मौलाना खालिद रशीद का बयान: वक्फ घोटाले के आरोप बेबुनियाद, ज्ञानवापी विवाद बातचीत से सुलझे
सारांश
मुख्य बातें
इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने 14 जुलाई को लखनऊ में तीन अहम मुद्दों पर अपनी स्पष्ट राय रखी — कथित वक्फ जमीन घोटाला, ज्ञानवापी मस्जिद विवाद और किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के हॉस्टल मेस में मांसाहारी भोजन पर लगाई गई रोक। उन्होंने शिया और सुन्नी वक्फ बोर्डों पर लगाए गए करोड़ों रुपये की अनियमितता के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि बिना ठोस साक्ष्य के इस तरह के आरोप लगाना उचित नहीं है।
वक्फ संपत्तियों पर आरोप: मौलाना की सफाई
शिया और सुन्नी वक्फ बोर्ड में करोड़ों रुपये की गड़बड़ी के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए मौलाना खालिद रशीद ने कहा, 'वक्फ मुसलमानों का एक आंतरिक धार्मिक मामला है। वक्फ बोर्ड के अनुसार लगभग 90 प्रतिशत वक्फ संपत्तियों में मस्जिदें, कब्रिस्तान, दरगाहें और इमामबाड़े शामिल हैं।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मस्जिदों और कब्रिस्तानों की खरीद-बिक्री नहीं होती, और दरगाहों के संदर्भ में भी इस प्रकार के आरोप तथ्यहीन हैं।
गौरतलब है कि वक्फ संपत्तियों को लेकर विवाद नया नहीं है — देशभर में वक्फ बोर्डों पर भूमि प्रबंधन में अनियमितता के आरोप समय-समय पर उठते रहे हैं। मौलाना ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा कि 'बिना ठोस साक्ष्यों के इस प्रकार के आरोप लगाना उचित नहीं है।'
ज्ञानवापी विवाद: बातचीत को बताया एकमात्र रास्ता
ज्ञानवापी मस्जिद विवाद पर मौलाना ने संवाद और मध्यस्थता का समर्थन किया। उनके अनुसार, 'यदि दोनों पक्ष आपसी बातचीत और मध्यस्थता के माध्यम से समाधान निकालने का प्रयास करें तो यह सकारात्मक पहल होगी।' उन्होंने यह भी कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने भी बातचीत के ज़रिए समाधान तलाशने का सुझाव दिया है।
मौलाना ने जोर देकर कहा, 'यदि दोनों पक्ष खुले मन और ईमानदारी के साथ संवाद करें तो विवाद का कोई स्वीकार्य समाधान निकल सकता है, जो देश के हित में भी होगा।' उन्होंने यह भी याद दिलाया कि ज्ञानवापी मस्जिद में लंबे समय से धार्मिक गतिविधियाँ होती रही हैं। यह ऐसे समय में आया है जब ज्ञानवापी मामले में अदालती सुनवाइयाँ जारी हैं और दोनों पक्षों के बीच तनाव बना हुआ है।
KGMU मेस में मांसाहार पर रोक: उठाए सवाल
किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के हॉस्टल मेस में मांसाहारी भोजन पर लगाई गई रोक को लेकर मौलाना ने विश्वविद्यालय प्रशासन से पुनर्विचार की माँग की। उन्होंने कहा, 'विभिन्न अध्ययनों के अनुसार भारत की बड़ी आबादी मांसाहारी भोजन का सेवन करती है। ऐसे में किसी शैक्षणिक और चिकित्सा संस्थान में नॉन-वेज भोजन पर प्रतिबंध लगाना उचित नहीं माना जा सकता।'
उन्होंने यह भी तर्क दिया कि चिकित्सा विशेषज्ञ संतुलित और स्वास्थ्यवर्धक मांसाहारी आहार को कई लोगों के लिए लाभकारी मानते हैं। मौलाना के अनुसार, 'KGMU जैसे प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थान में छात्रों की भोजन संबंधी पसंद का सम्मान किया जाना चाहिए।'
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली को देश के प्रमुख इस्लामी धर्मगुरुओं में गिना जाता है और उनके बयानों को मुस्लिम समुदाय में व्यापक महत्व दिया जाता है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब वक्फ संशोधन कानून को लेकर देशभर में बहस तेज है और ज्ञानवापी मामले में कानूनी प्रक्रिया चल रही है। आने वाले दिनों में इन तीनों मुद्दों पर सरकार और न्यायपालिका की भूमिका निर्णायक होगी।