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मध्य प्रदेश बना वक्फ कानून लागू करने वाला पहला राज्य, सांवर पटेल बोले — माफियाओं का कब्जा हटेगा, गरीब मुस्लिमों को मिलेगा लाभ

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मध्य प्रदेश बना वक्फ कानून लागू करने वाला पहला राज्य, सांवर पटेल बोले — माफियाओं का कब्जा हटेगा, गरीब मुस्लिमों को मिलेगा लाभ

सारांश

मध्य प्रदेश संशोधित वक्फ कानून लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया। वक्फ बोर्ड चेयरमैन सांवर पटेल ने साफ कहा — माफियाओं का कब्जा हटेगा, संपत्तियों की आय गरीब मुस्लिम बच्चों पर खर्च होगी। 10 सदस्यीय बोर्ड में चार महिलाएं और दो गैर-मुस्लिम विशेषज्ञ शामिल किए गए हैं।

मुख्य बातें

मध्य प्रदेश संशोधित वक्फ कानून लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।
10 सदस्यीय वक्फ बोर्ड में चार महिलाएं शामिल — कानूनी अनिवार्यता से दोगुनी।
बोर्ड में विशेषज्ञ के रूप में दो गैर-मुस्लिम (हिंदू) सदस्य भी नियुक्त।
चेयरमैन सांवर पटेल ने कहा — वक्फ माफियाओं का अवैध कब्जा हटाकर आय गरीब मुस्लिम बच्चों के कल्याण पर खर्च की जाएगी।
मंत्री विश्वास सारंग ने कांग्रेस के विरोध को तुष्टीकरण की राजनीति करार दिया।

मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है जिसने संशोधित वक्फ कानून को लागू किया है। मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड के चेयरमैन सांवर पटेल ने 6 जुलाई को कहा कि इस कानून का मूल उद्देश्य वक्फ संपत्तियों को अवैध कब्जों से मुक्त करना, बोर्ड के कामकाज में पारदर्शिता लाना और वक्फ की आय को सीधे गरीब मुस्लिम समुदाय के कल्याण पर खर्च करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वक्फ माफियाओं द्वारा वर्षों से हड़पी गई संपत्तियों को वापस लेकर उनका उपयोग जनकल्याण के लिए किया जाएगा।

कानून का मकसद और बोर्ड की नई संरचना

सांवर पटेल ने बताया कि संशोधित वक्फ कानून के तहत 10 सदस्यीय वक्फ बोर्ड में चार महिलाएं शामिल की गई हैं, जबकि कानून में केवल दो महिलाओं की अनिवार्यता थी। मुख्यमंत्री मोहन यादव की पहल पर यह अतिरिक्त प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया गया। इसके अलावा, कानून की अनिवार्यता के अनुसार बोर्ड में विशेषज्ञ के रूप में दो गैर-मुस्लिम — जो हिंदू हैं — को भी शामिल किया गया है।

उन्होंने कहा कि यह कानून जगदंबिका पाल के नेतृत्व में गठित संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की व्यापक जन-परामर्श प्रक्रिया और लोकसभा तथा राज्यसभा में विस्तृत बहस के बाद अस्तित्व में आया।

वक्फ माफियाओं पर कार्रवाई का संकल्प

सांवर पटेल ने कहा कि वक्फ संपत्तियाँ दानदाताओं की धरोहर हैं और उन्हें उनके मूल उद्देश्य — जनकल्याण एवं परोपकार — के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, वक्फ माफियाओं ने सालों से इन संपत्तियों पर अवैध कब्जा कर रखा है और उनसे निजी लाभ उठाया है। उन्होंने कहा, 'वक्फ संपत्तियों से लोगों की जेब भरने का काम बंद करेंगे।' अब इन संपत्तियों से होने वाली आय को गरीब और जरूरतमंद मुस्लिम बच्चों की शिक्षा व कल्याण पर खर्च किया जाएगा।

विरोध पर पटेल और सारंग का पलटवार

बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति के विरोध पर सांवर पटेल ने कहा कि ऐसे लोग कानून और संविधान को नहीं मान रहे। उन्होंने कहा, 'संविधान सिर्फ जेब में लेकर चलने की वस्तु नहीं है, उस पर अमल भी करना होगा।' उन्होंने आरोप लगाया कि जनता को भड़काने वाले लोगों ने देश पर लंबे समय तक शासन किया है।

मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि मध्य प्रदेश का यह कदम ऐतिहासिक है और आने वाले समय में इसके दूरगामी परिणाम देखने को मिलेंगे। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) पर निशाना साधते हुए कहा कि कानून का विरोध तुष्टीकरण की राजनीति से प्रेरित है। उनके अनुसार, 'यह मस्जिद या मुस्लिम समुदाय से जुड़ा विषय नहीं, बल्कि वक्फ संस्था के सुशासन का मामला है।'

पीएम मोदी का विज़न और आगे की राह

सांवर पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चाहते हैं कि मुस्लिम बच्चों के एक हाथ में कुरान और दूसरे में कंप्यूटर हो। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव को धन्यवाद दिया कि उनके नेतृत्व में मध्य प्रदेश ने 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास' की भावना को व्यवहार में उतारा। यह ऐसे समय में आया है जब कई राज्य अभी भी इस कानून को लागू करने की प्रक्रिया में हैं, और मध्य प्रदेश का यह कदम अन्य राज्यों के लिए एक मिसाल बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा अब शुरू होती है — वक्फ संपत्तियों पर दशकों पुराने कब्जों को हटाना कानूनी और प्रशासनिक दोनों मोर्चों पर जटिल प्रक्रिया है। बोर्ड में महिलाओं और गैर-मुस्लिम विशेषज्ञों की नियुक्ति संरचनात्मक सुधार की दिशा में सकारात्मक कदम है, पर आलोचकों का यह सवाल वाजिब है कि क्या इन संपत्तियों की आय वास्तव में जरूरतमंद मुस्लिम समुदाय तक पहुंचेगी या यह भी कागजों तक सीमित रहेगी। राजनीतिक विमर्श में 'वक्फ माफिया' बनाम 'तुष्टीकरण' की यह बहस जमीनी सुधार की जगह ध्यान भटका सकती है — जबकि जरूरत पारदर्शी आय-वितरण तंत्र और स्वतंत्र ऑडिट की है।
RashtraPress
6 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मध्य प्रदेश में संशोधित वक्फ कानून क्या है और यह कब लागू हुआ?
मध्य प्रदेश 6 जुलाई 2026 को संशोधित वक्फ कानून लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना। यह कानून वक्फ संपत्तियों को अवैध कब्जों से मुक्त करने, बोर्ड में महिलाओं व गैर-मुस्लिम विशेषज्ञों को शामिल करने और वक्फ की आय को मुस्लिम समुदाय के कल्याण पर खर्च करने का प्रावधान करता है।
वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों को क्यों शामिल किया गया?
संशोधित वक्फ कानून में विशेषज्ञ के रूप में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों को बोर्ड में शामिल करना अनिवार्य किया गया है। मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड के चेयरमैन सांवर पटेल के अनुसार यह कानूनी प्रावधान है और इसका विरोध करना संविधान की अवहेलना है।
वक्फ माफियाओं से संपत्तियाँ कैसे वापस ली जाएंगी?
सांवर पटेल के अनुसार नए कानून के तहत अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और संपत्तियाँ वापस ली जाएंगी। इन संपत्तियों से होने वाली आय को गरीब और जरूरतमंद मुस्लिम बच्चों की शिक्षा व कल्याण पर खर्च किया जाएगा।
कांग्रेस इस कानून का विरोध क्यों कर रही है?
मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि कांग्रेस का विरोध तुष्टीकरण की राजनीति से प्रेरित है। उनके अनुसार यह कानून मस्जिद या मुस्लिम समुदाय से नहीं, बल्कि वक्फ संस्था के सुशासन से जुड़ा है और इसका विरोध संविधान-विरोधी है।
मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड की नई संरचना क्या है?
नए कानून के तहत गठित 10 सदस्यीय वक्फ बोर्ड में चार महिलाएं और दो गैर-मुस्लिम विशेषज्ञ शामिल हैं। कानून में न्यूनतम दो महिलाओं की अनिवार्यता थी, लेकिन मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसे दोगुना कर चार महिलाओं को बोर्ड में स्थान दिया।
राष्ट्र प्रेस
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