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सूरत साइबर क्राइम सेल ने ₹2.52 करोड़ लौटाए, 1,824 पीड़ितों के लिए ₹13.38 करोड़ के अदालती आदेश जारी

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सूरत साइबर क्राइम सेल ने ₹2.52 करोड़ लौटाए, 1,824 पीड़ितों के लिए ₹13.38 करोड़ के अदालती आदेश जारी

सारांश

सूरत साइबर क्राइम सेल ने 2026 के पहले छह महीनों में 61 पीड़ितों को ₹2.52 करोड़ लौटाए और 1,824 आवेदकों के लिए ₹13.38 करोड़ के अदालती आदेश हासिल किए। 11 जुलाई की लोक अदालत में ₹7 करोड़ के और आवेदन विचाराधीन हैं।

मुख्य बातें

सूरत साइबर क्राइम सेल ने जनवरी-जून 2026 में साइबर धोखाधड़ी के 61 पीड़ितों को ₹2.52 करोड़ वापस दिलाए।
1,824 आवेदकों के पक्ष में लोक अदालतों के माध्यम से ₹13.38 करोड़ की वापसी के अदालती आदेश प्राप्त हुए।
'तेरा तुझको अर्पण' कार्यक्रम के तहत पुलिस आयुक्त अनुपम सिंह गहलोत ने 15 लाभार्थियों को रिफंड चेक सौंपे।
11 जुलाई को होने वाली लोक अदालत में 1,690 आवेदकों के ₹7 करोड़ के रिफंड आवेदन विचाराधीन हैं।
पुलिस ने नागरिकों को हेल्पलाइन 1930 पर तत्काल शिकायत दर्ज कराने की अपील की — शीघ्र रिपोर्टिंग से रकम बचने की संभावना बढ़ती है।

सूरत साइबर क्राइम सेल ने जनवरी से जून 2026 के बीच साइबर धोखाधड़ी के 61 पीड़ितों को ₹2.52 करोड़ की राशि वापस दिलाई है। इसके अतिरिक्त, व्यापक रिकवरी अभियान के तहत 1,824 आवेदकों के पक्ष में ₹13.38 करोड़ की वापसी के अदालती आदेश भी हासिल किए गए हैं। यह कार्रवाई ऑनलाइन वित्तीय घोटालों में गँवाई गई रकम की वसूली के लिए कानूनी तंत्र के बढ़ते प्रभावी उपयोग को रेखांकित करती है।

तेरा तुझको अर्पण: वापसी का अनुष्ठान

यह पूरी वसूली 'तेरा तुझको अर्पण' कार्यक्रम के अंतर्गत संपन्न हुई। बुधवार को सूरत पुलिस आयुक्त अनुपम सिंह गहलोत ने 15 लाभार्थियों को व्यक्तिगत रूप से रिफंड चेक सौंपे। सूरत शहर पुलिस के अनुसार, ये धनराशियाँ 1 जनवरी से 30 जून 2026 के बीच दर्ज साइबर धोखाधड़ी की शिकायतों से संबंधित हैं।

मुख्य घटनाक्रम: कैसे हुई रिकवरी

राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज होते ही सूरत शहर साइबर अपराध प्रकोष्ठ ने शहर के सभी पुलिस स्टेशनों के साथ समन्वय स्थापित किया। इसके बाद कई राज्यों के बैंकों के साथ मिलकर संदिग्ध खातों को फ्रीज किया गया और धनवापसी की प्रक्रिया शुरू की गई।

अधिकारियों के अनुसार, साइबर क्राइम सेल ने पुलिस आयुक्त अनुपम सिंह गहलोत और अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) करणराज वाघेला के मार्गदर्शन में देशभर की अदालतों, लोक अदालतों और बैंकों के साथ समन्वय में काम किया। इस पूरी प्रक्रिया की प्रत्यक्ष निगरानी पुलिस उपायुक्त (साइबर सेल) बिशाखा जैन ने की।

आगे की कार्यवाही: लोक अदालत में ₹7 करोड़ के आवेदन

छह महीने की इस अवधि में सूरत शहर पुलिस ने लोक अदालतों के माध्यम से अदालती आदेश प्राप्त कर 1,824 आवेदकों को लगभग ₹13.38 करोड़ वापस दिलाने की प्रक्रिया पूरी की। इसके साथ ही, 11 जुलाई को होने वाली लोक अदालत में 1,690 आवेदकों द्वारा लगभग ₹7 करोड़ के रिफंड आवेदन दाखिल किए जा चुके हैं। अदालती आदेश मिलने और आवश्यक प्रक्रियाएँ पूरी होने के बाद यह राशि संबंधित लाभार्थियों के बैंक खातों में जमा की जाएगी।

पुलिस की जनता से अपील: सावधानी और तत्परता ज़रूरी

पुलिस ने नागरिकों से साइबर धोखाधड़ी की सूचना तुरंत देने का आग्रह किया है। अधिकारियों का कहना है कि जितनी जल्दी शिकायत दर्ज होगी, उतनी ही अधिक संभावना होगी कि धोखाधड़ी वाले लेनदेन को राशि निकाले जाने से पहले रोका जा सके।

पुलिस ने नागरिकों को आरटीओ चालान या अन्य बहाने से भेजी जाने वाली अज्ञात APK फाइलें डाउनलोड न करने, संदिग्ध SMS या ईमेल लिंक पर क्लिक न करने और सोशल मीडिया पर असामान्य रूप से उच्च रिटर्न का वादा करने वाले ऑनलाइन शेयर बाज़ार निवेश विज्ञापनों से सतर्क रहने की सलाह दी है। अधिकारियों ने सेक्सटॉर्शन, न्यूड वीडियो कॉल, डिजिटल अरेस्ट स्कैम या किसी भी अन्य साइबर अपराध के पीड़ितों से अनुरोध किया कि वे हेल्पलाइन 1930 या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर तत्काल घटना की रिपोर्ट करें।

11 जुलाई की लोक अदालत के नतीजे यह तय करेंगे कि सूरत का यह मॉडल राज्य के अन्य शहरों के लिए कितना प्रभावी उदाहरण बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे संदर्भ में देखना ज़रूरी है — ₹2.52 करोड़ की प्रत्यक्ष वसूली और ₹13.38 करोड़ के अदालती आदेश तब आए हैं जब भारत में साइबर धोखाधड़ी से सालाना हज़ारों करोड़ रुपए की क्षति होती है। असली सवाल यह है कि अदालती आदेश मिलना और पीड़ित के खाते में राशि पहुँचना — इन दोनों के बीच की खाई कितनी बड़ी है। 1,824 आवेदकों के लिए आदेश मिले हैं, पर वास्तविक भुगतान अभी प्रक्रियाधीन है। लोक अदालत मॉडल की गति सराहनीय है, किंतु इसकी सफलता तब सिद्ध होगी जब ₹13.38 करोड़ की पूरी राशि वास्तव में पीड़ितों तक पहुँचे।
RashtraPress
2 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सूरत साइबर क्राइम सेल ने 2026 में कितने पीड़ितों को पैसे वापस दिलाए?
जनवरी से जून 2026 के बीच सूरत साइबर क्राइम सेल ने साइबर धोखाधड़ी के 61 पीड़ितों को ₹2.52 करोड़ की राशि वापस दिलाई। इसके अलावा 1,824 आवेदकों के लिए ₹13.38 करोड़ की वापसी के अदालती आदेश भी प्राप्त किए गए हैं।
'तेरा तुझको अर्पण' कार्यक्रम क्या है?
'तेरा तुझको अर्पण' सूरत पुलिस का एक कार्यक्रम है जिसके तहत साइबर धोखाधड़ी में गँवाई गई राशि को कानूनी प्रक्रिया के ज़रिए वापस दिलाया जाता है। इसी कार्यक्रम के अंतर्गत पुलिस आयुक्त अनुपम सिंह गहलोत ने 15 लाभार्थियों को रिफंड चेक सौंपे।
साइबर धोखाधड़ी होने पर तुरंत क्या करें?
साइबर धोखाधड़ी का शिकार होते ही तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएँ। पुलिस के अनुसार, जितनी जल्दी रिपोर्ट होगी, उतनी ही अधिक संभावना है कि धोखाधड़ी वाले खाते को फ्रीज कर राशि सुरक्षित की जा सके।
11 जुलाई 2026 की लोक अदालत में क्या होगा?
11 जुलाई को होने वाली लोक अदालत में 1,690 आवेदकों द्वारा लगभग ₹7 करोड़ के रिफंड आवेदन दाखिल किए गए हैं। अदालती आदेश मिलने और प्रक्रियाएँ पूरी होने के बाद यह राशि संबंधित पीड़ितों के बैंक खातों में जमा की जाएगी।
साइबर ठगी से बचने के लिए पुलिस ने क्या सावधानियाँ बताई हैं?
सूरत पुलिस ने नागरिकों को अज्ञात APK फाइलें न डाउनलोड करने, संदिग्ध SMS या ईमेल लिंक पर क्लिक न करने और सोशल मीडिया पर असामान्य रिटर्न का वादा करने वाले निवेश विज्ञापनों से सतर्क रहने की सलाह दी है। सेक्सटॉर्शन, डिजिटल अरेस्ट स्कैम या अन्य साइबर अपराध के पीड़ितों को तत्काल हेल्पलाइन 1930 पर रिपोर्ट करने को कहा गया है।
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