साइबर धोखाधड़ी रोकने की बड़ी पहल: हैदराबाद पुलिस कमिश्नर सज्जनार ने बैंकों को दिया 'शून्य म्यूल अकाउंट' का सख्त निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
हैदराबाद, 23 अप्रैल। साइबर धोखाधड़ी के खिलाफ एक निर्णायक कदम उठाते हुए हैदराबाद के पुलिस कमिश्नर वी. सी. सज्जनार ने गुरुवार को बैंकों को स्पष्ट निर्देश दिया कि वे अपनी शाखाओं में 'म्यूल अकाउंट' (अवैध लेन-देन के लिए उपयोग किए जाने वाले फर्जी बैंक खाते) की संख्या पूरी तरह शून्य पर लाएं। उन्होंने कहा कि बैंक शाखाओं की प्राथमिकता खाता खोलने के लक्ष्यों से हटकर नागरिकों की वित्तीय सुरक्षा की ओर केंद्रित होनी चाहिए।
बैंकों के लिए नई 'ट्विन-चैलेंज फ्रेमवर्क' की सिफारिश
कमिश्नर सज्जनार ने एक 'ट्विन-चैलेंज फ्रेमवर्क' लागू करने की सिफारिश की, जिसके तहत बैंक शाखाओं के प्रदर्शन को मापने के दो मुख्य पैमाने होंगे — 'साइबर अपराध पीड़ितों की संख्या शून्य' और 'शाखा में शून्य म्यूल अकाउंट'। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन दोनों लक्ष्यों को शाखा स्तर पर आधिकारिक मुख्य प्रदर्शन संकेतक (KPI) के रूप में शामिल किया जाए।
जो शाखाएं इन मानकों पर खरी उतरेंगी, उन्हें बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा औपचारिक रूप से सम्मानित और पुरस्कृत किया जाएगा। यह पहल बैंकिंग संस्कृति में एक बड़े बदलाव का संकेत है।
'ऑपरेशन ऑक्टोपस' के बाद आयोजित हुई अहम बैठक
यह महत्वपूर्ण बैठक 'ऑपरेशन ऑक्टोपस' की सफलता के बाद बुलाई गई थी। यह हैदराबाद सिटी पुलिस की दो-चरणीय समन्वित कार्रवाई थी, जिसका लक्ष्य संगठित साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क को ध्वस्त करना था। इस अभियान के दौरान उन बैंक अधिकारियों को भी गिरफ्तार किया गया, जो कथित रूप से फर्जी खाते खुलवाने में संलिप्त पाए गए।
इस कॉन्क्लेव की अध्यक्षता स्वयं कमिश्नर सज्जनार ने की। इसमें अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर (अपराध एवं एसआईटी) एम. श्रीनिवासुलु और भारतीय रिजर्व बैंक के क्षेत्रीय निदेशक चिन्मय कुमार भी उपस्थित रहे। बैठक में 45 सार्वजनिक और निजी बैंकों के 75 प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
KYC उल्लंघनकर्ताओं पर होगी कड़ी कार्रवाई
कमिश्नर सज्जनार ने बैंकों से कहा कि सख्त KYC नियमों का पालन, गहन जांच-पड़ताल और वास्तविक समय की निगरानी ही म्यूल अकाउंट को रोकने के प्रभावी उपाय हैं। फर्जी खाते खोलने में शामिल पाए जाने वाले KYC सत्यापनकर्ताओं के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
साइबर अपराधियों से मिलीभगत करने वाले किसी भी बैंक कर्मचारी को बैंकिंग और वित्तीय सेवा तंत्र से पूरी तरह ब्लैकलिस्ट किया जाएगा। संदिग्ध अधिकारियों द्वारा खोले गए खातों की समय-समय पर फोरेंसिक जांच भी अनिवार्य की जाएगी।
तकनीकी समाधान और पीड़ितों की मदद पर जोर
वास्तविक समय में फर्जी खाता गतिविधियों का पता लगाने के लिए 'म्यूल हंटर' जैसे उन्नत तकनीकी उपकरण अपनाने की सलाह दी गई। बैंक कर्मचारियों को साइबर धोखाधड़ी के पीड़ितों को राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 और साइबरक्राइम पोर्टल (cybercrime.gov.in) की जानकारी देकर तत्काल सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए गए।
समय से पहले सावधि जमा (FD) बंद करवाने के इच्छुक ग्राहकों की सक्रिय रूप से जांच करने को भी कहा गया, ताकि चल रही साइबर ठगी को रोका जा सके।
अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोहों का भंडाफोड़
कमिश्नर ने बताया कि भारत में सक्रिय साइबर धोखाधड़ी गिरोहों का मुख्यालय मुख्यतः कंबोडिया, वियतनाम और संयुक्त अरब अमीरात में है। ये गिरोह भारत में मध्यस्थों के जरिए बैंक अधिकारियों से मिलीभगत करके खाते हासिल करते हैं और भारतीय नागरिकों से ठगी की रकम इन्हीं खातों से बाहर भेजते हैं।
इस प्रेजेंटेशन में इन नेटवर्कों के अंतरराष्ट्रीय और संगठित स्वरूप को उजागर किया गया और बताया गया कि बैंकों के अंदर की मिलीभगत इन्हें कितना मजबूत बनाती है।
आने वाले दिनों में हैदराबाद पुलिस इन निर्देशों के अनुपालन की निगरानी करेगी और बैंक शाखाओं के KPI डेटा की समीक्षा की जाएगी। यह पहल पूरे देश में साइबर सुरक्षा के लिए एक मॉडल बन सकती है।