16 जुलाई 2026
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बिहार में एआई क्रांति: सर्वम एआई-भारत जीपीटी से MoU, हिंदी-भोजपुरी में मिलेंगी सरकारी सेवाएँ

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बिहार में एआई क्रांति: सर्वम एआई-भारत जीपीटी से MoU, हिंदी-भोजपुरी में मिलेंगी सरकारी सेवाएँ

सारांश

बिहार ने एआई सुशासन की दिशा में बड़ा दांव खेला है — सर्वम एआई-भारत जीपीटी के साथ MoU, IIT पटना के साथ एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, और हिंदी-भोजपुरी-मैथिली में नागरिक सेवाएँ। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी इसे 'विकसित बिहार 2047' की बुनियाद बता रहे हैं।

मुख्य बातें

बिहार सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग और सर्वम एआई-भारत जीपीटी के बीच 16 जुलाई 2025 को समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर हुए।
हिंदी, मैथिली, भोजपुरी और मगही में एआई आधारित नागरिक सेवाएँ — शिकायत निवारण, वर्चुअल असिस्टेंट, सरकारी योजनाओं की जानकारी — उपलब्ध कराई जाएँगी।
आईआईटी पटना के सहयोग से एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस , रिसर्च पार्क और इन्क्यूबेशन सेंटर स्थापित किए जाएँगे।
शिक्षा, कृषि और स्वास्थ्य क्षेत्रों में स्थानीय भाषा में एआई सहायता का विस्तार होगा, विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में।
बिहार पहले ही आईटी नीति-2024 , बिहार जीसीसी नीति-2026 और एआई-फर्स्ट गवर्नेंस मॉडल लागू कर चुका है।

बिहार सरकार ने 16 जुलाई 2025 को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित सुशासन की दिशा में एक निर्णायक कदम उठाते हुए राज्य के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग और सर्वम एआई-भारत जीपीटी के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस साझेदारी की घोषणा करते हुए कहा कि इससे राज्य में एआई आधारित तकनीकों का विकास, अनुसंधान और जनसेवाओं की डिलीवरी को नई गति मिलेगी।

मुख्य घटनाक्रम

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए बताया कि बिहार पहले ही आईटी नीति-2024, बिहार जीसीसी नीति-2026 और एआई-फर्स्ट गवर्नेंस मॉडल के माध्यम से डिजिटल अवसंरचना की मज़बूत नींव तैयार कर चुका है। यह नई साझेदारी उसी ढाँचे को आगे विस्तार देती है।

उन्होंने यह भी बताया कि आईआईटी पटना के सहयोग से एक एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना, रिसर्च पार्क और इन्क्यूबेशन सेंटर के विस्तार तथा बिहार की एआई नीति को अंतिम रूप देने की दिशा में तेज़ी से काम किया जा रहा है।

नागरिकों को क्या मिलेगा

इस समझौते के तहत नागरिकों को उनकी अपनी भाषा में एआई आधारित सेवाएँ उपलब्ध कराई जाएँगी। हिंदी, मैथिली, भोजपुरी और मगही सहित भारतीय भाषाओं में प्रशिक्षित एआई मॉडल के ज़रिए शिकायत निवारण, सरकारी योजनाओं की जानकारी, वर्चुअल असिस्टेंट और अन्य डिजिटल नागरिक सेवाएँ अधिक सरल और सुलभ बनेंगी।

सरकार के अनुसार, शिक्षा क्षेत्र में विद्यार्थियों को स्थानीय भाषा में व्यक्तिगत अध्ययन सामग्री और एआई आधारित शिक्षण सहायता मिलेगी। कृषि क्षेत्र में किसानों को मौसम, फसल, मंडी भाव और सरकारी योजनाओं से जुड़ी जानकारी उनकी अपनी भाषा में उपलब्ध होगी।

