राजस्थान: महिला सशक्तीकरण के लिए राज सखी स्टोर और ग्रामीण महिला बीपीओ का नया आयाम
सारांश
मुख्य बातें
जयपुर, 6 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। राजस्थान सरकार ने महिला सशक्तीकरण और वित्तीय समावेशन के तहत महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए ठोस कदम उठाए हैं। अधिकारियों के अनुसार, राज्य सरकार की पहल की बदौलत प्रदेशभर में 16 लाख से अधिक महिलाएं 'लखपति दीदी' के रूप में उभरी हैं।
अधिकारियों ने बताया कि ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक सहायता और रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए 100 करोड़ रुपये की लागत से जिला स्तर पर ग्रामीण महिला बीपीओ स्थापित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री लखपति दीदी ऋण योजना के तहत लोन की सीमा एक लाख रुपये से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपये कर दी गई है, जिससे महिला उद्यमिता को और प्रोत्साहन मिलेगा।
महिलाओं को सशक्त करने के लिए ग्रामीण आजीविका विकास परिषद (राजीविका) के माध्यम से कई नवीन पहलें लागू की जा रही हैं। इस वर्ष के बजट में राज्य सरकार की ओर से राजीविका के अंतर्गत गठित 100 क्लस्टर-स्तरीय संघों के लिए कार्यालय और अन्य उद्देश्यों के लिए भवन उपलब्ध कराए जाएंगे। इन कार्यालयों में डिजिटल और वित्तीय साक्षरता के लिए सक्षम केंद्र भी स्थापित किए जाएंगे।
स्वयं सहायता समूहों द्वारा निर्मित उत्पादों की ब्रांडिंग, डिजाइन और पैकेजिंग में सुधार करके, डेयरी, वस्त्र, जूते, बाजरा और मसाले जैसे क्षेत्रों में 50 नए उद्यम स्थापित किए जाएंगे। राज्य सरकार इन उत्पादों के मार्केटिंग को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ समन्वय करेगी।
राजीविका संस्था से जुड़े महिलाओं को उनकी उद्यमशीलता में सफलता दिलाने के लिए सभी संभागीय मुख्यालयों में राज सखी स्टोर स्थापित किए जाएंगे। इसके लिए सभी जिलों में चरणबद्ध तरीके से इंटरप्रेन्योरशिप और क्षमता निर्माण केंद्र खोले जाएंगे। मुख्यमंत्री नारी शक्ति उद्यम प्रोत्साहन योजना के तहत ऋण सीमा 50 लाख रुपये से बढ़ाकर एक करोड़ रुपये कर दी गई है। इसके अलावा, स्वयं सहायता समूहों की लगभग 5,000 महिलाओं को 'बैंकिंग संवाददाता सखी' के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा।
राज्य सरकार आंगनवाड़ी केंद्रों और विद्यालयों में मध्याह्न भोजन के लिए फलों और सब्जियों की स्थानीय उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए महिला स्वयं सहायता समूहों की आजीविका को बढ़ावा देने के लिए 11,000 अमृत पोषण वाटिकाएं भी विकसित करेगी। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा पाठ्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके साथ ही 1,000 कार्यकर्ताओं को प्रतिष्ठित संस्थानों से विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
इस वर्ष के बजट में किशोरी बालिका योजना का विस्तार किया गया है, जो पहले करौली, धौलपुर, बारां, जैसलमेर और सिरोही जैसे आकांक्षी जिलों में लागू थी। अब यह योजना राज्य के सभी 27 आकांक्षी ब्लॉकों में लागू की जाएगी। इस योजना के तहत 50,000 से अधिक किशोरियों को पोषण पूरकों का लाभ मिलेगा। इसके अलावा, छह महीने से छह साल तक के बच्चों की देखभाल के लिए कार्यालय समय के दौरान सरकारी कार्यालयों में चरणबद्ध तरीके से मुख्यमंत्री शिशु वात्सल्य सदन की सुविधाएं स्थापित की जाएंगी। महिलाओं की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है।
सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार, घरेलू हिंसा और अन्य अपराधों को रोकने के लिए कार्यरत कालिका गश्ती इकाइयों की संख्या 500 से बढ़ाकर 600 की जाएगी। 100 पुलिस थानों में महिला बैरक भी विकसित किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, पर्यटकों की सुरक्षा और सहायता के लिए पर्यटन सहायता बल को मजबूत करने के लिए महिला सुरक्षा कर्मियों और गाइडों की नियुक्ति की जाएगी।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में, मुख्यमंत्री पोषण न्यूट्री-किट, लाडो प्रोत्साहन योजना, मुख्यमंत्री नारी शक्ति प्रशिक्षण और कौशल संवर्धन, मुख्यमंत्री नारी शक्ति उद्यम प्रोत्साहन, सोलर दीदी और लखपति दीदी जैसी योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाया जा रहा है। सरकार की इन पहलों से महिलाओं को काफी लाभ हुआ है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और निर्णय लेने में उनकी भागीदारी बढ़ी है, तथा राज्य के विकास में उनका सक्रिय योगदान सुनिश्चित हुआ है।