गुजरात साइबर ठगी: मेहसाणा से दो आरोपी गिरफ्तार, ₹1.5 करोड़ की धोखाधड़ी में कॉर्पोरेट खाते सप्लाई का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात पुलिस के साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने 2 सितंबर 2026 को मेहसाणा जिले के विसनगर से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिन पर साइबर ठगी गिरोह को बल्क मोड सुविधा वाले कॉर्पोरेट बैंक खाते उपलब्ध कराने का आरोप है। जांच के अनुसार, इन खातों का उपयोग कई राज्यों में फैले साइबर ठगी के मामलों में किया गया, जिनमें कथित तौर पर ₹1.5 करोड़ की धोखाधड़ी हुई।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान पार्थ बारोट और रमेश कुमार लवाणा के रूप में हुई है। दोनों मेहसाणा जिले के विसनगर क्षेत्र के निवासी हैं। पुलिस ने दोनों को विसनगर से हिरासत में लेकर कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया। इस मामले में भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0 के तहत कार्रवाई
यह गिरफ्तारी 'ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0' के तहत की गई है। साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के अनुसार, इस अभियान में अब तक कुल छह अन्य आरोपी भी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। गिरोह से जुड़े शेष सदस्यों की तलाश अभी जारी है।
कैसे काम करता था यह गिरोह
जांच एजेंसियों के अनुसार, बारोट और लवाणा आम लोगों से उनके बैंक खाते हासिल कर साइबर ठगी गिरोह तक पहुँचाते थे। गिरोह विशेष रूप से बल्क मोड सुविधा वाले खातों की माँग करता था — यह सुविधा एक साथ कई लेनदेन करने की अनुमति देती है और आमतौर पर कॉर्पोरेट, व्यावसायिक, सरकारी या संस्थागत खातों में उपलब्ध होती है, सामान्य बचत खातों में नहीं।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी खाताधारकों को कमीशन का लालच देकर उनसे आधार कार्ड, पैन कार्ड, चेकबुक की तस्वीरें, एटीएम कार्ड के आगे-पीछे की फोटो, इंटरनेट बैंकिंग आईडी और पासवर्ड जैसी संवेदनशील जानकारियाँ हासिल कर लेते थे। इसके बाद यह सारा डेटा साइबर ठगी गिरोह को सौंप दिया जाता था।
ओटीपी बाधा हटाने की तकनीक
पुलिस के अनुसार, आरोपी खाताधारकों को उनके मोबाइल फोन में APK फाइल इंस्टॉल करने के लिए भी राजी करते थे। इस तकनीक का उद्देश्य यह था कि गिरोह को बैंकिंग लेनदेन के लिए आने वाले ओटीपी की ज़रूरत न पड़े और वह सीधे खाते से लेनदेन कर सके। इसके अलावा, आरोपी यह भी सुनिश्चित करते थे कि दी गई इंटरनेट बैंकिंग जानकारी से सफलतापूर्वक लॉगिन किया जा सके।
आगे की जांच
साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने संकेत दिया है कि इस गिरोह के नेटवर्क की जड़ें कई राज्यों तक फैली हैं। अधिकारियों ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अज्ञात व्यक्ति के साथ बैंक खाते की जानकारी साझा न करें और अज्ञात स्रोतों से APK फाइलें इंस्टॉल करने से बचें। फिलहाल शेष आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।