर भारत पर बुलेट ट्रेन परियोजना में वादाखिलाफी का आरोप लगाया था और दावा किया था कि जापान की ओर से एक अलग प्रस्ताव दिया गया था। MEA ने इन दोनों दावों को खारिज करते हुए कहा कि यह तथ्यों से अलग एक व्यक्ति की राय है और जापान की ओर से कोई अलग प्रस्ताव नहीं मिला था।
बुलेट ट्रेन परियोजना में सिग्नलिंग उपकरण का क्या हुआ?
MEA प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि सिग्नलिंग उपकरण का ऑर्डर पहले ही दिया जा चुका है और वह अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है। यह परियोजना की ठोस प्रगति का संकेत है।
भारत-जापान बुलेट ट्रेन परियोजना की मौजूदा स्थिति क्या है?
MEA के अनुसार, भारत और जापान के बीच MAHSR परियोजना पर बातचीत सुचारु रूप से जारी है और निर्माण कार्य तेज़ गति से आगे बढ़ रहा है। दोनों देशों का साझा लक्ष्य है कि हाई-स्पीड ट्रेन सेवा जल्द से जल्द शुरू हो।
राष्ट्र प्रेस
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