क्या मनोज जरांगे ने मराठा समाज के आरक्षण के लिए मुंबई में प्रदर्शन करने का ऐलान किया?

सारांश
Key Takeaways
- मनोज जरांगे ने आरक्षण की मांग को लेकर मुंबई जाने का ऐलान किया।
- उनका कहना है कि जब तक आरक्षण नहीं मिलता, वे वापस नहीं लौटेंगे।
- सरकार को मराठा समाज के अधिकारों का सम्मान करना चाहिए।
मुंबई, २५ अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। महाराष्ट्र के जालना जिले के अंतरवाली सारथी धरना स्थल पर सोमवार को मराठा समाज के कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया। इस अवसर पर उन्होंने सरकार को स्पष्ट संदेश दिया कि जब तक मराठा समाज को आरक्षण नहीं मिलता, वे मुंबई से वापस नहीं लौटेंगे।
उन्होंने कहा कि वे २७ अगस्त को मराठा आरक्षण की मांग लेकर लाखों मराठा समाज बंधुओं के साथ मुंबई जाने वाले थे, लेकिन अब उनकी मांग में बदलाव आया है। अब वे ओबीसी आरक्षण की मांग लेकर मुंबई की राह पकड़ेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह संघर्ष इस बार आरक्षण लेकर ही समाप्त होगा।
मनोज जरांगे पाटिल ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को चेतावनी दी कि मराठा समाज के साथ अन्याय बंद होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री एक व्यक्ति की बात सुनकर मराठा समाज के खिलाफ गलत निर्णय ले रहे हैं, जो स्वीकार्य नहीं है।
इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उनके खिलाफ गलत प्रचार किया जा रहा है कि उन्होंने मुख्यमंत्री की मां के बारे में गलत बातें कही हैं।
मनोज जरांगे ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "मैंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मां के बारे में कुछ भी नहीं कहा है। अगर मैंने कहीं ऐसा कहा हो, तो मैं अपने शब्द वापस लेता हूं। मैं कभी किसी की मां-बहन के बारे में बयान नहीं देता। जब हमारी बहनों का खून बहाया जाता है, उन्हें लात-घूंसों से मारा जाता है, तो क्या हमें चुप रहना चाहिए?"
उन्होंने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए पूछा कि जब उनकी बहनें धरने पर खून बहा रही थीं और उनकी मां-बहनों को पीटा जा रहा था, तो क्या उस वक्त वे लोग नहीं थे? अगर वे उनके खिलाफ हैं, तो क्या मराठा समाज में कोई भी खड़ा नहीं हो सकता?
मनोज जरांगे ने कहा कि मराठा समाज के लिए यह लड़ाई एक अहम मुद्दा है और वे इसे जीतकर ही लौटेंगे। लाखों मराठा समाज बंधु उनके साथ हैं और वे मुंबई जाकर अपनी मांगों को मजबूती से उठाएंगे।
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मनोज जरांगे ने सरकार को भी इशारा दिया कि वे उनके पक्ष में फैसले करें और मराठा समाज के अधिकारों का सम्मान करें। अगर सरकार ने उनकी मांगों को अनसुना किया, तो वे अपनी लड़ाई और तेज करेंगे।