भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन जींद से रवाना, लोको पायलट चंद्रकांत ने चेन्नई में ली 4 दिन की खास ट्रेनिंग
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 जुलाई 2026 को हरियाणा के जींद से देश की पहली हाइड्रोजन से चलने वाली पैसेंजर ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस ऐतिहासिक अवसर पर ट्रेन के लोको पायलट चंद्रकांत कुमार ने ट्रेन की विशेषताओं, सुरक्षा प्रणाली और अपनी विशेष प्रशिक्षण प्रक्रिया की जानकारी साझा की। यह ट्रेन जींद-सोनीपत रेलखंड पर नियमित रूप से संचालित होगी।
लोको पायलट की ट्रेनिंग और अनुभव
लोको पायलट चंद्रकांत कुमार ने बताया कि इस ट्रेन को चलाने की जिम्मेदारी सौंपे जाने से पहले उन्हें और उनके सहयोगियों को चेन्नई में चार दिन की विशेष ट्रेनिंग दी गई। उन्होंने कहा, 'यह ट्रेन बेहद शानदार है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह हाइड्रोजन से चलती है और बिल्कुल भी प्रदूषण नहीं फैलाती। इसमें कार्बन उत्सर्जन नहीं होता। यही बात इसे डीजल और बिजली से चलने वाली अन्य ट्रेनों से अलग बनाती है।'
उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि यह ट्रेन हाइड्रोजन पर चलेगी, जिसे पानी से अलग किया जाता है। यह तकनीक परंपरागत ईंधन स्रोतों पर निर्भरता को समाप्त करती है और शून्य-उत्सर्जन परिवहन की दिशा में एक ठोस कदम है।
उच्च-स्तरीय सुरक्षा प्रणाली
सुरक्षा व्यवस्था पर चंद्रकांत कुमार ने कहा, 'इसकी सुरक्षा रेटिंग बहुत उच्च स्तर की है। धुआं, गैस रिसाव या आग जैसी किसी भी स्थिति में यह अलग तरीके से काम करती है। लोको पायलट के लिए ट्रेन चलाने की पूरी व्यवस्था बेहद आरामदायक है। इस ट्रेन में सभी सुरक्षा सिस्टम ऑटोमैटिक हैं।'
गौरतलब है कि हाइड्रोजन आधारित ट्रेनों में सुरक्षा मानक पारंपरिक ट्रेनों की तुलना में अधिक जटिल होते हैं, क्योंकि हाइड्रोजन एक अत्यधिक ज्वलनशील गैस है। ऐसे में स्वचालित सुरक्षा प्रणालियों का होना इस परियोजना की तकनीकी परिपक्वता को दर्शाता है।
गति और रेलखंड की विशेषताएँ
चंद्रकांत कुमार ने बताया कि इस ट्रेन की अधिकतम गति 110 किलोमीटर प्रति घंटा है। हालाँकि, जींद-सोनीपत रेलखंड पर निर्धारित गति सीमा 75 किलोमीटर प्रति घंटा होने के कारण फिलहाल यह ट्रेन इसी रफ्तार से संचालित होगी। यह रेलखंड हरियाणा के दो प्रमुख शहरों को जोड़ता है और इस पर यात्री यातायात उल्लेखनीय है।
स्वदेशी बुनियादी ढाँचा और लाइसेंस
इस परियोजना के अंतर्गत जींद में स्वदेशी हाइड्रोजन भंडारण और रीफ्यूलिंग सुविधा विकसित की गई है। पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) ने संपीड़ित हाइड्रोजन गैस के भंडारण और वितरण के लिए आवश्यक लाइसेंस भी जारी कर दिया है। यह लाइसेंस इस परियोजना की सुरक्षा और नियामकीय अनुपालन की पुष्टि करता है।
वैश्विक संदर्भ और भारत की स्थिति
इस ट्रेन के संचालन के साथ भारत जर्मनी, जापान, चीन और अमेरिका जैसे उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो गया है, जो स्वच्छ रेल परिवहन के लिए हाइड्रोजन तकनीक पर काम कर रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपने नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन के राष्ट्रीय लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ा रहा है। भारतीय रेलवे की यह पहल नवाचार, ऊर्जा दक्षता और पर्यावरण संरक्षण के व्यापक एजेंडे का हिस्सा मानी जा रही है।