14 जुलाई 2026
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मौलाना खालिद रशीद का बयान: वक्फ घोटाले के आरोप बेबुनियाद, ज्ञानवापी विवाद बातचीत से सुलझे

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मौलाना खालिद रशीद का बयान: वक्फ घोटाले के आरोप बेबुनियाद, ज्ञानवापी विवाद बातचीत से सुलझे

सारांश

मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने वक्फ घोटाले के आरोपों को तथ्यहीन बताया, ज्ञानवापी विवाद में बातचीत की वकालत की और KGMU मेस में मांसाहार पर रोक को अनुचित करार देते हुए प्रशासन से पुनर्विचार की माँग की।

मुख्य बातें

मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने 14 जुलाई को लखनऊ में वक्फ, ज्ञानवापी और KGMU मेस — तीनों मुद्दों पर बयान दिया।
उन्होंने कहा कि 90 प्रतिशत वक्फ संपत्तियों में मस्जिदें, कब्रिस्तान और दरगाहें हैं, जिनकी खरीद-बिक्री नहीं होती — इसलिए घोटाले के आरोप तथ्यहीन हैं।
ज्ञानवापी विवाद पर उन्होंने आपसी बातचीत और मध्यस्थता का समर्थन किया; सर्वोच्च न्यायालय के संवाद-सुझाव का भी हवाला दिया।
KGMU हॉस्टल मेस में मांसाहार पर रोक को अनुचित बताया और विश्वविद्यालय प्रशासन से निर्णय पर पुनर्विचार की माँग की।
उन्होंने कहा कि चिकित्सा विशेषज्ञ मांसाहारी आहार को कई लोगों के लिए स्वास्थ्यवर्धक मानते हैं।

इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने 14 जुलाई को लखनऊ में तीन अहम मुद्दों पर अपनी स्पष्ट राय रखी — कथित वक्फ जमीन घोटाला, ज्ञानवापी मस्जिद विवाद और किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के हॉस्टल मेस में मांसाहारी भोजन पर लगाई गई रोक। उन्होंने शिया और सुन्नी वक्फ बोर्डों पर लगाए गए करोड़ों रुपये की अनियमितता के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि बिना ठोस साक्ष्य के इस तरह के आरोप लगाना उचित नहीं है।

वक्फ संपत्तियों पर आरोप: मौलाना की सफाई

शिया और सुन्नी वक्फ बोर्ड में करोड़ों रुपये की गड़बड़ी के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए मौलाना खालिद रशीद ने कहा, 'वक्फ मुसलमानों का एक आंतरिक धार्मिक मामला है। वक्फ बोर्ड के अनुसार लगभग 90 प्रतिशत वक्फ संपत्तियों में मस्जिदें, कब्रिस्तान, दरगाहें और इमामबाड़े शामिल हैं।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मस्जिदों और कब्रिस्तानों की खरीद-बिक्री नहीं होती, और दरगाहों के संदर्भ में भी इस प्रकार के आरोप तथ्यहीन हैं।

गौरतलब है कि वक्फ संपत्तियों को लेकर विवाद नया नहीं है — देशभर में वक्फ बोर्डों पर भूमि प्रबंधन में अनियमितता के आरोप समय-समय पर उठते रहे हैं। मौलाना ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा कि 'बिना ठोस साक्ष्यों के इस प्रकार के आरोप लगाना उचित नहीं है।'

ज्ञानवापी विवाद: बातचीत को बताया एकमात्र रास्ता

ज्ञानवापी मस्जिद विवाद पर मौलाना ने संवाद और मध्यस्थता का समर्थन किया। उनके अनुसार, 'यदि दोनों पक्ष आपसी बातचीत और मध्यस्थता के माध्यम से समाधान निकालने का प्रयास करें तो यह सकारात्मक पहल होगी।' उन्होंने यह भी कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने भी बातचीत के ज़रिए समाधान तलाशने का सुझाव दिया है।

मौलाना ने जोर देकर कहा, 'यदि दोनों पक्ष खुले मन और ईमानदारी के साथ संवाद करें तो विवाद का कोई स्वीकार्य समाधान निकल सकता है, जो देश के हित में भी होगा।' उन्होंने यह भी याद दिलाया कि ज्ञानवापी मस्जिद में लंबे समय से धार्मिक गतिविधियाँ होती रही हैं। यह ऐसे समय में आया है जब ज्ञानवापी मामले में अदालती सुनवाइयाँ जारी हैं और दोनों पक्षों के बीच तनाव बना हुआ है।

