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गुजरात साइबर क्राइम: APK फ्रॉड नेटवर्क का भंडाफोड़, झारखंड से तीन गिरफ्तार; ₹70 लाख की ठगी उजागर

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गुजरात साइबर क्राइम: APK फ्रॉड नेटवर्क का भंडाफोड़, झारखंड से तीन गिरफ्तार; ₹70 लाख की ठगी उजागर

सारांश

जामताड़ा-गिरिडीह का साया अब APK के रूप में — अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया जो टेलीग्राम बॉट से देशभर के ठगों को नकली बैंकिंग एप बेचता था। मुख्य आरोपी चलती ट्रेन से पकड़ा गया; ₹70 लाख की ठगी और 18 बैंकों के नाम पर फर्जी APK — साइबर अपराध का नया औद्योगिक मॉडल।

मुख्य बातें

अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने 25 जून 2026 को झारखंड के गिरिडीह से जुड़े तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया।
मुख्य आरोपी पूर्णानंद उर्फ मुकेश तिवारी को RPF की मदद से किशनगंज के पास चलती ट्रेन से पकड़ा गया।
गिरोह 18 बैंकों के नाम पर फर्जी APK फाइलें ₹12,000 प्रतिमाह की सदस्यता पर टेलीग्राम बॉट से बेचता था।
कथित मासिक कमाई ₹40 से ₹50 लाख ; प्रतिमाह 300-400 ग्राहक ।
अब तक ₹70 लाख की ठगी, 12 राष्ट्रीय शिकायतें और अहमदाबाद में 5 FIR दर्ज।
पीड़ित नरेश सबनानी के HDFC बैंक खाते से ₹6.68 लाख की धोखाधड़ी — जांच की शुरुआत इसी शिकायत से हुई।

अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने 25 जून 2026 को झारखंड के गिरिडीह-जामताड़ा क्षेत्र से जुड़े एक बड़े एपीके फ्रॉड नेटवर्क का पर्दाफाश किया और तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। ये कथित अपराधी दुर्भावनापूर्ण एंड्रॉयड एप्लिकेशन पैकेज (APK) फाइलें तैयार कर देशभर के साइबर ठगों को बेचते थे, जिनकी मदद से पीड़ितों के मोबाइल हैक कर बैंक खातों से रकम उड़ाई जाती थी। अब तक इस गिरोह से जुड़े मामलों में करीब ₹70 लाख की धोखाधड़ी सामने आई है।

मुख्य आरोपी और गिरफ्तारी

गिरफ्तार तीनों आरोपी गिरिडीह निवासी हैं। मुख्य आरोपी पूर्णानंद उर्फ मुकेश तिवारी (28 वर्ष) को रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की सहायता से किशनगंज के पास एक चलती ट्रेन से पकड़ा गया। अन्य दो आरोपियों में विकास दास (33 वर्ष) और सीताराम नकुल मंडल (26 वर्ष) शामिल हैं। तीनों पर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

कैसे हुई जांच की शुरुआत

मामले की जड़ अहमदाबाद के हंसोल क्षेत्र निवासी नरेश सबनानी की शिकायत से जुड़ी है। उन्हें व्हाट्सऐप पर एक संदेश मिला, जिसमें खुद को साबरमती गैस लिमिटेड का प्रतिनिधि बताकर गैस कनेक्शन काटे जाने की चेतावनी दी गई थी। संदेश में 'साबरमती गैस बिल अपडेट.एपीके' नामक एप्लिकेशन डाउनलोड करने को कहा गया। एप इंस्टॉल होते ही उनका मोबाइल हैक हो गया और HDFC बैंक खाते से ₹6.68 लाख की धोखाधड़ी हो गई। पीड़ित ने 1930 साइबर हेल्पलाइन और साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद जांच शुरू हुई।

गिरोह का तंत्र और कमाई

जांच में खुलासा हुआ कि मुकेश तिवारी दुर्भावनापूर्ण APK फाइलें तैयार करता था और एक टेलीग्राम बॉट के माध्यम से उन्हें देशभर के साइबर अपराधियों को बेचता था। ये फर्जी एप SBI KYC, बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, एक्सिस बैंक, यस बैंक, यूनियन बैंक, इंडसइंड बैंक, RTO ई-चालान, बिजली बिल और अन्य सेवाओं के नाम पर बनाए जाते थे। पुलिस के अनुसार, आरोपी कम से कम 18 बैंकों के नाम पर फर्जी APK फाइलें बना चुका था। इन फाइलों की मासिक सदस्यता ₹12,000 में बेची जाती थी और प्रतिमाह 300 से 400 ग्राहक होते थे, जिससे कथित तौर पर ₹40 से ₹50 लाख प्रतिमाह की कमाई होती थी।

विकास दास APK फाइलें खरीदारों तक पहुंचाने का काम करता था और SBI की YONO Cash सुविधा के ज़रिए भुगतान प्राप्त करता था — इस सुविधा की खासियत यह है कि इससे बिना डेबिट कार्ड के ATM से नकदी निकाली जा सकती है। वह कमीशन काटकर शेष रकम मुकेश तिवारी को भेजता था। सीताराम मंडल न केवल APK फाइलें वितरित करता था, बल्कि डेबिट-क्रेडिट कार्ड की जानकारियां जुटाने और OTP आधारित ठगी में भी कथित तौर पर शामिल रहा है।

