बुलेट ट्रेन 15 अगस्त 2027 से: वैष्णव का ऐलान, सूरत-बिलिमोरा बनेगा पहला हाई-स्पीड रूट
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 12 जुलाई 2026 को घोषणा की कि भारत की पहली बुलेट ट्रेन सेवा 15 अगस्त 2027 से चरणबद्ध रूप में शुरू होगी। मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (MAHSR) कॉरिडोर का सूरत-बिलिमोरा सेक्शन देश का पहला परिचालन हाई-स्पीड रेल खंड बनेगा। यह घोषणा भारत के महत्वाकांक्षी हाई-स्पीड रेल कार्यक्रम में एक निर्णायक मोड़ मानी जा रही है।
चरणबद्ध परिचालन की योजना
508 किलोमीटर लंबे मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर को एक साथ नहीं, बल्कि चरणों में खोला जाएगा। सूरत-बिलिमोरा सेक्शन के उद्घाटन के बाद क्रमशः वापी-सूरत, वापी-अहमदाबाद, अहमदाबाद-ठाणे और अंत में अहमदाबाद-मुंबई खंड को खोला जाएगा। इस रणनीति का उद्देश्य पूरे कॉरिडोर के निर्माण से पहले ही जनता को सेवा उपलब्ध कराना है।
निर्माण की मौजूदा स्थिति
वैष्णव ने बताया कि इस परियोजना का लगभग 80 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और तय समय-सीमा के भीतर निर्माण पूरा करने के लिए काम तेज़ गति से जारी है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना अपने अगले चरण में प्रवेश कर चुकी है। मुंबई और अहमदाबाद — दो प्रमुख आर्थिक केंद्रों — के बीच यात्रा का समय इस कॉरिडोर के चालू होने के बाद उल्लेखनीय रूप से कम हो जाएगा।
दक्षिण भारत के लिए नए कॉरिडोर का प्रस्ताव
रेल मंत्री ने देश के हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के विस्तार की दीर्घकालिक योजनाओं का भी खुलासा किया। हैदराबाद को केंद्र में रखकर तीन नए बुलेट ट्रेन कॉरिडोर प्रस्तावित किए गए हैं — पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-चेन्नई और हैदराबाद-बेंगलुरु। इसके अलावा हैदराबाद-मुंबई हाई-स्पीड रेल लिंक की भी योजना है, जिससे इन दोनों महानगरों के बीच की दूरी और समय दोनों घटेंगे।
प्रधानमंत्री मोदी का संदर्भ
वैष्णव ने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हैदराबाद को तीन हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन कॉरिडोर दिए हैं, जो शहर की तस्वीर बदल देंगे।" उन्होंने यह भी बताया कि प्रस्तावित नेटवर्क तेलंगाना के बड़े हिस्से को कवर करेगा और राज्य के अनेक जिलों के बीच संपर्क को सुदृढ़ करेगा।
आर्थिक और सामाजिक प्रभाव
MAHSR कॉरिडोर से न केवल यात्री परिवहन में बदलाव आएगा, बल्कि कॉरिडोर के आसपास के क्षेत्रों में आर्थिक विकास को भी गति मिलने की उम्मीद है। आधुनिक जापानी शिंकानसेन तकनीक पर आधारित यह परियोजना भारत में रेल आधुनिकीकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम मानी जा रही है। आने वाले महीनों में परिचालन संबंधी विस्तृत दिशानिर्देश जारी होने की संभावना है।