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1 अगस्त 2026 पंचांग: जया पार्वती व्रत समापन, सावन में शिवलिंग पर जल-बेलपत्र अर्पण का शुभ दिन

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1 अगस्त 2026 पंचांग: जया पार्वती व्रत समापन, सावन में शिवलिंग पर जल-बेलपत्र अर्पण का शुभ दिन

सारांश

1 अगस्त 2026 को सावन के कृष्ण पक्ष की तृतीया और जया पार्वती व्रत के समापन का संयोग बन रहा है। शिवलिंग पर जल-बेलपत्र अर्पण का यह दिन विशेष फलदायी है। अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:07 से 12:59 बजे तक — जानें पूरा पंचांग।

मुख्य बातें

1 अगस्त 2026 को श्रावण कृष्ण पक्ष तृतीया रात 11:07 बजे तक, इसके बाद चतुर्थी आरंभ।
जया पार्वती व्रत का इसी दिन समापन; मां पार्वती और शिवलिंग की पूजा विशेष फलदायी।
अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:07–12:59 बजे ; अमृत काल दोपहर 1:09–2:50 बजे ।
राहुकाल प्रातः 9:17–10:55 बजे ; गुलिक काल 6:01–7:39 बजे ; यमगंड काल 2:11–3:49 बजे — इन समयों में नए कार्य वर्जित।
चंद्रमा रात 8:45 बजे तक शतभिषा नक्षत्र में; सूर्य पुष्य नक्षत्र में; शोभन योग प्रभावी।
पूर्व दिशा में दिशाशूल — उस दिशा में यात्रा से बचने की सलाह।

1 अगस्त 2026 (शनिवार) को श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि रात 11:07 बजे तक है, जिसके पश्चात चतुर्थी तिथि आरंभ हो जाएगी। इस दिन जया पार्वती व्रत का विधिवत समापन हो रहा है, जो भगवान शिव और मां पार्वती की आराधना का विशेष अवसर है। सावन के पवित्र महीने में शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्र समय

पंचांग के अनुसार, 1 अगस्त 2026 को सूर्योदय प्रातः 6:01 बजे और सूर्यास्त सायं 7:05 बजे होगा। चंद्रोदय सायं 8:54 बजे और चंद्रास्त अगले दिन प्रातः 9:03 बजे होगा। इस दिन सूर्य पुष्य नक्षत्र में गोचर करेगा।

नक्षत्र और योग

चंद्रमा रात 8:45 बजे तक शतभिषा नक्षत्र में रहेगा, इसके बाद पूर्व भाद्रपदा नक्षत्र आरंभ होगा। इस शनिवार को शोभन योग रहेगा। अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:07 से 12:59 बजे तक रहेगा, जो दिन का सर्वाधिक शुभ समय माना जाता है। अमृत काल दोपहर 1:09 से 2:50 बजे तक रहेगा।

अशुभ काल — किन समयों में नए कार्य न करें

पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन राहुकाल प्रातः 9:17 से 10:55 बजे तक रहेगा। गुलिक काल प्रातः 6:01 से 7:39 बजे और यमगंड काल दोपहर 2:11 से 3:49 बजे तक रहेगा। इन कालखंडों में नए कार्य, यात्रा या महत्वपूर्ण निर्णय लेने से परहेज करना उचित माना जाता है।

ग्रह स्थिति और दिशाशूल

इस दिन सूर्य कर्क राशि में और चंद्रमा कुंभ राशि में स्थित रहेंगे। पूर्व दिशा में दिशाशूल रहेगा, अतः ज्योतिषीय परंपरा के अनुसार इस दिशा में यात्रा से बचना चाहिए। यदि पूर्व दिशा में यात्रा अनिवार्य हो, तो विशेष ज्योतिषीय उपाय अपनाकर प्रस्थान किया जा सकता है।

जया पार्वती व्रत का महत्व

हिंदू धर्म में जया पार्वती व्रत सुहागिन स्त्रियाँ और कुंवारी कन्याएँ मनोवांछित फल की प्राप्ति के लिए रखती हैं। सावन के महीने में इस व्रत का समापन विशेष रूप से शुभ माना जाता है। इस दिन मां पार्वती की विधिवत पूजा, शिवलिंग पर जलाभिषेक और बेलपत्र अर्पण से व्रत का पूर्ण फल मिलता है। आगे आने वाले सावन के सोमवारों में भी शिव-पार्वती आराधना का क्रम जारी रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि लोग दैनिक मुहूर्त और व्रत की जानकारी अब अखबार की जगह मोबाइल पर खोजते हैं। जया पार्वती व्रत जैसे क्षेत्रीय व्रतों को राष्ट्रीय मंच पर स्थान मिलना सांस्कृतिक विविधता की दृष्टि से सकारात्मक है। हालाँकि, ज्योतिषीय मान्यताओं को समाचार के रूप में प्रस्तुत करते समय यह स्पष्ट करना ज़रूरी है कि ये परंपरागत आस्था पर आधारित हैं, वैज्ञानिक प्रमाण पर नहीं। पाठकों की आस्था का सम्मान करते हुए तथ्यात्मक सटीकता बनाए रखना ही जिम्मेदार पत्रकारिता है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1 अगस्त 2026 को कौन-सी तिथि है?
1 अगस्त 2026 को श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि रात 11:07 बजे तक है, इसके बाद चतुर्थी तिथि आरंभ होगी। यह शनिवार का दिन है।
जया पार्वती व्रत का समापन कब और कैसे करें?
जया पार्वती व्रत का समापन 1 अगस्त 2026 को है। इस दिन मां पार्वती की विधिवत पूजा करें और शिवलिंग पर जल व बेलपत्र अर्पित करें। सावन माह में यह पूजा विशेष रूप से फलदायी मानी जाती है।
1 अगस्त 2026 को शुभ मुहूर्त कब है?
इस दिन अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:07 से 12:59 बजे तक है, जो दिन का सर्वश्रेष्ठ शुभ समय माना जाता है। अमृत काल दोपहर 1:09 से 2:50 बजे तक रहेगा।
1 अगस्त 2026 को राहुकाल कब है?
1 अगस्त 2026 को राहुकाल प्रातः 9:17 से 10:55 बजे तक रहेगा। इसके अलावा गुलिक काल 6:01–7:39 बजे और यमगंड काल 2:11–3:49 बजे रहेगा — इन अवधियों में नए कार्य आरंभ न करने की परंपरागत सलाह है।
1 अगस्त 2026 को कौन-सा नक्षत्र और योग है?
इस दिन सूर्य पुष्य नक्षत्र में और चंद्रमा रात 8:45 बजे तक शतभिषा नक्षत्र में रहेगा, इसके बाद पूर्व भाद्रपदा नक्षत्र आरंभ होगा। दिन का योग शोभन है।
राष्ट्र प्रेस
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