सूरत साइबर क्राइम सेल ने ₹2.52 करोड़ लौटाए, 1,824 पीड़ितों के लिए ₹13.38 करोड़ के अदालती आदेश जारी
सारांश
मुख्य बातें
सूरत साइबर क्राइम सेल ने जनवरी से जून 2026 के बीच साइबर धोखाधड़ी के 61 पीड़ितों को ₹2.52 करोड़ की राशि वापस दिलाई है। इसके अतिरिक्त, व्यापक रिकवरी अभियान के तहत 1,824 आवेदकों के पक्ष में ₹13.38 करोड़ की वापसी के अदालती आदेश भी हासिल किए गए हैं। यह कार्रवाई ऑनलाइन वित्तीय घोटालों में गँवाई गई रकम की वसूली के लिए कानूनी तंत्र के बढ़ते प्रभावी उपयोग को रेखांकित करती है।
तेरा तुझको अर्पण: वापसी का अनुष्ठान
यह पूरी वसूली 'तेरा तुझको अर्पण' कार्यक्रम के अंतर्गत संपन्न हुई। बुधवार को सूरत पुलिस आयुक्त अनुपम सिंह गहलोत ने 15 लाभार्थियों को व्यक्तिगत रूप से रिफंड चेक सौंपे। सूरत शहर पुलिस के अनुसार, ये धनराशियाँ 1 जनवरी से 30 जून 2026 के बीच दर्ज साइबर धोखाधड़ी की शिकायतों से संबंधित हैं।
मुख्य घटनाक्रम: कैसे हुई रिकवरी
राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज होते ही सूरत शहर साइबर अपराध प्रकोष्ठ ने शहर के सभी पुलिस स्टेशनों के साथ समन्वय स्थापित किया। इसके बाद कई राज्यों के बैंकों के साथ मिलकर संदिग्ध खातों को फ्रीज किया गया और धनवापसी की प्रक्रिया शुरू की गई।
अधिकारियों के अनुसार, साइबर क्राइम सेल ने पुलिस आयुक्त अनुपम सिंह गहलोत और अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) करणराज वाघेला के मार्गदर्शन में देशभर की अदालतों, लोक अदालतों और बैंकों के साथ समन्वय में काम किया। इस पूरी प्रक्रिया की प्रत्यक्ष निगरानी पुलिस उपायुक्त (साइबर सेल) बिशाखा जैन ने की।
आगे की कार्यवाही: लोक अदालत में ₹7 करोड़ के आवेदन
छह महीने की इस अवधि में सूरत शहर पुलिस ने लोक अदालतों के माध्यम से अदालती आदेश प्राप्त कर 1,824 आवेदकों को लगभग ₹13.38 करोड़ वापस दिलाने की प्रक्रिया पूरी की। इसके साथ ही, 11 जुलाई को होने वाली लोक अदालत में 1,690 आवेदकों द्वारा लगभग ₹7 करोड़ के रिफंड आवेदन दाखिल किए जा चुके हैं। अदालती आदेश मिलने और आवश्यक प्रक्रियाएँ पूरी होने के बाद यह राशि संबंधित लाभार्थियों के बैंक खातों में जमा की जाएगी।
पुलिस की जनता से अपील: सावधानी और तत्परता ज़रूरी
पुलिस ने नागरिकों से साइबर धोखाधड़ी की सूचना तुरंत देने का आग्रह किया है। अधिकारियों का कहना है कि जितनी जल्दी शिकायत दर्ज होगी, उतनी ही अधिक संभावना होगी कि धोखाधड़ी वाले लेनदेन को राशि निकाले जाने से पहले रोका जा सके।
पुलिस ने नागरिकों को आरटीओ चालान या अन्य बहाने से भेजी जाने वाली अज्ञात APK फाइलें डाउनलोड न करने, संदिग्ध SMS या ईमेल लिंक पर क्लिक न करने और सोशल मीडिया पर असामान्य रूप से उच्च रिटर्न का वादा करने वाले ऑनलाइन शेयर बाज़ार निवेश विज्ञापनों से सतर्क रहने की सलाह दी है। अधिकारियों ने सेक्सटॉर्शन, न्यूड वीडियो कॉल, डिजिटल अरेस्ट स्कैम या किसी भी अन्य साइबर अपराध के पीड़ितों से अनुरोध किया कि वे हेल्पलाइन 1930 या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर तत्काल घटना की रिपोर्ट करें।
11 जुलाई की लोक अदालत के नतीजे यह तय करेंगे कि सूरत का यह मॉडल राज्य के अन्य शहरों के लिए कितना प्रभावी उदाहरण बन सकता है।