APK का खतरनाक तरीका

साइबर क्राइम ब्रांच की संयुक्त पुलिस आयुक्त डॉ. लवीना सिन्हा ने बताया कि ये फर्जी एप गैस बिल अपडेट, बैंक KYC, बिजली बिल, सरकारी योजनाओं, ई-चालान और यहाँ तक कि शादी के निमंत्रण पत्र के रूप में भी भेजे जाते थे। एक बार इंस्टॉल होने के बाद ये एप SMS, संपर्क सूची, कॉल लॉग, नोटिफिकेशन और बैंकिंग जानकारी तक पहुंच हासिल कर लेते थे। इससे भी खतरनाक बात यह है कि संक्रमित मोबाइल से यह APK फाइल स्वतः व्हाट्सऐप और टेलीग्राम समूहों में भी भेजी जाती थी, जिससे यह हजारों लोगों तक तेजी से फैल जाती थी।

जांच की स्थिति और पुलिस की सलाह

अब तक इस गिरोह को राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज 12 शिकायतों और अहमदाबाद में दर्ज 5 FIR से जोड़ा गया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से APK फाइलें, डोमेन, सर्वर, ईमेल अकाउंट और अन्य तकनीकी साक्ष्य बरामद किए हैं। पुलिस का मानना है कि गिरोह की गतिविधियां कई राज्यों तक फैली थीं और जांच अभी जारी है। नागरिकों से अपील की गई है कि केवल आधिकारिक ऐप स्टोर से ही एप डाउनलोड करें, अनजान स्रोत से प्राप्त APK फाइल कभी इंस्टॉल न करें, OTP या बैंकिंग जानकारी किसी से साझा न करें और संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर संपर्क करें।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह मामला उस खतरे के औद्योगीकरण को दर्शाता है — एक टेलीग्राम बॉट, मासिक सदस्यता मॉडल और 18 बैंकों के नाम पर तैयार APK का पोर्टफोलियो। यह महज एक गिरोह की गिरफ्तारी नहीं है, बल्कि 'साइबर क्राइम-ऐज़-ए-सर्विस' के उभरते मॉडल का खुलासा है जहाँ तकनीकी विशेषज्ञता और वितरण तंत्र अलग-अलग लोगों के हाथ में है। असली सवाल यह है कि क्या कानून प्रवर्तन एजेंसियां इस नेटवर्क के अन्य 300-400 मासिक ग्राहकों तक पहुंच पाएंगी — क्योंकि APK बनाने वाला पकड़ा गया है, उन्हें इस्तेमाल करने वाले अभी भी खुले हैं।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

APK फ्रॉड क्या होता है और यह कैसे काम करता है?
APK (Android Application Package) फ्रॉड में साइबर अपराधी नकली मोबाइल एप्लिकेशन फाइलें बनाते हैं जो बैंक, गैस कंपनी या सरकारी सेवाओं की असली एप जैसी दिखती हैं। इन्हें WhatsApp या SMS के ज़रिए भेजा जाता है और डाउनलोड होते ही ये फोन का पूरा नियंत्रण ले लेती हैं — SMS, OTP, बैंकिंग जानकारी सब हासिल कर ठग खाते से पैसे उड़ा लेते हैं।
गुजरात पुलिस ने किन आरोपियों को गिरफ्तार किया?
अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने झारखंड के गिरिडीह निवासी पूर्णानंद उर्फ मुकेश तिवारी (28 वर्ष), विकास दास (33 वर्ष) और सीताराम नकुल मंडल (26 वर्ष) को गिरफ्तार किया। मुकेश तिवारी को RPF की मदद से किशनगंज के पास चलती ट्रेन से पकड़ा गया।
इस गिरोह से कितने लोगों को नुकसान हुआ और कितनी रकम की ठगी हुई?
अब तक इस गिरोह से राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज 12 शिकायतें और अहमदाबाद में 5 FIR जोड़ी गई हैं, जिनमें कुल ₹70 लाख की धोखाधड़ी सामने आई है। पुलिस का मानना है कि गिरोह की गतिविधियां कई राज्यों तक फैली थीं और जांच जारी है।
इस APK स्कैम से खुद को कैसे बचाएं?
केवल Google Play Store या Apple App Store जैसे आधिकारिक प्लेटफॉर्म से ही एप डाउनलोड करें। WhatsApp, SMS या किसी अनजान लिंक से भेजी गई APK फाइल कभी इंस्टॉल न करें, OTP या बैंकिंग जानकारी किसी से साझा न करें। संदिग्ध गतिविधि होने पर तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर कॉल करें।
टेलीग्राम बॉट के ज़रिए APK बेचने का यह मॉडल कितना बड़ा था?
पुलिस के अनुसार मुख्य आरोपी मुकेश तिवारी के पास हर महीने 300 से 400 ग्राहक होते थे जो ₹12,000 प्रतिमाह की सदस्यता लेते थे। इससे वह कथित तौर पर ₹40 से ₹50 लाख प्रतिमाह कमाता था। उसने 18 बैंकों और कई सरकारी सेवाओं के नाम पर फर्जी APK फाइलें तैयार की थीं।
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