12 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

13 अगस्त 2026 पंचांग: सावन शुक्ल प्रतिपदा पर गुरुवार का दुर्लभ संयोग, जानें शिव-विष्णु पूजा का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
13 अगस्त 2026 पंचांग: सावन शुक्ल प्रतिपदा पर गुरुवार का दुर्लभ संयोग, जानें शिव-विष्णु पूजा का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त

सारांश

13 अगस्त 2026 को सावन शुक्ल प्रतिपदा और गुरुवार का दुर्लभ मेल शिव-विष्णु की एकसाथ आराधना का अवसर दे रहा है। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:59 से दोपहर 12:52 बजे तक सर्वश्रेष्ठ है, जबकि राहुकाल दोपहर 2:05 से 3:44 बजे तक रहेगा।

मुख्य बातें

13 अगस्त 2026 को सावन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि रात 8 बजकर 41 मिनट तक रहेगी।
अभिजीत मुहूर्त — शिव-विष्णु पूजा के लिए सर्वोत्तम — सुबह 11:59 से दोपहर 12:52 बजे तक।
राहुकाल दोपहर 2:05 से 3:44 बजे तक; इस दौरान शुभ कार्य वर्जित।
अश्लेषा नक्षत्र सुबह 6:06 बजे तक, उसके बाद मघा नक्षत्र ; वरीयान योग दोपहर 12:16 बजे तक।
दिशा शूल दक्षिण दिशा में — उस दिशा में यात्रा से बचने की सलाह।

सावन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि और गुरुवार का दुर्लभ संयोग 13 अगस्त 2026 को बन रहा है। पंचांग के अनुसार, यह तिथि भगवान शिव और भगवान विष्णु — दोनों की एक साथ आराधना के लिए विशेष रूप से फलदायी मानी जाती है, क्योंकि सावन शिव को समर्पित है और गुरुवार विष्णु तथा देवगुरु बृहस्पति की उपासना का दिन है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सच्चे मन से पूजा-पाठ करने से घर में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

तिथि और ग्रह-नक्षत्र स्थिति

पंचांग के अनुसार, शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि इस दिन रात 8 बजकर 41 मिनट तक रहेगी, जिसके पश्चात द्वितीया तिथि का आरंभ होगा। नक्षत्र की दृष्टि से अश्लेषा नक्षत्र सुबह 6 बजकर 6 मिनट तक रहेगा और उसके बाद मघा नक्षत्र प्रारंभ होगा। चंद्रमा कर्क राशि में सुबह 6 बजकर 6 मिनट तक विराजमान रहेगा। इस दिन वरीयान योग दोपहर 12 बजकर 16 मिनट तक रहेगा।

सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्र समय

13 अगस्त को सूर्योदय सुबह 5 बजकर 49 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 7 बजकर 2 मिनट पर होगा। चंद्रोदय सुबह 6 बजकर 16 मिनट पर तथा चंद्रास्त शाम 7 बजकर 28 मिनट पर होगा।

शुभ मुहूर्त — पूजा और मांगलिक कार्यों के लिए

पूजा-पाठ और शुभ कार्यों के लिए सबसे उत्तम समय अभिजीत मुहूर्त है, जो सुबह 11 बजकर 59 मिनट से दोपहर 12 बजकर 52 मिनट तक रहेगा। इसके अतिरिक्त विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 38 मिनट से 3 बजकर 31 मिनट तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 7 बजकर 2 मिनट से 7 बजकर 24 मिनट तक रहेगा।

अशुभ काल — इन समयों में सावधानी बरतें

इस दिन राहुकाल दोपहर 2 बजकर 5 मिनट से 3 बजकर 44 मिनट तक रहेगा। पंचांग के जानकारों के अनुसार, इस अवधि में कोई भी नया शुभ कार्य आरंभ करने से बचना चाहिए। यमगंड सुबह 5 बजकर 49 मिनट से 7 बजकर 28 मिनट तक और गुलिक काल सुबह 9 बजकर 7 मिनट से 10 बजकर 47 मिनट तक रहेगा।

दिशा शूल और यात्रा परामर्श

पंचांग के अनुसार, 13 अगस्त को दिशा शूल दक्षिण दिशा में रहेगा। इसलिए इस दिन दक्षिण दिशा की यात्रा से यथासंभव बचने की सलाह दी जाती है। यदि किसी अपरिहार्य कारण से दक्षिण दिशा में जाना आवश्यक हो, तो परंपरागत धार्मिक उपायों को अपनाने के बाद यात्रा की जा सकती है। सावन के इस पवित्र संयोग में विधिपूर्वक आराधना से भक्तों को विशेष फल की प्राप्ति होती है, ऐसी मान्यता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

किंतु इनकी उपयोगिता तब और बढ़ जाती है जब मुहूर्त-सूचना को व्यावहारिक संदर्भ के साथ प्रस्तुत किया जाए। सावन और गुरुवार का यह संयोग वर्ष में विरले ही बनता है, जो इसे धार्मिक दृष्टि से उल्लेखनीय बनाता है। पाठकों के लिए राहुकाल और दिशा शूल जैसी जानकारी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी शुभ मुहूर्त की — और इसे स्पष्ट, तालिकाबद्ध रूप में देना सामग्री की वास्तविक सेवा है।
RashtraPress
12 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

13 अगस्त 2026 को कौन-सी तिथि है?
13 अगस्त 2026 को सावन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि है, जो रात 8 बजकर 41 मिनट तक रहेगी। इसके बाद द्वितीया तिथि प्रारंभ होगी।
13 अगस्त 2026 को शिव-विष्णु पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त कौन-सा है?
इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 59 मिनट से दोपहर 12 बजकर 52 मिनट तक सर्वश्रेष्ठ माना गया है। विजय मुहूर्त दोपहर 2:38 से 3:31 बजे तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 7:02 से 7:24 बजे तक भी शुभ हैं।
13 अगस्त 2026 को राहुकाल कब है?
इस दिन राहुकाल दोपहर 2 बजकर 5 मिनट से 3 बजकर 44 मिनट तक रहेगा। पंचांग के अनुसार इस अवधि में कोई नया शुभ कार्य आरंभ नहीं करना चाहिए।
13 अगस्त 2026 को कौन-सा नक्षत्र है?
इस दिन सुबह 6 बजकर 6 मिनट तक अश्लेषा नक्षत्र रहेगा, उसके बाद मघा नक्षत्र प्रारंभ होगा। चंद्रमा कर्क राशि में सुबह 6:06 बजे तक विराजमान रहेगा।
13 अगस्त 2026 को दिशा शूल किस दिशा में है और क्या सावधानी बरतें?
इस दिन दिशा शूल दक्षिण दिशा में है, इसलिए दक्षिण दिशा में यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है। यदि यात्रा अनिवार्य हो तो परंपरागत धार्मिक उपाय अपनाने के बाद यात्रा की जा सकती है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 दिन पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 1 सप्ताह पहले
  4. 1 सप्ताह पहले
  5. 1 सप्ताह पहले
  6. 2 सप्ताह पहले
  7. 3 सप्ताह पहले
  8. 1 महीना पहले