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यशपाल शर्मा: 1983 विश्व कप के गुमनाम नायक, वनडे में कभी नहीं हुए शून्य पर आउट

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यशपाल शर्मा: 1983 विश्व कप के गुमनाम नायक, वनडे में कभी नहीं हुए शून्य पर आउट

सारांश

1983 विश्व कप के पहले मैच में वेस्टइंडीज के खिलाफ 89 और सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ 61 रन — यशपाल शर्मा वो गुमनाम नायक थे जिनके बिना भारत का पहला विश्व कप खिताब शायद संभव न होता। वनडे में कभी शून्य पर न आउट होने का उनका रिकॉर्ड आज भी अनूठा है।

मुख्य बातें

यशपाल शर्मा ने 1983 विश्व कप के पहले मुकाबले में वेस्टइंडीज के खिलाफ 120 गेंदों में 89 रन बनाए।
सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ 115 गेंदों में 61 रन बनाकर भारत को 6 विकेट से जीत और फाइनल में जगह दिलाई।
पूरे 42 वनडे मैचों के करियर में वे एक बार भी शून्य पर आउट नहीं हुए।
टेस्ट करियर में 37 मैचों में 33 की औसत से 1,606 रन , जिनमें 2 शतक और 9 अर्धशतक शामिल।
संन्यास के बाद दो बार भारतीय मुख्य चयनकर्ता रहे; उनके कार्यकाल में भारत ने 2011 वनडे विश्व कप जीता।
13 जुलाई 2021 को दिल का दौरा पड़ने से निधन हुआ।

भारतीय क्रिकेट के इतिहास में कुछ नाम सुर्खियों से दूर रहते हुए भी अपनी अमिट छाप छोड़ जाते हैं। यशपाल शर्मा ऐसे ही एक बल्लेबाज थे, जिनके बिना 1983 का क्रिकेट विश्व कप शायद भारत की झोली में न आता। पंजाब के लुधियाना में जन्मे इस दाएँ हाथ के बल्लेबाज ने अपने पूरे वनडे करियर में एक बार भी शून्य पर आउट न होने का अनूठा रिकॉर्ड कायम किया।

लुधियाना से लॉर्ड्स तक का सफर

यशपाल शर्मा का क्रिकेट के प्रति झुकाव बचपन से ही गहरा था। घरेलू क्रिकेट में उनकी दमदार बल्लेबाजी ने कई दिग्गजों का ध्यान खींचा। उल्लेखनीय यह है कि मशहूर अभिनेता दिलीप कुमार ने घरेलू क्रिकेट में यशपाल की प्रतिभा से प्रभावित होकर उनकी सिफारिश भारतीय टीम के चयनकर्ताओं से की थी — एक ऐसा किस्सा जो भारतीय क्रिकेट इतिहास में विरले ही मिलता है।

1983 विश्व कप में यशगाथा

1983 क्रिकेट विश्व कप के पहले ही मुकाबले में भारत का सामना तत्कालीन अजेय वेस्टइंडीज से था। भारतीय पारी संकट में थी, तब यशपाल मैदान पर उतरे और 120 गेंदों में 89 रनों की संघर्षपूर्ण किंतु महत्वपूर्ण पारी खेली। उनकी इस पारी की बदौलत भारत ने वेस्टइंडीज को उसी के घर में पहली बार मात दी — एक ऐसी जीत जिसने पूरे टूर्नामेंट की दिशा बदल दी।

इसके बाद सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ यशपाल एक बार फिर भारत के संकटमोचक बने। नंबर चार पर बल्लेबाजी करते हुए उन्होंने 115 गेंदों में 3 चौके और 2 छक्कों की मदद से 61 रन बनाए, जिसके दम पर भारत ने इंग्लैंड को 6 विकेट से हराकर फाइनल में प्रवेश किया। गौरतलब है कि यह वही फाइनल था जिसमें भारत ने वेस्टइंडीज को हराकर पहली बार विश्व कप का खिताब अपने नाम किया।

