राष्ट्रपति मुर्मु का MSU दीक्षांत समारोह में संदेश: 'एआई सवाल नहीं पूछ सकता, यह ज़िम्मेदारी आपकी है'
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 23 सितंबर 2026 को वडोदरा में महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी ऑफ बड़ौदा के 75वें दीक्षांत समारोह में उच्च शिक्षा में बहु-विषयक (मल्टी-डिसिप्लिनरी) दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जलवायु परिवर्तन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), गरीबी उन्मूलन और लोकतंत्र जैसी समकालीन चुनौतियों का समाधान किसी एक अकादमिक क्षेत्र की सीमाओं में बंधकर नहीं किया जा सकता। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई जब राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत भारत में उच्च शिक्षा संस्थानों में बहु-विषयक ढाँचे को लागू करने की प्रक्रिया तेज़ हो रही है।
मुख्य संदेश: एआई और प्रौद्योगिकी की सीमाएँ
राष्ट्रपति मुर्मु ने छात्रों को सीधे संबोधित करते हुए कहा, 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समाधान दे सकती है, लेकिन सही सवाल पूछना आपकी ज़िम्मेदारी होनी चाहिए। टेक्नोलॉजी रफ्तार तो दे सकती है, लेकिन इसका इस्तेमाल किस दिशा में किया जाए, यह तय करना छात्रों का काम है।' यह वक्तव्य तकनीकी शिक्षा और मानवीय विवेक के बीच संतुलन की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
उन्होंने छात्रों से प्रौद्योगिकी की क्षमताओं को मानवीय मूल्यों और संवैधानिक सिद्धांतों के साथ जोड़ने का आग्रह किया। उनके अनुसार, पढ़े-लिखे नागरिकों से यह अपेक्षा रहती है कि वे संविधान में निहित 'न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व' के आदर्शों को अपने व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन में आत्मसात करें।
बहु-विषयक शिक्षा की ज़रूरत क्यों
राष्ट्रपति ने समकालीन समस्याओं की परस्पर-निर्भर प्रकृति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 'क्लाइमेट चेंज सिर्फ एनवायरनमेंटल स्टडीज का विषय नहीं है। एआई सिर्फ कंप्यूटर साइंस का विषय नहीं है। स्वास्थ्य सिर्फ चिकित्सा विज्ञान का विषय नहीं है। गरीबी दूर करना सिर्फ अर्थशास्त्री का विषय नहीं है। लोकतंत्र सिर्फ राजनीति विज्ञान का विषय नहीं है।' उन्होंने कहा कि आज सभी ज़रूरी समस्याओं के समाधान के लिए मल्टीडिसिप्लिनरी नज़रिए की अनिवार्यता है।
मुर्मु ने छात्रों को व्यापक दृष्टि विकसित करने की सलाह देते हुए कहा, 'हमें एक वैज्ञानिक जैसी जिज्ञासा, एक कलाकार जैसी संवेदनशीलता, एक इतिहासकार जैसा नज़रिया, अर्थशास्त्र की समझ और समाजशास्त्र की चेतना की ज़रूरत है।' यह वक्तव्य स्नातक होने वाले छात्रों के लिए एक व्यापक बौद्धिक रोडमैप की तरह था।
महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी की विशिष्टता
राष्ट्रपति ने महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी ऑफ बड़ौदा की बहु-विषयक संरचना की सराहना की। विश्वविद्यालय में आर्ट्स, साइंस, शिक्षा एवं मनोविज्ञान, वाणिज्य, प्रौद्योगिकी एवं अभियांत्रिकी, चिकित्सा, विधि, ललित कला, परिवार एवं सामुदायिक विज्ञान, सामाजिक कार्य, प्रदर्शन कला, प्रबंधन अध्ययन, पत्रकारिता एवं संचार तथा फार्मेसी जैसे अनेक विभाग हैं।
उन्होंने कहा कि यह विश्वविद्यालय ज्ञान की अलग-अलग धाराओं को एक साथ लाने की विशिष्ट स्थिति में है, और इसी क्षमता का उपयोग छात्रों को अंतर-अनुशासनात्मक दक्षता प्रदान करने में किया जाना चाहिए।
दीक्षांत समारोह में डिग्री वितरण
इस 75वें दीक्षांत समारोह में कुल 12,606 उम्मीदवारों को उपाधियाँ प्रदान की गईं। इनमें 229 उम्मीदवार डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (पीएचडी), 2,857 मास्टर डिग्री, 8,863 बैचलर डिग्री और 657 पोस्टग्रेजुएट डिप्लोमा के लिए योग्य घोषित किए गए।
गौरतलब है कि यह आयोजन ऐसे समय में हुआ जब देशभर के विश्वविद्यालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत पाठ्यक्रम पुनर्गठन की प्रक्रिया में हैं, और बहु-विषयक शिक्षा को उसका केंद्रीय स्तंभ बनाया जा रहा है। राष्ट्रपति का यह संबोधन उस नीतिगत दिशा को नैतिक और बौद्धिक आधार प्रदान करता है।