KGMU मेस में मांसाहार पर रोक: उठाए सवाल

किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के हॉस्टल मेस में मांसाहारी भोजन पर लगाई गई रोक को लेकर मौलाना ने विश्वविद्यालय प्रशासन से पुनर्विचार की माँग की। उन्होंने कहा, 'विभिन्न अध्ययनों के अनुसार भारत की बड़ी आबादी मांसाहारी भोजन का सेवन करती है। ऐसे में किसी शैक्षणिक और चिकित्सा संस्थान में नॉन-वेज भोजन पर प्रतिबंध लगाना उचित नहीं माना जा सकता।'

उन्होंने यह भी तर्क दिया कि चिकित्सा विशेषज्ञ संतुलित और स्वास्थ्यवर्धक मांसाहारी आहार को कई लोगों के लिए लाभकारी मानते हैं। मौलाना के अनुसार, 'KGMU जैसे प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थान में छात्रों की भोजन संबंधी पसंद का सम्मान किया जाना चाहिए।'

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली को देश के प्रमुख इस्लामी धर्मगुरुओं में गिना जाता है और उनके बयानों को मुस्लिम समुदाय में व्यापक महत्व दिया जाता है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब वक्फ संशोधन कानून को लेकर देशभर में बहस तेज है और ज्ञानवापी मामले में कानूनी प्रक्रिया चल रही है। आने वाले दिनों में इन तीनों मुद्दों पर सरकार और न्यायपालिका की भूमिका निर्णायक होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन तीनों पर उनकी प्रतिक्रिया रक्षात्मक है — न कि सुधारवादी। वक्फ बोर्डों में पारदर्शिता की माँग केवल विरोधियों की नहीं, बल्कि समुदाय के भीतर से भी उठती रही है; आरोपों को 'तथ्यहीन' कहना पर्याप्त नहीं, स्वतंत्र ऑडिट का समर्थन अधिक विश्वसनीय होता। ज्ञानवापी पर संवाद की वकालत सकारात्मक है, लेकिन जब तक दोनों पक्षों की कानूनी लड़ाई जारी है, बातचीत की व्यावहारिकता सीमित रहेगी। KGMU मेस विवाद पर उनका तर्क व्यापक सामाजिक सवाल उठाता है — सार्वजनिक संस्थानों में खानपान नीति किसके हित में बनती है।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मौलाना खालिद रशीद ने वक्फ घोटाले के आरोपों पर क्या कहा?
मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने वक्फ बोर्डों में करोड़ों रुपये की गड़बड़ी के आरोपों को तथ्यहीन और निराधार बताया। उनका कहना है कि वक्फ बोर्ड के अनुसार लगभग 90 प्रतिशत वक्फ संपत्तियाँ मस्जिदें, कब्रिस्तान, दरगाहें और इमामबाड़े हैं, जिनकी खरीद-बिक्री नहीं होती, इसलिए बिना ठोस साक्ष्य के ऐसे आरोप उचित नहीं हैं।
ज्ञानवापी विवाद के समाधान पर मौलाना का क्या सुझाव है?
मौलाना ने ज्ञानवापी विवाद के समाधान के लिए आपसी बातचीत और मध्यस्थता को सबसे सकारात्मक रास्ता बताया। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने भी संवाद के ज़रिए समाधान का सुझाव दिया है और यदि दोनों पक्ष खुले मन से बात करें तो देशहित में स्वीकार्य समाधान निकल सकता है।
KGMU हॉस्टल मेस में मांसाहार पर रोक क्यों विवादास्पद है?
किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के हॉस्टल मेस में मांसाहारी भोजन पर लगाई गई रोक को लेकर मौलाना खालिद रशीद ने आपत्ति जताई है। उनका तर्क है कि भारत की बड़ी आबादी मांसाहारी है और एक प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थान में छात्रों की भोजन संबंधी पसंद का सम्मान होना चाहिए।
मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली कौन हैं?
मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के अध्यक्ष हैं और लखनऊ स्थित फिरंगी महल के प्रमुख धर्मगुरु हैं। वे देश के प्रभावशाली सुन्नी इस्लामी विद्वानों में गिने जाते हैं और सामाजिक-धार्मिक मुद्दों पर नियमित रूप से अपनी राय रखते हैं।
क्या सर्वोच्च न्यायालय ने ज्ञानवापी मामले में बातचीत का सुझाव दिया है?
मौलाना खालिद रशीद के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय ने ज्ञानवापी विवाद में बातचीत के ज़रिए समाधान तलाशने का सुझाव दिया है। हालाँकि इस मामले में कानूनी प्रक्रिया भी समानांतर रूप से जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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