स्वास्थ्य और ग्रामीण क्षेत्रों पर असर

स्वास्थ्य क्षेत्र में दूरदराज के इलाकों तक एआई आधारित प्रारंभिक स्वास्थ्य परामर्श और जागरूकता सेवाओं का विस्तार किया जाएगा। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

गौरतलब है कि यह पहल उन राज्यों की बढ़ती सूची में बिहार को शामिल करती है जो केंद्रीय एआई मिशन के समानांतर अपनी स्वतंत्र एआई रणनीति विकसित कर रहे हैं।

निवेश और स्टार्टअप इकोसिस्टम

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि यह साझेदारी बिहार में वैश्विक तकनीकी निवेश, स्टार्टअप इकोसिस्टम और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) के विस्तार को भी नई गति देगी। उन्होंने विश्वास जताया कि यह पहल 'विकसित बिहार' और 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी।

आगे की राह

बिहार की एआई नीति को अंतिम रूप दिए जाने की प्रक्रिया जारी है और आईआईटी पटना के साथ एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की समयसीमा अभी घोषित नहीं की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल की सफलता क्रियान्वयन की गति और स्थानीय भाषाओं में एआई मॉडल की गुणवत्ता पर निर्भर करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन में है। भोजपुरी और मगही जैसी भाषाओं में एआई मॉडल की गुणवत्ता अभी भी एक अनसुलझी तकनीकी चुनौती है — घोषणा और डिलीवरी के बीच की खाई अक्सर बड़ी होती है। गौरतलब है कि बिहार की आईटी नीति-2024 के बाद भी राज्य में तकनीकी निवेश और स्टार्टअप इकोसिस्टम अपेक्षित रफ़्तार से नहीं बढ़ा। इस पहल की विश्वसनीयता तब बनेगी जब एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की ठोस समयसीमा और नागरिक सेवाओं के मापन-योग्य संकेतक सार्वजनिक किए जाएँ।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार और सर्वम एआई-भारत जीपीटी के बीच MoU क्या है?
यह बिहार सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग और सर्वम एआई-भारत जीपीटी के बीच 16 जुलाई 2025 को हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन है, जिसका उद्देश्य राज्य में एआई आधारित सुशासन, डिजिटल नागरिक सेवाएँ और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देना है।
इस समझौते से बिहार के नागरिकों को क्या फायदा होगा?
नागरिकों को हिंदी, मैथिली, भोजपुरी और मगही में एआई आधारित सेवाएँ मिलेंगी — जिनमें शिकायत निवारण, सरकारी योजनाओं की जानकारी और वर्चुअल असिस्टेंट शामिल हैं। शिक्षा, कृषि और स्वास्थ्य क्षेत्रों में भी स्थानीय भाषा में सहायता उपलब्ध होगी।
बिहार में एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस कहाँ और किसके साथ बनेगा?
एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस आईआईटी पटना के सहयोग से स्थापित किया जाएगा। इसके साथ ही रिसर्च पार्क और इन्क्यूबेशन सेंटर का भी विस्तार किया जाएगा, हालाँकि स्थापना की ठोस समयसीमा अभी घोषित नहीं की गई है।
बिहार की एआई नीति की वर्तमान स्थिति क्या है?
बिहार पहले ही आईटी नीति-2024, बिहार जीसीसी नीति-2026 और एआई-फर्स्ट गवर्नेंस मॉडल लागू कर चुका है। राज्य की एआई नीति को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया अभी जारी है।
यह पहल 'विकसित बिहार' और 'विकसित भारत 2047' से कैसे जुड़ी है?
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के अनुसार, यह साझेदारी वैश्विक तकनीकी निवेश, स्टार्टअप इकोसिस्टम और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर के विस्तार को गति देगी, जो 'विकसित बिहार' और केंद्र सरकार के 'विकसित भारत 2047' के दीर्घकालिक लक्ष्यों के अनुरूप है।
राष्ट्र प्रेस
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