बारुईपुर नाबालिग रेप-हत्या: SIT ने 60 दिनों में 702 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर में एक नाबालिग लड़की के साथ हुए रेप और हत्या के मामले में 3 सितंबर 2026 को बारुईपुर जिला अदालत में 702 पन्नों की चार्जशीट दाखिल कर दी। यह चार्जशीट घटना के ठीक 60 दिन बाद दाखिल की गई, जो इस संवेदनशील मामले में जांच की गति को रेखांकित करती है।
मुख्य घटनाक्रम
पीड़िता 4 जुलाई की दोपहर से लापता थी। अगले दिन 5 जुलाई की सुबह उसका शव बारुईपुर पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आने वाले सूर्यपुर इलाके के एक तालाब से बरामद हुआ। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, पीड़िता को बोरी में लपेटकर तालाब में फेंके जाने से पहले वह जीवित थी। ऑटोप्सी में मृत्यु के दो कारण सामने आए — अत्यधिक रक्तस्राव और पानी में दम घुटना। रिपोर्ट में उसके शरीर पर गंभीर चोटों का भी उल्लेख है।
आरोपी और गिरफ्तारियाँ
इस मामले में कुल चार लोगों को गिरफ्तार किया गया। इनमें से एक आरोपी प्रभास मंडल एक पुलिस एनकाउंटर में मारा गया — पुलिस के अनुसार, वह एक अधिकारी से हथियार छीनकर भागने की कोशिश कर रहा था। शेष तीन आरोपी अभी न्यायिक हिरासत में हैं।
चार्जशीट में लगाए गए आरोप
राज्य पुलिस सूत्रों के अनुसार, 702 पन्नों की इस चार्जशीट में आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की कई धाराओं के तहत आरोप तय किए गए हैं। इनमें शामिल हैं — धारा 137(2) (अपहरण), धारा 140(3) (गुप्त रूप से कैद में रखने के इरादे से अपहरण), धारा 65(1) (16 वर्ष से कम आयु की नाबालिग से रेप), धारा 70(2) (18 वर्ष से कम आयु की महिला/लड़की के साथ गैंगरेप), धारा 103(1) (हत्या), धारा 238 (साक्ष्य मिटाना) और धारा 61 (आपराधिक षड्यंत्र)।
इसके अतिरिक्त, आरोपियों पर पॉक्सो अधिनियम, 2012 की धारा 6 (बच्चे के साथ गंभीर यौन उत्पीड़न) के तहत भी आरोप लगाए गए हैं।
सरकार की प्रतिक्रिया
इस घटना ने पूरे पश्चिम बंगाल में व्यापक आक्रोश पैदा किया था। राज्य सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक SIT गठित की और मामले की जांच के आदेश दिए। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में महिला सुरक्षा को लेकर पहले से ही राजनीतिक और सामाजिक दबाव बना हुआ था।
आगे की कार्यवाही
चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब मामला अदालत में सुनवाई के चरण में प्रवेश करेगा। न्यायिक प्रक्रिया की गति और पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की समयसीमा पर सबकी नज़रें टिकी हैं।