अमरेली साइबर क्राइम पुलिस ने सिडनी में बसे भारतीय नागरिक के ₹11 लाख वापस दिलाए, सोना खरीद में हुई थी धोखाधड़ी
सारांश
मुख्य बातें
अमरेली साइबर क्राइम पुलिस ने बैंकिंग प्रणाली के साथ समन्वय स्थापित कर ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में रहने वाले भारतीय नागरिक सौरभ जॉली के ₹11 लाख कुछ ही हफ्तों में वापस दिला दिए। जॉली, जो मूल रूप से नई दिल्ली के निवासी हैं, ने अप्रैल 2026 में सोना खरीदने के लिए अमरेली के एक व्यक्ति को यह रकम ट्रांसफर की थी, लेकिन भुगतान के बाद उन्हें सोना कभी नहीं मिला।
मामले का घटनाक्रम
सौरभ जॉली ने जून 2026 में अमरेली पुलिस को ईमेल के ज़रिए शिकायत दर्ज कराई। विदेश में रहने के कारण उन्हें यह संदेह था कि उनकी शिकायत का त्वरित समाधान हो पाएगा या नहीं। अमरेली के पुलिस अधीक्षक संजय खरात के अनुसार, पैसे पाने वाला व्यक्ति अमरेली का ही निवासी था, इसलिए जॉली ने जिला पुलिस से सीधे संपर्क किया।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई
पुलिस अधीक्षक संजय खरात ने बताया, "जैसे ही हमें ईमेल से उनकी शिकायत मिली, हमने तुरंत जांच शुरू की और उन्हें पूरा सहयोग देने का भरोसा दिलाया। हमारी साइबर क्राइम टीम ने संबंधित बैंक के साथ तालमेल बैठाया, मामले पर लगातार नजर रखी और जांच के दौरान शिकायतकर्ता को जानकारी देती रही।"
अमरेली साइबर क्राइम पुलिस के इंस्पेक्टर कमलेश खटाना ने बताया कि आरोपी पर दबाव बनाया गया और अंततः उसने जुलाई 2026 में पूरी ₹11 लाख की रकम वापस कर दी, जो जॉली के बैंक खाते में जमा करा दी गई।
पीड़ित की प्रतिक्रिया
सौरभ जॉली ने पुलिस अधीक्षक को लिखे पत्र में कहा, "हजारों किलोमीटर दूर होने के बावजूद मुझे कभी ऐसा नहीं लगा कि मैं जांच से अलग-थलग हूं। टीम की तेजी से बातचीत, मेरे सवालों के जवाब देने में धैर्य और व्यवस्थित तरीके से काम करने से मेरा भरोसा बढ़ा।" उन्होंने इस अनुभव को साइबर धोखाधड़ी के खिलाफ प्रभावी पुलिसिंग का उदाहरण बताया।
व्यापक संदर्भ
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने राज्य पुलिस को साइबर धोखाधड़ी के पीड़ितों की मेहनत की कमाई को वापस दिलाने और सुरक्षित करने के लिए हर संभव प्रयास करने के निर्देश दिए हैं। गौरतलब है कि प्रवासी भारतीयों के साथ ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, और यह केस दर्शाता है कि सीमा-पार शिकायतों का भी त्वरित समाधान संभव है।
आगे की राह
अमरेली साइबर क्राइम पुलिस की इस कार्रवाई को राज्य में साइबर अपराध से निपटने की बढ़ती क्षमता के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि बैंकिंग प्रणाली और पुलिस के बीच इस तरह के समन्वय से भविष्य में ऐसे मामलों के समाधान की गति और तेज हो सकती है।