बारुईपुर हिंसा: नाबालिग से दुष्कर्म-हत्या के बाद 22 और गिरफ्तार, कुल 42 पकड़े गए
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर में एक 12 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ कथित दुष्कर्म और हत्या के बाद भड़की हिंसा के मामले में 9 जुलाई को 22 और संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है, जिससे अब तक गिरफ्तार लोगों की कुल संख्या 42 हो गई है। पुलिस के अनुसार, पिछले 24 घंटों में की गई इन गिरफ्तारियों में लिंचिंग, पुलिस पर हमले और सार्वजनिक संपत्ति में तोड़फोड़ के आरोपी शामिल हैं।
मुख्य घटनाक्रम
रविवार की सुबह बारुईपुर के सूर्यपुर इलाके में एक तालाब से 12 वर्षीय नाबालिग का शव बरामद हुआ था। इस घटना के बाद इलाके में भारी तनाव फैल गया और स्थिति हिंसक हो गई। गुस्साई भीड़ ने लड़की की मौत में संलिप्तता के संदेह में 26 वर्षीय इंद्रजीत तांती की पीट-पीटकर हत्या कर दी।
इसके बाद भीड़ ने पुलिस वाहनों और रेलवे ट्रैक सहित सार्वजनिक संपत्ति में व्यापक तोड़फोड़ की। इस हिंसा में कई पुलिसकर्मी भी गंभीर रूप से घायल हो गए।
मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया
मामले की पुलिस जांच के प्रारंभिक निष्कर्षों के आधार पर मुख्यमंत्री ने इंद्रजीत तांती को निर्दोष बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस प्रकार नाबालिग के विरुद्ध अपराध में शामिल लोगों को नहीं बख्शा जाएगा, उसी प्रकार हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति में तोड़फोड़ करने वालों की भी पहचान कर उन्हें कानून के कटघरे में लाया जाएगा।
गिरफ्तारियाँ और एनकाउंटर
मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए हिंसा में शामिल संदिग्धों की पहचान शुरू की। गुरुवार सुबह तक कुल 42 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इससे पहले बुधवार को पुलिस ने एक एनकाउंटर में आरोपी प्रवास मंडल को मार गिराया था।
गिरफ्तार संदिग्धों पर लिंचिंग, पुलिसकर्मियों पर हमला, पुलिस वाहनों में तोड़फोड़ और रेलवे संपत्ति को नुकसान पहुँचाने के आरोप हैं।
आम जनता और इलाके पर असर
बारुईपुर और सूर्यपुर क्षेत्र में हिंसा के बाद भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। रेलवे ट्रैक पर तोड़फोड़ से रेल यातायात भी प्रभावित हुआ। अधिकारियों के अनुसार, स्थिति अब नियंत्रण में है, लेकिन इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी बनाए रखी गई है।
क्या होगा आगे
पुलिस ने संकेत दिया है कि जांच अभी जारी है और अधिक गिरफ्तारियाँ हो सकती हैं। नाबालिग के साथ कथित दुष्कर्म और हत्या के मूल मामले की जांच भी समानांतर रूप से चल रही है। यह मामला पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था और भीड़ हिंसा की बढ़ती घटनाओं पर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े करता है।