बिहार में एआई क्रांति: सर्वम एआई-भारत जीपीटी से MoU, हिंदी-भोजपुरी में मिलेंगी सरकारी सेवाएँ
सारांश
मुख्य बातें
बिहार सरकार ने 16 जुलाई 2025 को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित सुशासन की दिशा में एक निर्णायक कदम उठाते हुए राज्य के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग और सर्वम एआई-भारत जीपीटी के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस साझेदारी की घोषणा करते हुए कहा कि इससे राज्य में एआई आधारित तकनीकों का विकास, अनुसंधान और जनसेवाओं की डिलीवरी को नई गति मिलेगी।
मुख्य घटनाक्रम
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए बताया कि बिहार पहले ही आईटी नीति-2024, बिहार जीसीसी नीति-2026 और एआई-फर्स्ट गवर्नेंस मॉडल के माध्यम से डिजिटल अवसंरचना की मज़बूत नींव तैयार कर चुका है। यह नई साझेदारी उसी ढाँचे को आगे विस्तार देती है।
उन्होंने यह भी बताया कि आईआईटी पटना के सहयोग से एक एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना, रिसर्च पार्क और इन्क्यूबेशन सेंटर के विस्तार तथा बिहार की एआई नीति को अंतिम रूप देने की दिशा में तेज़ी से काम किया जा रहा है।
नागरिकों को क्या मिलेगा
इस समझौते के तहत नागरिकों को उनकी अपनी भाषा में एआई आधारित सेवाएँ उपलब्ध कराई जाएँगी। हिंदी, मैथिली, भोजपुरी और मगही सहित भारतीय भाषाओं में प्रशिक्षित एआई मॉडल के ज़रिए शिकायत निवारण, सरकारी योजनाओं की जानकारी, वर्चुअल असिस्टेंट और अन्य डिजिटल नागरिक सेवाएँ अधिक सरल और सुलभ बनेंगी।
सरकार के अनुसार, शिक्षा क्षेत्र में विद्यार्थियों को स्थानीय भाषा में व्यक्तिगत अध्ययन सामग्री और एआई आधारित शिक्षण सहायता मिलेगी। कृषि क्षेत्र में किसानों को मौसम, फसल, मंडी भाव और सरकारी योजनाओं से जुड़ी जानकारी उनकी अपनी भाषा में उपलब्ध होगी।
स्वास्थ्य और ग्रामीण क्षेत्रों पर असर
स्वास्थ्य क्षेत्र में दूरदराज के इलाकों तक एआई आधारित प्रारंभिक स्वास्थ्य परामर्श और जागरूकता सेवाओं का विस्तार किया जाएगा। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
गौरतलब है कि यह पहल उन राज्यों की बढ़ती सूची में बिहार को शामिल करती है जो केंद्रीय एआई मिशन के समानांतर अपनी स्वतंत्र एआई रणनीति विकसित कर रहे हैं।
निवेश और स्टार्टअप इकोसिस्टम
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि यह साझेदारी बिहार में वैश्विक तकनीकी निवेश, स्टार्टअप इकोसिस्टम और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) के विस्तार को भी नई गति देगी। उन्होंने विश्वास जताया कि यह पहल 'विकसित बिहार' और 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी।
आगे की राह
बिहार की एआई नीति को अंतिम रूप दिए जाने की प्रक्रिया जारी है और आईआईटी पटना के साथ एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की समयसीमा अभी घोषित नहीं की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल की सफलता क्रियान्वयन की गति और स्थानीय भाषाओं में एआई मॉडल की गुणवत्ता पर निर्भर करेगी।