अंतरराष्ट्रीय करियर के आँकड़े

यशपाल शर्मा ने भारत के लिए 37 टेस्ट मैचों में 33 की औसत से 1,606 रन बनाए, जिनमें 2 शतक और 9 अर्धशतक शामिल हैं। वनडे फॉर्मेट में उन्होंने 42 मैचों में 4 अर्धशतकों की सहायता से 883 रन बनाए। इस पूरे वनडे करियर में वे एक बार भी शून्य पर आउट नहीं हुए — एक ऐसा रिकॉर्ड जो उनकी मानसिक दृढ़ता और तकनीकी कौशल का प्रमाण है।

चयनकर्ता के रूप में योगदान

खेल से संन्यास लेने के बाद यशपाल शर्मा ने दो बार भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य चयनकर्ता का दायित्व निभाया। उनकी देखरेख में ही भारतीय टीम ने 2011 में घरेलू धरती पर वनडे विश्व कप का खिताब जीता — यानी उन्होंने एक खिलाड़ी के रूप में भी और एक चयनकर्ता के रूप में भी विश्व कप विजेता टीम का हिस्सा बनने का दुर्लभ गौरव हासिल किया।

विदाई और विरासत

13 जुलाई 2021 को दिल का दौरा पड़ने से यशपाल शर्मा का निधन हो गया। उनका जाना भारतीय क्रिकेट के लिए एक ऐसे युग के अंत जैसा था, जिसमें खिलाड़ी तमगों से नहीं, मैदान पर अपने योगदान से पहचाने जाते थे। 1983 विश्व कप की स्वर्णिम यादें जब भी ताज़ा होंगी, यशपाल शर्मा का नाम उनमें हमेशा जगमगाता रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

मैदान पर संकट के क्षणों में खड़े होने से पहचानी जाती थी। 1983 विश्व कप पर चर्चा अक्सर कपिल देव की 175 रनों की पारी या फाइनल तक सिमट जाती है — यशपाल के उन दो निर्णायक पारियों को वह श्रेय नहीं मिलता जो मिलना चाहिए। दिलीप कुमार की सिफारिश वाला प्रसंग यह भी बताता है कि उस दौर में प्रतिभा की पहचान के रास्ते कितने अनौपचारिक थे। आज जब डेटा-ड्रिवन क्रिकेट की बात होती है, यशपाल जैसे 'अनसंग हीरो' की विरासत यह याद दिलाती है कि संख्याएँ हमेशा असली योगदान नहीं बताती।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यशपाल शर्मा का 1983 विश्व कप में क्या योगदान था?
यशपाल शर्मा ने 1983 विश्व कप में दो निर्णायक पारियाँ खेलीं — वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले मैच में 120 गेंदों में 89 रन और सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ 115 गेंदों में 61 रन। इन्हीं पारियों की बदौलत भारत फाइनल में पहुँचा और पहली बार विश्व कप जीता।
यशपाल शर्मा का वनडे में शून्य पर आउट न होने का रिकॉर्ड क्या है?
यशपाल शर्मा ने अपने पूरे 42 वनडे मैचों के करियर में एक बार भी शून्य (डक) पर आउट नहीं हुए। यह उनकी तकनीकी मजबूती और मानसिक दृढ़ता का प्रमाण माना जाता है।
यशपाल शर्मा के अंतरराष्ट्रीय करियर के आँकड़े क्या हैं?
यशपाल शर्मा ने 37 टेस्ट मैचों में 33 की औसत से 1,606 रन बनाए, जिनमें 2 शतक और 9 अर्धशतक शामिल हैं। वनडे में उन्होंने 42 मैचों में 4 अर्धशतकों की मदद से 883 रन बनाए।
दिलीप कुमार का यशपाल शर्मा के करियर में क्या रोल था?
मशहूर अभिनेता दिलीप कुमार ने घरेलू क्रिकेट में यशपाल शर्मा की बल्लेबाजी से प्रभावित होकर उनकी सिफारिश भारतीय टीम के चयनकर्ताओं से की थी। यह भारतीय क्रिकेट इतिहास का एक दुर्लभ किस्सा है।
यशपाल शर्मा का निधन कब और कैसे हुआ?
यशपाल शर्मा का निधन 13 जुलाई 2021 को दिल का दौरा पड़ने से हुआ। संन्यास के बाद वे दो बार भारतीय मुख्य चयनकर्ता भी रहे और उनके कार्यकाल में भारत ने 2011 वनडे विश्व कप जीता था।
राष्ट्र प्रेस
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