10 अगस्त 2026
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पंजाब विधानसभा ने प्राइवेट स्कूल फीस बिल 2026 पास किया, 5% से अधिक बढ़ोतरी पर रोक

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पंजाब विधानसभा ने प्राइवेट स्कूल फीस बिल 2026 पास किया, 5% से अधिक बढ़ोतरी पर रोक

सारांश

पंजाब विधानसभा ने 10 अगस्त 2026 को निजी स्कूलों की मनमानी फीस वसूली पर लगाम लगाने वाला बिल सर्वसम्मति से पास किया। अब फीस 5% से अधिक नहीं बढ़ेगी, फोरेंसिक ऑडिट होगा और तीसरी बार उल्लंघन पर स्कूल की एफिलिएशन रद्द होगी।

मुख्य बातें

पंजाब विधानसभा ने 10 अगस्त 2026 को 'पंजाब रेगुलेशन ऑफ फीस ऑफ अन-एडेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन्स (अमेंडमेंट) बिल, 2026' सर्वसम्मति से पारित किया।
निजी स्कूल अब नए शैक्षणिक सत्र में फीस 5% से अधिक नहीं बढ़ा सकेंगे; हर मद की राशि 'फीस' मानी जाएगी।
उल्लंघन पर पहली बार ₹50,000 , दूसरी बार ₹1 लाख जुर्माना और तीसरी बार एफिलिएशन रद्द ।
सरकार निजी स्कूलों का फोरेंसिक ऑडिट कराएगी और अतिरिक्त वसूली माता-पिता को वापस दिलाएगी।
इसी सत्र में क्लाउड यूनिवर्सिटी होशियारपुर , एमएस डिजिटल यूनिवर्सिटी पटियाला और फिजिक्सवाला डिजिटल यूनिवर्सिटी पटियाला सहित कुल 9 बिल पास हुए।

पंजाब विधानसभा ने 10 अगस्त 2026 को चंडीगढ़ में 'पंजाब रेगुलेशन ऑफ फीस ऑफ अन-एडेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन्स (अमेंडमेंट) बिल, 2026' को सर्वसम्मति से ध्वनि मत द्वारा पारित कर दिया। इस कानून के तहत राज्य के निजी स्कूल अब किसी भी नए शैक्षणिक सत्र में फीस 5 प्रतिशत से अधिक नहीं बढ़ा सकेंगे। लाखों अभिभावकों और छात्रों को मनमानी वसूली से राहत दिलाने की दिशा में यह कदम पंजाब सरकार का अब तक का सबसे कठोर शैक्षिक नीतिगत हस्तक्षेप माना जा रहा है।

बिल की मुख्य प्रावधान

नए कानून के अनुसार, माता-पिता से किसी भी मद — चाहे वह ट्रांसपोर्ट हो, लैब फीस हो या अन्य शुल्क — में ली गई हर राशि को 'फीस' माना जाएगा और उसे नियामक दायरे में लाया जाएगा। यह प्रावधान उन स्कूलों पर लगाम कसेगा जो मुख्य फीस को सीमित दिखाकर अन्य शीर्षकों के तहत अतिरिक्त वसूली करते थे।

सरकार निजी स्कूलों का फोरेंसिक ऑडिट भी कराएगी ताकि अधिक वसूली का पता लगाया जा सके और यह सुनिश्चित किया जा सके कि अतिरिक्त राशि माता-पिता को वापस की जाए। उल्लंघन पर दंड का तीन-स्तरीय ढाँचा तय किया गया है: पहली बार ₹50,000, दूसरी बार ₹1 लाख का जुर्माना और तीसरी बार स्कूल की एफिलिएशन रद्द कर दी जाएगी।

मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने विधानसभा में पिछली सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान, जब स्कूल बंद थे और बसें नहीं चल रही थीं, तब भी अभिभावकों से ट्रांसपोर्ट फीस वसूली जाती रही। उन्होंने कहा, 'पंजाब में अब इस तरह का शोषण नहीं होने दिया जाएगा।' मान ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार न शिक्षा को व्यापार बनने देगी और न ही राज्य में शिक्षा माफिया को पनपने देगी।

यह बिल शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस द्वारा सदन में पेश किया गया और सर्वसम्मति से पारित हुआ — जो इसकी व्यापक राजनीतिक स्वीकार्यता को दर्शाता है।

विधानसभा सत्र में पास हुए अन्य बिल

इसी सत्र में विधानसभा ने कुल नौ बिल पारित किए। कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा द्वारा पेश 'पंजाब कॉमन इंफ्रास्ट्रक्चर (रेगुलेशन एंड मेंटेनेंस) अमेंडमेंट बिल, 2026' बहुमत से पास हुआ।

शिक्षा मंत्री बैंस द्वारा ही तीन विश्वविद्यालय विधेयक पेश किए गए और बहुमत से पारित हुए: क्लाउड यूनिवर्सिटी, होशियारपुर बिल, 2026; एमएस डिजिटल यूनिवर्सिटी, पटियाला बिल, 2026; और फिजिक्सवाला डिजिटल यूनिवर्सिटी, पटियाला बिल, 2026

वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने 'पंजाब गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (अमेंडमेंट) बिल, 2026' और 'पंजाब स्टेट आउटसोर्स्ड पर्सनल (ट्रांजिशन टू कॉन्ट्रैक्चुअल एंगेजमेंट) बिल, 2026' पेश किए — दोनों पास हुए। पंचायती राज मंत्री तरनप्रीत सिंह सौंद का 'पंजाब पंचायती राज (अमेंडमेंट) बिल, 2026' और वन मंत्री लाल चंद कटारूचक का 'पंजाब वृक्ष संरक्षण विधेयक, 2026' भी बहुमत से पारित हुए।

आम जनता पर असर

पंजाब में हज़ारों निजी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों बच्चों के अभिभावकों को इस कानून से सीधी राहत मिलने की उम्मीद है। फोरेंसिक ऑडिट का प्रावधान विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे पिछले वर्षों में की गई अतिरिक्त वसूली की भी जाँच हो सकेगी और वापसी का रास्ता खुलेगा।

गौरतलब है कि देश के कई राज्यों में निजी स्कूल फीस नियमन एक दशक से अधिक समय से विवाद का विषय रहा है। पंजाब का यह कदम उन राज्यों के लिए एक संदर्भ-बिंदु बन सकता है जो अभी तक इस दिशा में ठोस कानून नहीं बना पाए हैं।

आगे क्या होगा

कानून के लागू होने के बाद सरकार फोरेंसिक ऑडिट की प्रक्रिया शुरू करेगी। नियामक ढाँचे के क्रियान्वयन की ज़िम्मेदारी शिक्षा विभाग पर होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि कानून की सफलता इसके प्रवर्तन तंत्र की मज़बूती पर निर्भर करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा प्रवर्तन में होगी — देश के कई राज्यों में इसी तरह के नियम पहले भी बने और स्कूलों ने 'विकास शुल्क' या 'डोनेशन' जैसे नए शीर्षकों से वसूली जारी रखी। फोरेंसिक ऑडिट का प्रावधान उत्साहजनक है, लेकिन यह कितने स्कूलों पर और कितनी नियमितता से लागू होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। सर्वसम्मति से पारित होना राजनीतिक इच्छाशक्ति का संकेत है, फिर भी बिना स्वतंत्र नियामक निकाय के यह कानून शिकायत-आधारित प्रणाली पर निर्भर रह सकता है — जो ऐतिहासिक रूप से अभिभावकों के लिए बोझिल साबित हुई है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंजाब प्राइवेट स्कूल फीस बिल 2026 क्या है?
यह 10 अगस्त 2026 को पंजाब विधानसभा द्वारा सर्वसम्मति से पारित संशोधन विधेयक है, जो निजी स्कूलों की फीस वृद्धि को प्रति वर्ष 5% तक सीमित करता है। माता-पिता से किसी भी मद में ली गई हर राशि को 'फीस' माना जाएगा और वह नियामक दायरे में आएगी।
नियम तोड़ने पर प्राइवेट स्कूलों को क्या सज़ा मिलेगी?
उल्लंघन पर पहली बार ₹50,000, दूसरी बार ₹1 लाख जुर्माना लगेगा और तीसरी बार स्कूल की एफिलिएशन रद्द कर दी जाएगी। इसके अलावा सरकार फोरेंसिक ऑडिट के ज़रिए अतिरिक्त वसूली का पता लगाकर माता-पिता को रकम वापस दिलाएगी।
फोरेंसिक ऑडिट से अभिभावकों को क्या फायदा होगा?
फोरेंसिक ऑडिट के माध्यम से सरकार यह जाँचेगी कि स्कूलों ने पहले अधिक वसूली की है या नहीं। यदि अतिरिक्त राशि पाई जाती है, तो उसे माता-पिता को वापस लौटाना अनिवार्य होगा।
इसी विधानसभा सत्र में और कौन-से बिल पास हुए?
सत्र में कुल 9 बिल पारित हुए, जिनमें क्लाउड यूनिवर्सिटी होशियारपुर, एमएस डिजिटल यूनिवर्सिटी पटियाला, फिजिक्सवाला डिजिटल यूनिवर्सिटी पटियाला, पंजाब GST संशोधन बिल, पंजाब पंचायती राज संशोधन बिल और पंजाब वृक्ष संरक्षण विधेयक शामिल हैं।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस बिल पर क्या कहा?
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि कोविड-19 के दौरान स्कूल बंद रहने और बसें न चलने के बावजूद अभिभावकों से ट्रांसपोर्ट फीस वसूली गई। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार न शिक्षा को व्यापार बनने देगी और न ही शिक्षा माफिया को पनपने देगी।
राष्ट्र प्रेस
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