एमएसएमई सेक्टर का जीडीपी में 31.1% योगदान, 38.9 करोड़ लोगों को रोजगार; विश्व एमएसएमई दिवस से पहले सरकार ने जारी किए आँकड़े
सारांश
मुख्य बातें
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) सेक्टर भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनकर उभरा है — आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, जनवरी 2026 तक इस सेक्टर का देश की जीडीपी में 31.1%, विनिर्माण उत्पादन में 35.4% और कुल निर्यात में 48.58% योगदान दर्ज किया गया है। 26 जून 2026 को विश्व एमएसएमई दिवस की पूर्व संध्या पर जारी एक सरकारी फैक्ट शीट में ये आँकड़े सामने आए, जो इस सेक्टर की बढ़ती आर्थिक महत्ता को रेखांकित करते हैं।
रोजगार और पंजीकरण में ऐतिहासिक उछाल
एमएसएमई सेक्टर अब 38.9 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार देता है, जिससे यह कृषि के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा रोजगार प्रदाता बन गया है। जून 2026 तक उद्यम पंजीकरण पोर्टल और उद्यम असिस्ट प्लेटफॉर्म पर पंजीकृत इकाइयों की संख्या 8.7 करोड़ से अधिक हो चुकी है। इस पंजीकरण अभियान से करोड़ों सूक्ष्म और लघु उद्यमों को संस्थागत ऋण, सरकारी योजनाओं और नए बाजारों तक पहुँच मिली है।
ऋण सुविधा और गारंटी कवरेज में विस्तार
क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज (सीजीटीएमएसई) ने 1 जनवरी से 30 नवंबर 2025 के बीच 29.03 लाख गारंटियाँ मंजूर कीं, जिनकी कुल राशि ₹3.77 लाख करोड़ रही। सरकार ने एमएसएमई को बिना गिरवी अधिक ऋण उपलब्ध कराने के लिए गारंटी कवरेज सीमा ₹5 करोड़ से बढ़ाकर ₹10 करोड़ कर दी है — यह कदम छोटे उद्यमियों के लिए पूँजी की पहुँच को सरल बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
शिकायत निवारण और विवाद समाधान
एमएसएमई समाधान पोर्टल पर जून 2026 तक 2,56,892 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें ₹55,244.29 करोड़ के दावे शामिल थे। इनमें से 58,148 मामलों का निपटारा एमएसई सुविधा परिषदों द्वारा किया गया। चैंपियंस पोर्टल पर वित्त वर्ष 2025-26 में 39,494 शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें से 39,387 का समाधान हुआ — यानी 99.72% निस्तारण दर। इसके अतिरिक्त, सरकार ने ऑनलाइन डिस्प्यूट रिजॉल्यूशन (ओडीआर) पोर्टल भी शुरू किया है, जो तकनीक-आधारित तरीके से भुगतान विवादों का त्वरित समाधान देता है।
ग्रामीण उद्योग और खादी की बढ़ती ताकत
वित्त वर्ष 2025-26 में खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों की बिक्री ₹1.27 लाख करोड़ से अधिक पहुँच गई। यह आँकड़ा ग्रामीण उद्योगों की बढ़ती माँग और रोजगार सृजन में उनकी निर्णायक भूमिका को दर्शाता है। सरकार के अनुसार, अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में पहली पीढ़ी के उद्यमी, महिला उद्यमी और युवा इस सेक्टर में नए अवसर पा रहे हैं।
डिजिटल वित्त और सिडबी की भूमिका
डिजिटल क्रेडिट असेसमेंट मॉडल और सिडबी (SIDBI) को बढ़ाई गई इक्विटी सहायता जैसी पहलें एमएसएमई को औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जोड़ने में सहायक बन रही हैं। गौरतलब है कि वित्त वर्ष 2025-26 को सरकार ने एमएसएमई सेक्टर के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव बताया है, जिसमें औपचारिक पंजीकरण से लेकर बाजार विस्तार तक कई मोर्चों पर उपलब्धियाँ दर्ज की गई हैं। आने वाले समय में इस सेक्टर की वृद्धि भारत के निर्यात और रोजगार लक्ष्यों की कसौटी होगी।