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27 जुलाई 2026 पंचांग: जया-विजया पार्वती व्रत आरंभ, शिव-पार्वती पूजा का विशेष महत्व

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27 जुलाई 2026 पंचांग: जया-विजया पार्वती व्रत आरंभ, शिव-पार्वती पूजा का विशेष महत्व

सारांश

27 जुलाई 2026 को आषाढ़ शुक्ल त्रयोदशी के साथ जया-विजया पार्वती व्रत का शुभारंभ हो रहा है, जो 1 अगस्त तक चलेगा। शिव-पार्वती उपासना, अभिजित मुहूर्त और अशुभ कालों की पूरी जानकारी — आज का पंचांग एक नज़र में।

मुख्य बातें

27 जुलाई 2026 को आषाढ़ शुक्ल त्रयोदशी शाम 4:15 बजे तक, इसके बाद चतुर्दशी आरंभ।
जया-विजया पार्वती व्रत आज से 1 अगस्त 2026 तक — पाँच दिन नमक-रहित आहार, शिव-पार्वती पूजा विशेष फलदायी।
अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:07 से 12:59 बजे — दिन का सर्वश्रेष्ठ शुभ समय।
राहुकाल सुबह 7:21–9:03 , यमगंड 10:45–12:27 , गुलिक काल दोपहर 2:09–3:51 बजे — इन समयों में नए कार्य वर्जित।
चंद्रमा सुबह 10:28 बजे तक मूल नक्षत्र , फिर पूर्वाषाढ़ा में; पूर्व दिशा में दिशाशूल ।

27 जुलाई 2026 (सोमवार) को आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि शाम 4:15 बजे तक रहेगी, जिसके पश्चात चतुर्दशी तिथि का आरंभ होगा। इसी दिन से जया-विजया पार्वती व्रत का शुभारंभ हो रहा है, जो 1 अगस्त 2026 तक चलेगा — इन पाँच दिनों में भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना विशेष फलदायी मानी जाती है।

सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्र समय

पंचांग के अनुसार, 27 जुलाई 2026 को सूर्योदय सुबह 5:59 बजे और सूर्यास्त शाम 7:07 बजे होगा। चंद्रोदय शाम 5:46 बजे और चंद्रास्त भोर 4:29 बजे होगा। इस दिन सूर्य पुष्य नक्षत्र में स्थित रहेगा, जबकि चंद्रमा सुबह 10:28 बजे तक मूल नक्षत्र में रहकर इसके बाद पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में प्रवेश करेगा।

योग और शुभ मुहूर्त

इस सोमवार को रात 10:53 बजे तक वैधृति योग रहेगा, जिसके बाद विष्कुम्भ योग आरंभ होगा। दिन का सर्वाधिक शुभ समय अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:07 बजे से 12:59 बजे तक रहेगा। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इस मुहूर्त में राहुकाल या अन्य अशुभ कालों की चिंता किए बिना कोई भी महत्वपूर्ण कार्य, पूजा या व्यापारिक गतिविधि प्रारंभ की जा सकती है।

अशुभ काल — राहुकाल, गुलिक और यमगंड

इस दिन राहुकाल सुबह 7:21 बजे से 9:03 बजे तक रहेगा। गुलिक काल दोपहर 2:09 बजे से 3:51 बजे तक और यमगंड काल सुबह 10:45 बजे से दोपहर 12:27 बजे तक रहेगा। ज्योतिषीय परंपरा के अनुसार इन कालों में नए कार्यों का शुभारंभ वर्जित माना जाता है।

राशि स्थिति और दिशाशूल

सोमवार को सूर्य कर्क राशि में और चंद्रमा धनु राशि में स्थित रहेंगे। इस दिन पूर्व दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार इस दिशा में यात्रा से बचना उचित है; यदि यात्रा अनिवार्य हो तो विशेष ज्योतिषीय उपायों के साथ प्रस्थान किया जा सकता है।

जया-विजया पार्वती व्रत का महत्व

जया-विजया पार्वती व्रत 27 जुलाई से 1 अगस्त 2026 तक पाँच दिनों तक मनाया जाएगा। इन दिनों भोजन में नमक का सेवन पूर्णतः वर्जित है — केवल फल, दूध और बिना नमक के खाद्य पदार्थ ग्रहण किए जाते हैं। मान्यता है कि इस व्रत में भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत उपासना से मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। आने वाले दिनों में इस व्रत की पूजा-विधि और उपायों का पालन करना श्रद्धालुओं के लिए विशेष लाभकारी रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

न केवल धार्मिक अनुष्ठान। जया-विजया पार्वती व्रत जैसे पाँच-दिवसीय व्रतों की सटीक तिथि और आहार-नियम की जानकारी डिजिटल माध्यमों पर तेज़ी से खोजी जाती है, जो इस विषय की प्रासंगिकता को रेखांकित करती है। अभिजित मुहूर्त और राहुकाल जैसी सूचनाएँ शहरी और ग्रामीण, दोनों वर्गों के लिए समान रूप से उपयोगी हैं।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

27 जुलाई 2026 को कौन-सी तिथि है?
27 जुलाई 2026 को आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि शाम 4:15 बजे तक है, जिसके बाद चतुर्दशी तिथि लग जाएगी।
जया-विजया पार्वती व्रत 2026 कब से कब तक है?
जया-विजया पार्वती व्रत 27 जुलाई 2026 से प्रारंभ होकर 1 अगस्त 2026 तक पाँच दिनों तक मनाया जाएगा। इन दिनों भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है और भोजन में नमक का सेवन वर्जित होता है।
27 जुलाई 2026 का अभिजित मुहूर्त कब है?
27 जुलाई 2026 को अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:07 बजे से 12:59 बजे तक रहेगा। यह दिन का सबसे शुभ समय माना जाता है, जिसमें कोई भी महत्वपूर्ण कार्य, पूजा या व्यापार बिना किसी अशुभ काल की चिंता किए शुरू किया जा सकता है।
27 जुलाई 2026 को राहुकाल कितने बजे है?
27 जुलाई 2026 को राहुकाल सुबह 7:21 बजे से 9:03 बजे तक रहेगा। इसके अलावा यमगंड काल सुबह 10:45 से दोपहर 12:27 बजे और गुलिक काल दोपहर 2:09 से 3:51 बजे तक रहेगा — इन समयों में नए कार्यों का आरंभ वर्जित माना जाता है।
27 जुलाई 2026 को कौन-सा नक्षत्र और योग है?
इस दिन चंद्रमा सुबह 10:28 बजे तक मूल नक्षत्र में और उसके बाद पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में रहेगा, जबकि सूर्य पुष्य नक्षत्र में स्थित रहेगा। रात 10:53 बजे तक वैधृति योग और उसके बाद विष्कुम्भ योग रहेगा।
राष्ट्र प्रेस
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