शारदा यूनिवर्सिटी दो दशकों से राष्ट्र निर्माण में युवाओं को कर रही तैयार: चिराग पासवान
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान गुरुवार, 3 अगस्त को ग्रेटर नोएडा स्थित शारदा यूनिवर्सिटी के ओरिएंटेशन कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए और वहाँ पत्रकारों से बातचीत में विश्वविद्यालय की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह संस्थान पिछले दो दशकों से छात्रों को तराशते हुए उन्हें राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया से जोड़ रहा है।
युवाओं से संवाद पर ज़ोर
पासवान ने कहा कि उनका हमेशा से यह मानना रहा है कि नेताओं और नीति-निर्माताओं को अधिक से अधिक विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में जाकर छात्रों से सीधा संवाद स्थापित करना चाहिए। उन्होंने कहा, 'युवाओं के विचारों को जानने की कोशिश करें और उसका इस्तेमाल राष्ट्र निर्माण में करें।' उनके अनुसार यह निरंतरता उनके कार्यशैली का अहम हिस्सा है।
मंत्री ने यह भी कहा कि आज का युवा वर्ग बड़े उत्साह के साथ अपने विचार सामने रख रहा है, जो एक सकारात्मक संकेत है। उन्होंने शारदा यूनिवर्सिटी के परिसर में आकर छात्रों से मिलने के अवसर को व्यक्तिगत रूप से संतोषजनक बताया।
लोकतंत्र में विचार-विविधता की अहमियत
पासवान ने लोकतांत्रिक व्यवस्था में वैचारिक विविधता को मज़बूती का आधार बताया। उन्होंने कहा कि जितने अधिक प्रकार के विचारों को जगह मिलेगी, लोकतंत्र उतना ही सशक्त होगा। उनके अनुसार, हर विचारधारा का स्वागत होना चाहिए और इस पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए — क्योंकि विचारों की बहुलता नागरिकों को अपने अनुकूल राजनीतिक दल से जुड़ने का अवसर देती है।
राम मंदिर के नए सीईओ पर प्रतिक्रिया
इस अवसर पर पासवान ने राम मंदिर को मिले नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने स्वीकार किया कि चढ़ावा चोरी के मामले ने राम भक्तों को गहरी ठेस पहुँचाई है। उनके अनुसार नए सीईओ की नियुक्ति एक सही कदम है और वे अपने अनुभव के बल पर मंदिर प्रबंधन की व्यवस्था को बेहतर बना सकते हैं।
आगे की राह
पासवान की यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब केंद्र सरकार युवाओं को नीति-निर्माण प्रक्रिया से जोड़ने पर बल दे रही है। गौरतलब है कि शारदा यूनिवर्सिटी उत्तर भारत के प्रमुख निजी विश्वविद्यालयों में से एक है और इसके ओरिएंटेशन कार्यक्रम में हर वर्ष बड़ी संख्या में नए छात्र शामिल होते हैं। केंद्रीय मंत्री की उपस्थिति ने इस आयोजन को एक व्यापक राष्ट्रीय संदर्भ दिया।