बारुईपुर रेप-हत्या: मुख्य आरोपी आनंद सरकार गिरफ्तार, CM अधिकारी ने मौत की सजा का दिलाया भरोसा
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर में 12 वर्षीय नाबालिग लड़की के कथित बलात्कार और हत्या मामले में राज्य पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने सोमवार, 6 जुलाई को मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने आश्वासन दिया है कि सरकार आरोपियों को जल्द से जल्द दोषी ठहराकर मृत्युदंड दिलाने की पूरी कोशिश करेगी।
मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी
बारुईपुर पुलिस जिले के एक अधिकारी के अनुसार, SIT ने सोमवार दोपहर मुख्य आरोपी आनंद सरकार को बारुईपुर बाज़ार इलाके से हिरासत में लिया। सरकार पर शुरू से ही इस मामले में प्रमुख संदिग्ध होने का संदेह था। इससे पहले दो अन्य आरोपी — प्रवास मंडल और दिवाकर सरदार — को गिरफ्तार किया जा चुका था।
तीनों आरोपियों को दक्षिण 24 परगना की जिला अदालत में पेश किया जाएगा, जहाँ सरकारी वकील सभी के लिए पुलिस हिरासत की माँग करेंगे।
मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने इस घटना को 'बेहद घिनौनी' बताते हुए कहा, 'सरकार परिवार की इच्छा के अनुसार काम करने की व्यवस्था कर रही है। कोशिश होगी कि आरोपियों को जल्द दोषी ठहराकर मौत की सजा दिलाई जाए।' उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य प्रशासन इस मामले में कड़ी से कड़ी सज़ा सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव प्रयास करेगा।
मॉब लिंचिंग और सांप्रदायिक तनाव
इस मामले के विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान एक व्यक्ति की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या किए जाने की भी खबर है। मुख्यमंत्री अधिकारी ने कहा कि इस मॉब लिंचिंग के पीछे सांप्रदायिक पहलू था, हालाँकि उन्होंने फिलहाल अधिक विवरण देने से इनकार किया। उन्होंने रविवार को हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान रेलवे ट्रैक को पहुँचाए गए नुकसान की तुलना 2019 के नागरिकता संशोधन कानून (CAA) विरोध और हाल के वक्फ संशोधन विधेयक विरोध से की।
रविवार के प्रदर्शन में केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) के दो जवान घायल हो गए और पुलिस की एक गाड़ी को आग के हवाले कर दिया गया।
घटना का विवरण और निषेधाज्ञा
रविवार सुबह एक तालाब से 12 वर्षीय लड़की का शव बरामद किया गया। पीड़िता के परिजनों का आरोप है कि उसके साथ बलात्कार कर हत्या की गई। इलाके में नए सिरे से तनाव की आशंका को देखते हुए बारुईपुर पुलिस जिले ने अपने अधिकार क्षेत्र के तीन पुलिस थानों के क्षेत्रों में 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023' की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में महिला सुरक्षा को लेकर पहले से ही व्यापक बहस जारी है। गौरतलब है कि 2024 में कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज की घटना के बाद राज्य में महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर उठा था। मामले की आगे की जाँच SIT द्वारा जारी है और न्यायिक प्रक्रिया में तेज़ी लाने की उम्मीद जताई जा रही है।