17 जुलाई 2026
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भारत की पहली हाइड्रोजन पैसेंजर ट्रेन: PM मोदी ने जींद से दिखाई हरी झंडी, जींद-सोनीपत रूट पर शुरू

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भारत की पहली हाइड्रोजन पैसेंजर ट्रेन: PM मोदी ने जींद से दिखाई हरी झंडी, जींद-सोनीपत रूट पर शुरू

सारांश

भारत ने रेलवे के इतिहास में नया मुकाम हासिल किया — PM मोदी ने हरियाणा के जींद से देश की पहली हाइड्रोजन पैसेंजर ट्रेन रवाना की, जो जींद-सोनीपत रूट पर शून्य कार्बन उत्सर्जन के साथ दौड़ेगी। यह 2070 के नेट-ज़ीरो लक्ष्य की दिशा में रेलवे का पहला ठोस कदम है।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से देश की पहली हाइड्रोजन पैसेंजर ट्रेन को झंडी दिखाई।
ट्रेन जींद-सोनीपत रेलखंड पर नियमित सेवा में संचालित होगी; इसमें कार्बन उत्सर्जन शून्य रहेगा।
भिवानी में इसी अवसर पर दो मेडिकल कॉलेजों की आधारशिला भी रखी गई।
BJP नेताओं ने इसे भारत के हरित और आधुनिक भविष्य की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया।
आलोचकों ने हाइड्रोजन उत्पादन लागत और भंडारण चुनौतियों पर ध्यान दिलाया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18 जुलाई 2025 को हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से देश की पहली हाइड्रोजन ईंधन चालित पैसेंजर ट्रेन को झंडी दिखाकर रवाना किया। यह ट्रेन अब जींद-सोनीपत रेलखंड पर नियमित सेवा में संचालित होगी और भारतीय रेलवे के इतिहास में शून्य-कार्बन उत्सर्जन वाले यात्री परिवहन का पहला अध्याय लिखेगी।

उद्घाटन समारोह और ट्रेन की विशेषताएँ

उद्घाटन के अवसर पर जींद रेलवे स्टेशन को फूलों और रंग-बिरंगे गुब्बारों से सजाया गया था। हाइड्रोजन ईंधन से संचालित यह ट्रेन पारंपरिक डीजल या बिजली के बजाय हाइड्रोजन सेल का उपयोग करती है, जिससे कार्बन उत्सर्जन शून्य रहता है। भारतीय रेलवे इसे स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन की दिशा में एक निर्णायक कदम मान रही है।

गौरतलब है कि यह पहल ऐसे समय में आई है जब भारत ने 2070 तक नेट-ज़ीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य घोषित किया हुआ है और रेलवे क्षेत्र उसमें बड़ी भूमिका निभाने के लिए तैयार हो रहा है।

नेताओं की प्रतिक्रिया

झारखंड भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने कहा, 'हाइड्रोजन ट्रेन कभी सिर्फ कल्पना और विज्ञान कथाओं का हिस्सा हुआ करती थी, लेकिन अब यह हमारे देश में हकीकत बन गई है। यह पर्यावरण के लिए बेहद अच्छी पहल है क्योंकि इसमें जरा भी कार्बन उत्सर्जन नहीं होगा।'

जींद में BJP नेता किरण चौधरी ने कहा कि हाइड्रोजन ट्रेन की शुरुआत यह संदेश देती है कि भविष्य ग्रीन शहरों और ग्रीन ट्रेनों का होना चाहिए। उन्होंने कहा, 'युद्ध जैसी परिस्थितियों में पेट्रोल और डीजल की कमी देखने को मिलती है। ऐसे समय में पर्यावरण की रक्षा भी जरूरी है। अब हमें पुरानी तकनीकों से आगे बढ़ना होगा।'

भिवानी से BJP सांसद धर्मबीर सिंह ने कहा, 'हमें गर्व है कि देश की पहली हाइड्रोजन पैसेंजर ट्रेन पहली बार हरियाणा से शुरू हो रही है।' उन्होंने यह भी बताया कि इसी अवसर पर भिवानी में दो मेडिकल कॉलेजों की आधारशिला भी रखी गई।

वहीं हरियाणा के भिवानी में पूर्व मंत्री जेपी दलाल ने इसे भिवानी के लिए भी खुशी का अवसर बताया और कहा कि भिवानी मेडिकल कॉलेज के उद्घाटन से आम लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ मिलेंगी।

