4 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन: गुजरात में 80% काम पूरा, 2029 तक चरणबद्ध संचालन का लक्ष्य

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन: गुजरात में 80% काम पूरा, 2029 तक चरणबद्ध संचालन का लक्ष्य

सारांश

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का अहमदाबाद दौरा महज़ औपचारिकता नहीं था — गुजरात में 80% निर्माण पूरा होने और सूरत-बिलिमोरा खंड के अगले वर्ष चालू होने की घोषणा के साथ, भारत की पहली हाई-स्पीड रेल परियोजना अब असल रफ़्तार पकड़ती दिख रही है।

मुख्य बातें

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 4 जुलाई को अहमदाबाद में मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना का स्थलीय निरीक्षण किया।
गुजरात क्षेत्र में लगभग 80 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा; पूरी परियोजना 2029 तक चरणबद्ध रूप से चालू होगी।
पहला खंड सूरत से बिलिमोरा — अगले वर्ष चालू होने का लक्ष्य; इसके बाद वापी-सूरत, वापी-अहमदाबाद, अहमदाबाद-ठाणे और अंत में अहमदाबाद-मुंबई खंड।
अहमदाबाद में बुलेट ट्रेन का ट्रैक लगभग 100 फीट की ऊँचाई पर; पुल तैयार, अब ट्रैक बिछाने का कार्य शेष।
बस स्टैंड, मेट्रो, रेलवे और बुलेट ट्रेन — चारों परिवहन माध्यमों का मल्टीमॉडल इंटीग्रेशन एक ही परिसर में।
स्टेशन का डिज़ाइन अहमदाबाद की पतंग संस्कृति से प्रेरित।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 4 जुलाई को अहमदाबाद का दौरा कर मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना और मेट्रो प्रोजेक्ट की प्रगति का सीधे स्थल पर जाकर जायजा लिया। उन्होंने ऐतिहासिक कालूपुर रेलवे स्टेशन का निरीक्षण किया और परियोजना स्थल पर कार्यरत मजदूरों से सीधी बातचीत की। वैष्णव ने स्पष्ट किया कि गुजरात क्षेत्र में लगभग 80 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और यह परियोजना 2029 तक अलग-अलग चरणों में चालू हो जाएगी।

चरणबद्ध संचालन की रूपरेखा

वैष्णव ने बताया कि सबसे पहले सूरत से बिलिमोरा का खंड अगले वर्ष चालू किया जाएगा। इसके बाद क्रमशः वापी से सूरत, फिर वापी से अहमदाबाद, फिर अहमदाबाद से ठाणे और अंत में अहमदाबाद से मुंबई वाले खंड पर काम पूरा होगा। यह भारत की पहली हाई-स्पीड रेल परियोजना है, जो जापान की शिंकानसेन तकनीक पर आधारित है।

गौरतलब है कि इस परियोजना की घोषणा 2017 में हुई थी और शुरुआती समयसीमाओं में कई बार संशोधन हो चुका है। अब सरकार ने 2029 को अंतिम पूर्णता वर्ष बताया है।

तकनीकी चुनौतियाँ

वैष्णव ने शहरी क्षेत्र में निर्माण की जटिलताओं का उल्लेख करते हुए कहा, 'शहर के अंदर बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य बहुत जटिल है। कई जगहों पर रेलवे ट्रैक को पार करना होगा और कई स्थानों पर मौजूदा रेलवे लाइनों के ऊपर बने फ्लाईओवर को भी पार करना होगा। कई जगहों पर डबल क्रॉसिंग की जरूरत है, जिससे यह तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण हो जाता है।' उन्होंने बताया कि अहमदाबाद शहर में बुलेट ट्रेन का ट्रैक औसतन लगभग 100 फीट की ऊँचाई पर बनाया गया है और पुल का ढाँचा तैयार हो चुका है — अब ट्रैक बिछाने का कार्य शेष है।

मल्टीमॉडल इंटीग्रेशन की विशेषता

अहमदाबाद स्टेशन की एक प्रमुख विशेषता यह है कि यहाँ बस स्टैंड, मेट्रो, रेलवे और बुलेट ट्रेन — चारों परिवहन माध्यमों को एक ही परिसर में एकीकृत किया जा रहा है। वैष्णव ने बताया कि ग्राउंड फ्लोर पर मेट्रो स्टेशन होगा, पहली मंजिल पर रेलवे स्टेशन और दूसरी मंजिल बुलेट ट्रेन स्टेशन से जुड़ेगी। इससे यात्री बिना शहर में निकले एक परिवहन माध्यम से दूसरे में आसानी से जा सकेंगे।

यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब भारत के अधिकांश रेलवे स्टेशनों पर अंतर-परिवहन संपर्क अभी भी कमज़ोर है। अहमदाबाद का यह मॉडल देश के अन्य बड़े शहरों के लिए एक नज़ीर बन सकता है।

सांस्कृतिक पहचान को डिज़ाइन में जगह

वैष्णव ने बताया कि अहमदाबाद बुलेट ट्रेन स्टेशन का वास्तुशिल्प डिज़ाइन शहर की सांस्कृतिक पहचान — पतंग — को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। उन्होंने कहा, 'अहमदाबाद की संस्कृति में पतंग का बहुत बड़ा महत्व है। बुलेट ट्रेन के स्टेशन का डिजाइन पतंग को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है।' निरीक्षण के दौरान परियोजना स्थल पर 'भारत माता की जय' के नारे लगाए गए और मजदूरों ने रेल मंत्री के साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं।

आगे की राह

यह परियोजना पूरी होने पर मुंबई और अहमदाबाद के बीच की यात्रा, जो अभी लगभग 7-8 घंटे लेती है, घटकर करीब 2 घंटे रह जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि चरणबद्ध संचालन से न केवल परियोजना की व्यावहारिकता सिद्ध होगी, बल्कि यात्रियों का विश्वास भी बढ़ेगा। सूरत-बिलिमोरा खंड के अगले वर्ष चालू होने की घोषणा इस दिशा में पहली ठोस कसौटी होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह परियोजना पहले भी कई बार समयसीमा चूक चुकी है — 2023 की मूल डेडलाइन से लेकर अब 2029 तक का सफर इस बात की याद दिलाता है। सूरत-बिलिमोरा खंड की 'अगले वर्ष' लॉन्च की घोषणा पहली असली कसौटी होगी — अगर यह खंड समय पर चालू हुआ, तो शेष परियोजना पर भरोसा बढ़ेगा। मल्टीमॉडल इंटीग्रेशन का विचार निस्संदेह दूरदर्शी है, पर इसकी सफलता परिचालन समन्वय पर निर्भर करेगी, जो भारत के बड़े स्टेशनों पर ऐतिहासिक रूप से कमज़ोर रही है। असली परीक्षा तब होगी जब पहली बुलेट ट्रेन पटरी पर दौड़ेगी।
RashtraPress
4 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना कब तक पूरी होगी?
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार यह परियोजना 2029 तक अलग-अलग चरणों में पूरी होगी। सबसे पहले सूरत से बिलिमोरा खंड अगले वर्ष चालू होने का लक्ष्य है।
गुजरात में बुलेट ट्रेन का कितना काम पूरा हो चुका है?
रेल मंत्री ने 4 जुलाई के निरीक्षण के दौरान बताया कि गुजरात क्षेत्र में लगभग 80 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। अहमदाबाद में पुल का ढाँचा तैयार है और अब ट्रैक बिछाने का कार्य बाकी है।
अहमदाबाद बुलेट ट्रेन स्टेशन की क्या खासियत है?
अहमदाबाद स्टेशन पर बस स्टैंड, मेट्रो, रेलवे और बुलेट ट्रेन — चारों परिवहन माध्यमों का मल्टीमॉडल इंटीग्रेशन एक ही परिसर में किया जा रहा है। स्टेशन का डिज़ाइन शहर की पतंग संस्कृति से प्रेरित है।
बुलेट ट्रेन के किन-किन खंडों पर काम होगा और किस क्रम में?
वैष्णव ने बताया कि पहले सूरत-बिलिमोरा, फिर वापी-सूरत, फिर वापी-अहमदाबाद, फिर अहमदाबाद-ठाणे और अंत में अहमदाबाद-मुंबई खंड पूरा किया जाएगा। यह क्रमबद्ध संचालन 2029 तक पूरा होने का लक्ष्य है।
अहमदाबाद में बुलेट ट्रेन ट्रैक इतनी ऊँचाई पर क्यों बनाया गया है?
रेल मंत्री के अनुसार अहमदाबाद शहर में मौजूदा रेलवे ट्रैक, फ्लाईओवर और शहरी बुनियादी ढाँचे को पार करने की जटिलता के कारण बुलेट ट्रेन का ट्रैक लगभग 100 फीट की ऊँचाई पर बनाया गया है। कई स्थानों पर डबल क्रॉसिंग की तकनीकी ज़रूरत भी इसका कारण है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 6 महीने पहले
  2. 7 महीने पहले
  3. 7 महीने पहले
  4. 8 महीने पहले
  5. 9 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले