29 अगस्त 2026
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मौलाना खालिद रशीद का स्पष्ट जवाब: भारत में इस्लामिक कानून की मांग बेबुनियाद, संविधान ही सर्वोच्च

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मौलाना खालिद रशीद का स्पष्ट जवाब: भारत में इस्लामिक कानून की मांग बेबुनियाद, संविधान ही सर्वोच्च

सारांश

मुस्लिम समुदाय के भीतर ही तीखी असहमति — इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के चेयरमैन मौलाना खालिद रशीद ने इस्लामिक कानून की मांग को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि संविधान सर्वोच्च है और पर्सनल लॉ भी उसी के दायरे में बंधे हैं।

मुख्य बातें

मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने 29 अगस्त को लखनऊ में भारत में इस्लामिक कानून लागू करने की मांग को स्पष्ट रूप से खारिज किया।
सर्वोच्च न्यायालय के हवाले से कहा — पर्सनल लॉ भी संविधान के दायरे तक ही सीमित हैं।
ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने शुक्रवार को कहा था कि इस्लामिक कानून के बिना रेप और भ्रष्टाचार नहीं रुकेगा।
मौलाना खालिद रशीद ने कहा — अपराध रोकने के लिए कानून पर्याप्त हैं, जरूरत सही शिक्षा और नैतिक परवरिश की है।
यह विवाद भारत में धर्म, पर्सनल लॉ और संवैधानिक सीमाओं की बहस को फिर केंद्र में ले आया है।

इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के चेयरमैन मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने 29 अगस्त को लखनऊ में ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी के उस बयान की कड़ी निंदा की, जिसमें भारत में इस्लामिक कानून लागू करने की मांग की गई थी। मौलाना खालिद रशीद ने साफ कहा कि ऐसे बयानों की इस देश में कोई जगह नहीं है और भारत केवल अपने संविधान के अनुसार ही चलेगा।

मौलाना खालिद रशीद का स्पष्ट रुख

मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने शनिवार को मीडिया से बातचीत में कहा, 'यह मुल्क अपने संविधान के मुताबिक ही चलेगा और अपने मुल्क में हर शख्स को ये हक और इख्तियार हासिल है, आजादी हासिल है कि वो अपने इबादत की हद तक, अपने पर्सनल लॉ की हद तक, अपने मजहबी कानून यानी पर्सनल लॉ पर अमल कर सकता है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट रूप से रेखांकित किया है कि पर्सनल लॉ भी संविधान के दायरे तक ही सीमित हैं।

रेप रोकने के लिए कानून पर्याप्त, तालीम की जरूरत

मौलाना खालिद रशीद ने आगे कहा कि देश में यौन अपराधों को रोकने के लिए पहले से पर्याप्त कानून मौजूद हैं। उनके अनुसार, असली जरूरत यह है कि धार्मिक नेता समाज की बुराइयों को दूर करने पर ध्यान दें। उन्होंने कहा कि जब तक लोगों की सही शिक्षा और नैतिक परवरिश का इंतजाम नहीं होगा, तब तक इस तरह के अपराध होते रहेंगे।

विवाद की जड़: मौलाना साजिद रशीदी का बयान

गौरतलब है कि इस पूरे विवाद की शुरुआत शुक्रवार को हुई, जब ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने कहा था, 'जब तक इस देश में इस्लामिक कानून लागू नहीं होता, तब तक रेप, अपराध, भ्रष्टाचार और ऐसी अन्य चीजों को खत्म नहीं किया जा सकता।' उन्होंने इस्लामिक देशों का हवाला देते हुए दावा किया था कि वहाँ अपराध नहीं होते और लोग खुशहाल जीवन जीते हैं।

व्यापक संदर्भ और सामाजिक प्रभाव

यह ऐसे समय में आया है जब देश में धार्मिक कानूनों और नागरिक संहिता को लेकर बहस तेज है। मौलाना खालिद रशीद जैसे प्रमुख मुस्लिम धर्मगुरु का संविधान के पक्ष में खड़े होना इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है कि मुस्लिम समुदाय के भीतर भी ऐसे बयानों पर एकराय नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की आंतरिक असहमति लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करती है।

आगे क्या

मौलाना साजिद रशीदी के बयान पर अब तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रियाएँ अपेक्षित हैं। यह मामला भारत में धर्म, कानून और संविधान के बीच की सीमारेखा पर एक बार फिर बहस को केंद्र में ले आया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह उस बहस को फिर हवा देता है जिसे भारत का लोकतंत्र दशकों से सुलझाने की कोशिश कर रहा है। उल्लेखनीय यह है कि मुस्लिम समुदाय के भीतर से ही इस तरह के बयान की तत्काल और मुखर आलोचना हुई — यह संकेत देता है कि समुदाय एकरंगी नहीं है। हालांकि, यह सवाल बना रहता है कि क्या धार्मिक नेता अपनी सार्वजनिक भूमिका में संवैधानिक मर्यादाओं के प्रति पर्याप्त सजग हैं। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर विवादित बयान पर केंद्रित रहती है, जबकि उसी समुदाय के भीतर से उठी असहमति की आवाज़ें उतनी जगह नहीं पातीं — यही वह कोण है जो असली तस्वीर दिखाता है।
RashtraPress
29 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मौलाना खालिद रशीद ने इस्लामिक कानून की मांग पर क्या कहा?
मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने स्पष्ट कहा कि भारत अपने संविधान के मुताबिक ही चलेगा और ऐसे बयानों की देश में कोई जगह नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि पर्सनल लॉ भी संविधान के दायरे तक सीमित हैं।
मौलाना साजिद रशीदी ने क्या बयान दिया था जिस पर विवाद हुआ?
ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने शुक्रवार को कहा था कि जब तक भारत में इस्लामिक कानून लागू नहीं होगा, तब तक रेप, अपराध और भ्रष्टाचार नहीं रुकेगा। उन्होंने इस्लामिक देशों का उदाहरण देते हुए दावा किया था कि वहाँ ये समस्याएँ नहीं हैं।
क्या भारत में पर्सनल लॉ संविधान से ऊपर हो सकता है?
नहीं। मौलाना खालिद रशीद ने सर्वोच्च न्यायालय के हवाले से स्पष्ट किया कि पर्सनल लॉ भी संविधान के दायरे तक ही सीमित हैं। भारत में प्रत्येक नागरिक को अपनी इबादत और पर्सनल लॉ पर अमल की आजादी है, लेकिन संविधान सर्वोच्च है।
मौलाना खालिद रशीद कौन हैं?
मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के चेयरमैन हैं और लखनऊ स्थित फिरंगी महल परंपरा से जुड़े एक प्रमुख मुस्लिम धर्मगुरु हैं। वे देश के जाने-माने इस्लामी विद्वानों में गिने जाते हैं।
इस विवाद का समाज पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?
इस विवाद ने भारत में धर्म, पर्सनल लॉ और संवैधानिक सीमाओं की बहस को फिर से केंद्र में ला दिया है। मुस्लिम समुदाय के भीतर से ही असहमति की आवाज़ उठना यह दर्शाता है कि समुदाय में विविध विचार हैं और संवैधानिक मूल्यों के प्रति सजगता मौजूद है।
राष्ट्र प्रेस
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