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गुजरात साइबर ठगी: मेहसाणा से दो आरोपी गिरफ्तार, ₹1.5 करोड़ की धोखाधड़ी में कॉर्पोरेट खाते सप्लाई का आरोप

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गुजरात साइबर ठगी: मेहसाणा से दो आरोपी गिरफ्तार, ₹1.5 करोड़ की धोखाधड़ी में कॉर्पोरेट खाते सप्लाई का आरोप

सारांश

गुजरात पुलिस ने 'ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0' के तहत मेहसाणा के विसनगर से दो आरोपियों को दबोचा, जो साइबर ठगी गिरोह को बल्क मोड वाले कॉर्पोरेट बैंक खाते सप्लाई करते थे। ₹1.5 करोड़ की ठगी से जुड़े इस मामले में अब तक कुल आठ गिरफ्तारियाँ हो चुकी हैं।

मुख्य बातें

गुजरात साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने 2 सितंबर 2026 को पार्थ बारोट और रमेश कुमार लवाणा को विसनगर, मेहसाणा से गिरफ्तार किया।
आरोपियों पर साइबर ठगी गिरोह को बल्क मोड सुविधा वाले कॉर्पोरेट बैंक खाते उपलब्ध कराने का आरोप है।
इन खातों के ज़रिए कई राज्यों में कथित तौर पर ₹1.5 करोड़ की साइबर ठगी की गई।
यह कार्रवाई 'ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0' के तहत हुई; इस मामले में अब तक 8 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं।
आरोपी खाताधारकों को कमीशन का लालच देकर बैंकिंग जानकारी और APK फाइल इंस्टॉलेशन के लिए राजी करते थे।

गुजरात पुलिस के साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने 2 सितंबर 2026 को मेहसाणा जिले के विसनगर से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिन पर साइबर ठगी गिरोह को बल्क मोड सुविधा वाले कॉर्पोरेट बैंक खाते उपलब्ध कराने का आरोप है। जांच के अनुसार, इन खातों का उपयोग कई राज्यों में फैले साइबर ठगी के मामलों में किया गया, जिनमें कथित तौर पर ₹1.5 करोड़ की धोखाधड़ी हुई।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान पार्थ बारोट और रमेश कुमार लवाणा के रूप में हुई है। दोनों मेहसाणा जिले के विसनगर क्षेत्र के निवासी हैं। पुलिस ने दोनों को विसनगर से हिरासत में लेकर कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया। इस मामले में भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0 के तहत कार्रवाई

यह गिरफ्तारी 'ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0' के तहत की गई है। साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के अनुसार, इस अभियान में अब तक कुल छह अन्य आरोपी भी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। गिरोह से जुड़े शेष सदस्यों की तलाश अभी जारी है।

कैसे काम करता था यह गिरोह

जांच एजेंसियों के अनुसार, बारोट और लवाणा आम लोगों से उनके बैंक खाते हासिल कर साइबर ठगी गिरोह तक पहुँचाते थे। गिरोह विशेष रूप से बल्क मोड सुविधा वाले खातों की माँग करता था — यह सुविधा एक साथ कई लेनदेन करने की अनुमति देती है और आमतौर पर कॉर्पोरेट, व्यावसायिक, सरकारी या संस्थागत खातों में उपलब्ध होती है, सामान्य बचत खातों में नहीं।

पुलिस के मुताबिक, आरोपी खाताधारकों को कमीशन का लालच देकर उनसे आधार कार्ड, पैन कार्ड, चेकबुक की तस्वीरें, एटीएम कार्ड के आगे-पीछे की फोटो, इंटरनेट बैंकिंग आईडी और पासवर्ड जैसी संवेदनशील जानकारियाँ हासिल कर लेते थे। इसके बाद यह सारा डेटा साइबर ठगी गिरोह को सौंप दिया जाता था।

ओटीपी बाधा हटाने की तकनीक

पुलिस के अनुसार, आरोपी खाताधारकों को उनके मोबाइल फोन में APK फाइल इंस्टॉल करने के लिए भी राजी करते थे। इस तकनीक का उद्देश्य यह था कि गिरोह को बैंकिंग लेनदेन के लिए आने वाले ओटीपी की ज़रूरत न पड़े और वह सीधे खाते से लेनदेन कर सके। इसके अलावा, आरोपी यह भी सुनिश्चित करते थे कि दी गई इंटरनेट बैंकिंग जानकारी से सफलतापूर्वक लॉगिन किया जा सके।

आगे की जांच

साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने संकेत दिया है कि इस गिरोह के नेटवर्क की जड़ें कई राज्यों तक फैली हैं। अधिकारियों ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अज्ञात व्यक्ति के साथ बैंक खाते की जानकारी साझा न करें और अज्ञात स्रोतों से APK फाइलें इंस्टॉल करने से बचें। फिलहाल शेष आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बैंकों पर भी बनती है।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुजरात में साइबर ठगी के सिलसिले में किसे गिरफ्तार किया गया?
गुजरात पुलिस के साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने मेहसाणा जिले के विसनगर से पार्थ बारोट और रमेश कुमार लवाणा को गिरफ्तार किया। दोनों पर साइबर ठगी गिरोह को बल्क मोड सुविधा वाले कॉर्पोरेट बैंक खाते उपलब्ध कराने का आरोप है।
ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0 क्या है?
यह गुजरात पुलिस के साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का एक विशेष अभियान है, जिसका उद्देश्य साइबर ठगी गिरोहों को बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले 'मनी म्यूल' नेटवर्क को तोड़ना है। इस अभियान के तहत अब तक कुल आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
बल्क मोड बैंक खाते साइबर ठगी में कैसे इस्तेमाल होते हैं?
बल्क मोड सुविधा एक साथ कई बैंकिंग लेनदेन करने की अनुमति देती है और आमतौर पर कॉर्पोरेट या संस्थागत खातों में उपलब्ध होती है। साइबर ठगी गिरोह इन खातों का उपयोग ठगी की रकम को तेज़ी से कई जगह ट्रांसफर करने के लिए करते हैं, जिससे पैसे का पता लगाना कठिन हो जाता है।
APK फाइल इंस्टॉलेशन का साइबर ठगी से क्या संबंध है?
आरोपी खाताधारकों को उनके मोबाइल में APK फाइल इंस्टॉल करने के लिए राजी करते थे। इससे गिरोह को बैंकिंग लेनदेन के लिए आने वाले OTP की ज़रूरत नहीं पड़ती थी और वह सीधे खाते से धनराशि निकाल या ट्रांसफर कर सकता था।
इस साइबर ठगी मामले में कितने की धोखाधड़ी हुई और कितने आरोपी पकड़े गए?
जांच के अनुसार, इन खातों के ज़रिए कई राज्यों में कथित तौर पर ₹1.5 करोड़ की साइबर ठगी की गई। अब तक इस मामले में कुल आठ आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं और शेष की तलाश जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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