गुजरात साइबर क्राइम: APK फ्रॉड नेटवर्क का भंडाफोड़, झारखंड से तीन गिरफ्तार; ₹70 लाख की ठगी उजागर
सारांश
मुख्य बातें
अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने 25 जून 2026 को झारखंड के गिरिडीह-जामताड़ा क्षेत्र से जुड़े एक बड़े एपीके फ्रॉड नेटवर्क का पर्दाफाश किया और तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। ये कथित अपराधी दुर्भावनापूर्ण एंड्रॉयड एप्लिकेशन पैकेज (APK) फाइलें तैयार कर देशभर के साइबर ठगों को बेचते थे, जिनकी मदद से पीड़ितों के मोबाइल हैक कर बैंक खातों से रकम उड़ाई जाती थी। अब तक इस गिरोह से जुड़े मामलों में करीब ₹70 लाख की धोखाधड़ी सामने आई है।
मुख्य आरोपी और गिरफ्तारी
गिरफ्तार तीनों आरोपी गिरिडीह निवासी हैं। मुख्य आरोपी पूर्णानंद उर्फ मुकेश तिवारी (28 वर्ष) को रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की सहायता से किशनगंज के पास एक चलती ट्रेन से पकड़ा गया। अन्य दो आरोपियों में विकास दास (33 वर्ष) और सीताराम नकुल मंडल (26 वर्ष) शामिल हैं। तीनों पर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
कैसे हुई जांच की शुरुआत
मामले की जड़ अहमदाबाद के हंसोल क्षेत्र निवासी नरेश सबनानी की शिकायत से जुड़ी है। उन्हें व्हाट्सऐप पर एक संदेश मिला, जिसमें खुद को साबरमती गैस लिमिटेड का प्रतिनिधि बताकर गैस कनेक्शन काटे जाने की चेतावनी दी गई थी। संदेश में 'साबरमती गैस बिल अपडेट.एपीके' नामक एप्लिकेशन डाउनलोड करने को कहा गया। एप इंस्टॉल होते ही उनका मोबाइल हैक हो गया और HDFC बैंक खाते से ₹6.68 लाख की धोखाधड़ी हो गई। पीड़ित ने 1930 साइबर हेल्पलाइन और साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद जांच शुरू हुई।
गिरोह का तंत्र और कमाई
जांच में खुलासा हुआ कि मुकेश तिवारी दुर्भावनापूर्ण APK फाइलें तैयार करता था और एक टेलीग्राम बॉट के माध्यम से उन्हें देशभर के साइबर अपराधियों को बेचता था। ये फर्जी एप SBI KYC, बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, एक्सिस बैंक, यस बैंक, यूनियन बैंक, इंडसइंड बैंक, RTO ई-चालान, बिजली बिल और अन्य सेवाओं के नाम पर बनाए जाते थे। पुलिस के अनुसार, आरोपी कम से कम 18 बैंकों के नाम पर फर्जी APK फाइलें बना चुका था। इन फाइलों की मासिक सदस्यता ₹12,000 में बेची जाती थी और प्रतिमाह 300 से 400 ग्राहक होते थे, जिससे कथित तौर पर ₹40 से ₹50 लाख प्रतिमाह की कमाई होती थी।
विकास दास APK फाइलें खरीदारों तक पहुंचाने का काम करता था और SBI की YONO Cash सुविधा के ज़रिए भुगतान प्राप्त करता था — इस सुविधा की खासियत यह है कि इससे बिना डेबिट कार्ड के ATM से नकदी निकाली जा सकती है। वह कमीशन काटकर शेष रकम मुकेश तिवारी को भेजता था। सीताराम मंडल न केवल APK फाइलें वितरित करता था, बल्कि डेबिट-क्रेडिट कार्ड की जानकारियां जुटाने और OTP आधारित ठगी में भी कथित तौर पर शामिल रहा है।
APK का खतरनाक तरीका
साइबर क्राइम ब्रांच की संयुक्त पुलिस आयुक्त डॉ. लवीना सिन्हा ने बताया कि ये फर्जी एप गैस बिल अपडेट, बैंक KYC, बिजली बिल, सरकारी योजनाओं, ई-चालान और यहाँ तक कि शादी के निमंत्रण पत्र के रूप में भी भेजे जाते थे। एक बार इंस्टॉल होने के बाद ये एप SMS, संपर्क सूची, कॉल लॉग, नोटिफिकेशन और बैंकिंग जानकारी तक पहुंच हासिल कर लेते थे। इससे भी खतरनाक बात यह है कि संक्रमित मोबाइल से यह APK फाइल स्वतः व्हाट्सऐप और टेलीग्राम समूहों में भी भेजी जाती थी, जिससे यह हजारों लोगों तक तेजी से फैल जाती थी।
जांच की स्थिति और पुलिस की सलाह
अब तक इस गिरोह को राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज 12 शिकायतों और अहमदाबाद में दर्ज 5 FIR से जोड़ा गया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से APK फाइलें, डोमेन, सर्वर, ईमेल अकाउंट और अन्य तकनीकी साक्ष्य बरामद किए हैं। पुलिस का मानना है कि गिरोह की गतिविधियां कई राज्यों तक फैली थीं और जांच अभी जारी है। नागरिकों से अपील की गई है कि केवल आधिकारिक ऐप स्टोर से ही एप डाउनलोड करें, अनजान स्रोत से प्राप्त APK फाइल कभी इंस्टॉल न करें, OTP या बैंकिंग जानकारी किसी से साझा न करें और संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर संपर्क करें।