पर्यावरणीय और ऊर्जा महत्व

हाइड्रोजन ट्रेन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसकी चिमनी से केवल जलवाष्प (भाप) निकलती है — कोई हानिकारक गैस नहीं। यह तकनीक जर्मनी और चीन जैसे देशों में पहले से परीक्षण के दौर में है, लेकिन नियमित यात्री सेवा में इसे लागू करने वाले देशों की सूची में भारत अब शामिल हो गया है।

आलोचकों का कहना है कि हाइड्रोजन उत्पादन की लागत और इसके भंडारण की चुनौतियाँ अभी भी बड़े पैमाने पर विस्तार के सामने बाधा बन सकती हैं। हालाँकि, सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत इन चुनौतियों को चरणबद्ध तरीके से हल किया जाएगा।

आगे की राह

भारतीय रेलवे की योजना है कि जींद-सोनीपत रूट पर मिले अनुभव के आधार पर इस तकनीक को अन्य रेलखंडों पर भी विस्तारित किया जाए। यह पहल न केवल रेलवे के कार्बन फुटप्रिंट को कम करने में मदद करेगी, बल्कि स्वदेशी हाइड्रोजन प्रौद्योगिकी के विकास को भी गति देगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह होगी कि जींद-सोनीपत जैसे एकल रूट से यह तकनीक कब और कैसे व्यापक नेटवर्क तक पहुँचती है। हाइड्रोजन उत्पादन अभी भी मुख्यतः जीवाश्म ईंधन पर निर्भर है — जब तक 'ग्रीन हाइड्रोजन' की हिस्सेदारी नहीं बढ़ती, 'शून्य उत्सर्जन' का दावा पूरी तरह सटीक नहीं होगा। राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन की घोषणाएँ हो चुकी हैं, पर क्रियान्वयन की गति धीमी रही है। बिना पारदर्शी लागत-विश्लेषण और विस्तार की समयसीमा के, यह उपलब्धि एक प्रेरक शुरुआत तो है — पर 'ग्रीन रेलवे' का पूरा वादा अभी बाकी है।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत की पहली हाइड्रोजन पैसेंजर ट्रेन क्या है और यह कहाँ चलेगी?
यह भारतीय रेलवे की पहली हाइड्रोजन ईंधन चालित यात्री ट्रेन है, जिसे PM मोदी ने हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से रवाना किया। यह ट्रेन जींद-सोनीपत रेलखंड पर नियमित सेवा में चलेगी और इसमें कार्बन उत्सर्जन शून्य रहेगा।
हाइड्रोजन ट्रेन पर्यावरण के लिए क्यों फायदेमंद है?
हाइड्रोजन ईंधन सेल से चलने वाली ट्रेन की चिमनी से केवल जलवाष्प निकलती है, कोई हानिकारक गैस नहीं। यह डीजल ट्रेनों की तुलना में कार्बन उत्सर्जन को पूरी तरह समाप्त करती है और भारत के 2070 नेट-ज़ीरो लक्ष्य में योगदान देती है।
क्या हाइड्रोजन ट्रेन तकनीक को भारत में और रूटों पर भी लागू किया जाएगा?
भारतीय रेलवे की योजना है कि जींद-सोनीपत रूट के अनुभव के आधार पर इस तकनीक को अन्य रेलखंडों पर विस्तारित किया जाए। राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत इसके लिए चरणबद्ध रोडमैप तैयार किया जा रहा है।
हाइड्रोजन ट्रेन के साथ जींद में और क्या उद्घाटन हुए?
इसी अवसर पर हरियाणा के भिवानी में दो मेडिकल कॉलेजों की आधारशिला रखी गई। BJP सांसद धर्मबीर सिंह ने इसे हरियाणा के लिए दोहरी उपलब्धि बताया।
हाइड्रोजन ट्रेन को लेकर आलोचकों की क्या चिंताएँ हैं?
आलोचकों का कहना है कि हाइड्रोजन उत्पादन की ऊँची लागत और भंडारण की तकनीकी चुनौतियाँ बड़े पैमाने पर विस्तार में बाधा बन सकती हैं। साथ ही, जब तक हाइड्रोजन उत्पादन स्वयं नवीकरणीय ऊर्जा से नहीं होता, तब तक 'पूरी तरह हरित' होने का दावा सीमित रहेगा।
राष्ट्र प्रेस
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