वक्फ संपत्ति मुसलमानों की मिल्कियत, सरकार की नहीं — MP वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों पर जमीयत का तीखा विरोध
सारांश
मुख्य बातें
जमीयत उलेमा-ए-हिंद मध्य प्रदेश के अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती मोहम्मद अहमद खान ने मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम शख्सियतों की नियुक्ति पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने 10 जुलाई 2026 को भोपाल में स्पष्ट कहा कि वक्फ की संपत्तियाँ मुसलमानों की मिल्कियत हैं, न कि सरकार की, और इस निर्णय का विरोध पूरे देश में होना चाहिए। मामला फिलहाल सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है।
क्या है विवाद का केंद्र
मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य वक्फ बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल किया है, जिसे मुस्लिम धार्मिक संगठनों ने धार्मिक स्वायत्तता पर अतिक्रमण बताया है। मौलाना खान ने कहा कि वक्फ की संपत्तियाँ — मस्जिदें, मदरसे, कब्रिस्तान — सीधे मुस्लिम समुदाय की आस्था और इबादत से जुड़ी हैं। उनका तर्क है कि इन संस्थाओं के प्रशासन में किसी गैर-मुस्लिम की भागीदारी धार्मिक मामलों में अनुचित हस्तक्षेप है।
जमीयत के मुख्य तर्क
मौलाना खान ने कहा, 'वक्फ की चीजें मुसलमानों की मिल्कियत हैं, ये सरकार की चीजें नहीं हैं। ये सब चीजें मुसलमानों के लिए हैं, जिससे उनका फायदा मुसलमानों को मिले।' उन्होंने यह भी तर्क दिया कि यदि सरकार वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्य शामिल कर सकती है, तो समानता के आधार पर अन्य धार्मिक संस्थाओं में भी मुसलमानों को प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
उन्होंने चेतावनी दी कि बोर्ड में प्रवेश के बाद गैर-मुस्लिम सदस्य धीरे-धीरे मस्जिदों और कब्रिस्तानों के आंतरिक मामलों में दखल दे सकते हैं। उनके अनुसार, 'आज बोर्ड में शामिल हो जाएंगे और कल किसी और चीज में दखल देना शुरू कर देंगे।'
पारदर्शिता के दावे पर सवाल
सरकार की ओर से यह तर्क दिया जाता रहा है कि बोर्ड में विविध सदस्यता से पारदर्शिता बढ़ेगी। मौलाना खान ने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि इससे 'पारदर्शिता नहीं, बल्कि खराबी आएगी।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति पर आपत्ति नहीं है, बल्कि किसी सामान्य गैर-मुस्लिम नागरिक को बोर्ड में स्थान देने पर उनका विरोध है।
कानूनी लड़ाई और आगे की राह
मौलाना खान ने बताया कि यह मामला अभी सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है और सुनवाई होनी बाकी है। जमीयत ने घोषणा की है कि वह इस निर्णय के विरुद्ध शीर्ष अदालत में पूरी ताकत से लड़ाई लड़ेगी। उन्होंने देशभर के उलेमाओं से आह्वान किया कि वे इस मुद्दे पर एकजुट होकर आवाज उठाएँ, अन्यथा यह आगे चलकर बड़ी समस्या बन सकती है।
गौरतलब है कि वक्फ (संशोधन) अधिनियम को लेकर पहले से ही देशभर में मुस्लिम संगठनों का विरोध जारी है, और मध्य प्रदेश का यह घटनाक्रम उसी व्यापक विवाद का हिस्सा है। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र और राज्य सरकारें वक्फ संपत्तियों के प्रशासन में बदलाव की दिशा में कदम उठा रही हैं।