बिहार: नालंदा विश्वविद्यालय और साउथ एशियन यूनिवर्सिटी के बीच हुआ शैक्षणिक सहयोग
सारांश
Key Takeaways
- समझौता ज्ञापन पर नालंदा विश्वविद्यालय और साउथ एशियन यूनिवर्सिटी के बीच हस्ताक्षर हुए।
- इससे शैक्षणिक और शोध संबंधों को नया बल मिलेगा।
- विद्यार्थियों के लिए विकास के अवसर खुलेंगे।
- अर्थशास्त्र महोत्सव का समापन हुआ, जिसमें AI की भूमिका पर चर्चा हुई।
- यह समझौता दोनों संस्थानों के बीच साझा विकास का द्वार खोलेगा।
राजगीर, 6 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। बिहार स्थित नालंदा विश्वविद्यालय और साउथ एशियन यूनिवर्सिटी के बीच सोमवार को शैक्षणिक एवं शोध कार्यक्रमों के विकास के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते पर साउथ एशियन यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष प्रो. केके अग्रवाल और नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सचिन चतुर्वेदी ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि, विषय विशेषज्ञ, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी और छात्र उपस्थित रहे।
प्रो. केके अग्रवाल ने कहा कि यह साझेदारी दोनों विश्वविद्यालयों के बीच शैक्षणिक और शोध संबंधों को नई मजबूती प्रदान करेगी, जिससे विद्यार्थियों के लिए विकास के अनेक अवसर खुलेंगे।
प्रो. सचिन चतुर्वेदी ने इस सहयोग को एक नई और प्रभावशाली शुरुआत बताते हुए कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य दोनों संस्थानों की उत्कृष्ट शैक्षणिक परंपराओं का लाभ विद्यार्थियों तक पहुंचाना है।
इस समझौते से दोनों संस्थानों के बीच साझा विकास के कई द्वार खुलेंगे। इसमें संयुक्त शोध निर्देशन, शिक्षण कार्यक्रम, पोस्ट-डॉक्टोरल अवसर, संगोष्ठी, सम्मेलन और शोध पत्रों का प्रकाशन, संकाय, शोधार्थियों और छात्रों का आदान-प्रदान तथा शैक्षणिक संसाधनों और शोध सामग्री का साझा उपयोग शामिल है।
गौरतलब है कि नालंदा विश्वविद्यालय और साउथ एशियन यूनिवर्सिटी, दोनों ही भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के अधीन संचालित प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय संस्थान हैं, जो अपनी वैश्विक पहचान के लिए प्रसिद्ध हैं। इसी बीच, नालंदा विश्वविद्यालय में दो दिवसीय वार्षिक अर्थशास्त्र महोत्सव 'अर्थ-नालंदा 2026' का समापन हो गया।
इस महोत्सव का उद्घाटन संस्करण 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बदलता आर्थिक परिदृश्य' विषय पर केंद्रित रहा, जिसमें मुख्य व्याख्यानों, वाद-विवाद प्रतियोगिताओं और विभिन्न स्पर्धाओं के माध्यम से वैश्विक आर्थिक प्रणालियों में एआई की परिवर्तनकारी भूमिका पर चर्चा की गई।
इस आयोजन में कई प्रतिष्ठित वक्ताओं की उपस्थिति रही, जिनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी, विश्व बैंक के सलाहकार डॉ. दीपक मिश्रा, साउथ एशियन यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष प्रो. केके अग्रवाल, नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सचिन चतुर्वेदी और ह्यूमंटिक्स एआई के संस्थापक सिद्धार्थ शंकर शामिल रहे।