कुमारस्वामी का CM शिवकुमार को पत्र: 27 जून को बैरामंगला दौरे में साथ चलने का न्योता, ग्रेटर बेंगलुरु परियोजना पर संयुक्त संवाद का प्रस्ताव
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्री और जनता दल (सेक्युलर) के वरिष्ठ नेता एच.डी. कुमारस्वामी ने 25 जून 2025 को कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को पत्र लिखकर बिदादी क्षेत्र में प्रस्तावित 'ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप/सबअर्बन डेवलपमेंट प्रोजेक्ट' को लेकर अपनी गहरी चिंताएँ दोहराई हैं। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री को 27 जून को बैरामंगला गाँव के नियोजित दौरे में सम्मिलित होने का आमंत्रण दिया है, ताकि प्रभावित ग्रामीणों से सीधे संवाद किया जा सके।
पत्राचार की पृष्ठभूमि
कुमारस्वामी ने पत्र में स्मरण कराया कि 22 जून को उन्हें मुख्यमंत्री का एक पत्र प्राप्त हुआ था, जिसका उत्तर उन्होंने उसी दिन भेज दिया था। उन्होंने कहा कि वे मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा कर रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) की प्रस्तावित परियोजना को लेकर बिदादी और आसपास के क्षेत्रों में किसानों व स्थानीय निवासियों में बेचैनी बढ़ती जा रही है।
बैरामंगला दौरे का कार्यक्रम
कुमारस्वामी ने बताया कि 27 जून को बैरामंगला गाँव के दौरे के दौरान वे परियोजना से प्रभावित होने वाले किसानों, खेतिहर मजदूरों, डेयरी व्यवसाय से जुड़ी महिला किसानों, छोटे उद्यमियों और स्थानीय ग्रामीणों से मुलाकात करेंगे। इस संवाद का उद्देश्य उनकी शिकायतें, आशंकाएँ और सुझाव सुनकर परियोजना के संभावित प्रभावों का प्रत्यक्ष आकलन करना है। उन्होंने दौरे का विस्तृत कार्यक्रम भी मुख्यमंत्री को भेजा है ताकि राज्य सरकार पूरी तरह अवगत रहे।
संयुक्त संवाद का प्रस्ताव
पत्र में कुमारस्वामी ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से आग्रह किया कि वे GBA के संबंधित अधिकारियों के साथ बैरामंगला गाँव का दौरा करें। उनका तर्क है कि यदि दोनों नेता एकसाथ प्रभावित लोगों से बात करें, तो जमीनी हकीकत बेहतर ढंग से समझी जा सकेगी और व्यावहारिक समाधान खोजना आसान होगा। गौरतलब है कि यह प्रस्ताव विपक्षी और सत्तापक्ष के बीच दुर्लभ सहयोगात्मक पहल का संकेत देता है।
विकास और जनहित के बीच संतुलन
कुमारस्वामी ने स्पष्ट किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की आजीविका, कृषि भूमि और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर किसी भी बड़ी विकास परियोजना के प्रभाव को गंभीरता से परखना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विकास और जनहित के बीच संतुलन बनाए रखना सरकार और जनप्रतिनिधियों की साझा जिम्मेदारी है। आने वाले दिनों में राज्य सरकार की प्रतिक्रिया और 27 जून का दौरा इस विवाद की दिशा तय करेंगे।