स्वयं सहायता समूह की महिलाएं अचार और चटनी बनाकर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं
सारांश
Key Takeaways
- स्वयं सहायता समूह महिलाओं को स्वरोजगार के लिए अवसर प्रदान करते हैं।
- महिलाएं अचार, चटनी और अन्य उत्पाद बनाकर आत्मनिर्भर हो रही हैं।
- उत्पादों की बढ़ती मांग से आर्थिक स्थिति में सुधार हो रहा है।
- केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ उठाकर महिलाएं सशक्त हो रही हैं।
- समूह में 50 से 60 महिलाएं सक्रिय रूप से भाग ले रही हैं।
नाहन, 11 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। हौसले से सब कुछ संभव है। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं ने यह साबित कर दिया है। पहले परिवार पर निर्भर रहने वाली महिलाएं अब भारत सरकार की योजनाओं का लाभ उठाकर आत्मनिर्भर बन रही हैं।
स्वयं सहायता समूह की महिलाएं अपने द्वारा निर्मित विभिन्न उत्पादों को प्रदर्शित कर रही हैं। उत्पादों की बढ़ती मांग और बिक्री ने महिलाओं की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है। मोदी सरकार की योजनाओं का लाभ लेकर महिलाएं अब स्वावलंबी बन चुकी हैं।
आदर्श स्वयं सहायता समूह की सदस्य बबीता कौशल ने बताया कि महिलाएं स्वावलंबन की ओर बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि समूह द्वारा तैयार किए गए उत्पाद जैसे जेम, अचार, चटनी और कपड़े के बैग आदि की बाजार में डिमांड काफी है।
उन्होंने बताया कि समूह में हर चीज का प्रशिक्षण दिया जाता है जिससे महिलाएं काम कर रही हैं और आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हैं। रोजगार के अवसर मिलने से महिलाएं सक्रिय रूप से भाग ले रही हैं। उनके समूह में 50 से 60 महिलाएं शामिल हैं, जिनमें से एक समूह खेती कर रहा है जबकि दूसरा समूह अचार बनाने का काम कर रहा है।
ग्राम पंचायत फूलपुर की निवासी पार्वती देवी ने बताया कि वह ओम नमः शिवाय स्वयं सहायता समूह के साथ काम कर रही हैं। महिलाएं यहां विभिन्न खाद्य उत्पादों के साथ-साथ अन्य सामान बना रही हैं, जिन्हें स्टॉल पर प्रदर्शित किया जाता है। सभी उत्पाद ऑर्गेनिक हैं और लोगों में बहुत पसंद किए जाते हैं। केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ उठाकर महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं।