10 अगस्त 2026
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जेपीएससी-जेएसएससी विवाद: रांची में हजारों छात्रों का विधानसभा घेराव, कंटीले तारों की बैरिकेडिंग, धारा 163 लागू

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जेपीएससी-जेएसएससी विवाद: रांची में हजारों छात्रों का विधानसभा घेराव, कंटीले तारों की बैरिकेडिंग, धारा 163 लागू

सारांश

17 दिन से जल रहे छात्र आंदोलन की आग आज रांची की सड़कों पर फैल गई। तीन दौर की वार्ता बेनतीजा रहने के बाद हजारों छात्र झारखंड विधानसभा घेरने निकले — एक तरफ तिरंगा थामे युवा, दूसरी तरफ कंटीले तार और 2,000 पुलिसकर्मी। जेपीएससी-जेएसएससी धांधली का यह विवाद अब सीधे सरकार की साख पर सवाल बन गया है।

मुख्य बातें

जेपीएससी-जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली के विरोध में छात्र आंदोलन 10 अगस्त को अपने 17वें दिन निर्णायक मोड़ पर पहुँचा।
राज्य सरकार के साथ तीसरे दौर की वार्ता बेनतीजा रहने के बाद हजारों छात्र झारखंड विधानसभा घेराव के लिए सड़कों पर उतरे।
विधानसभा परिसर के 750 मीटर के दायरे में धारा 163 लागू; 12 स्थानों पर कंटीले तारों सहित बैरिकेडिंग।
करीब 2,000 अतिरिक्त पुलिस बल , रैपिड एक्शन फोर्स और वाटर कैनन तैनात; एसएसपी राकेश रंजन ने शांति की अपील की।
BJP नेता और पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने कंटीले तारों को 'लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ' बताया, किसी के घायल होने पर सरकार को जिम्मेदार ठहराया।
छात्रों की माँग: सभी विवादित परीक्षाएँ रद्द हों और सीबीआई जाँच हो।

झारखंड की राजधानी रांची में 10 अगस्त 2026 को जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली के विरोध में चल रहा छात्र आंदोलन अपने 17वें दिन निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया। राज्य सरकार के साथ रविवार को हुई तीसरे दौर की वार्ता बेनतीजा समाप्त होने के बाद, राज्यभर से हजारों की संख्या में पहुँचे परीक्षार्थी झारखंड विधानसभा का घेराव करने के लिए सड़कों पर उतर आए।

मार्च का आगाज़ और छात्रों की तैयारी

सुबह 10 बजे से जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से शुरू होने वाले इस विशाल मार्च के लिए रविवार सुबह से ही बसों, ट्रेनों और निजी वाहनों के जरिए छात्र रांची पहुँचने लगे थे। सैकड़ों अभ्यर्थियों ने जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम, अटल स्मृति वेंडर मार्केट और आसपास के परिसरों में खुले आसमान के नीचे रात बिताई। सोमवार की भोर होते ही बिरसा चौक और आसपास के इलाकों में तिरंगा और विरोध की तख्तियाँ थामे युवाओं का हुजूम उमड़ पड़ा।

छात्रों की मुख्य माँगें

आंदोलित छात्र जेपीएससी और जेएसएससी की सभी विवादित परीक्षाओं को रद्द करने तथा इनकी सीबीआई जाँच की माँग पर अड़े हुए हैं। गौरतलब है कि यह आंदोलन लगातार 17 दिनों से जारी है और तीन दौर की वार्ता के बावजूद गतिरोध बना हुआ है — जो सरकार और छात्रों के बीच गहरी अविश्वास की खाई को दर्शाता है।

सुरक्षा व्यवस्था और निषेधाज्ञा

विधानसभा घेराव को देखते हुए राजधानी में व्यापक सुरक्षा बंदोबस्त किए गए हैं। विधानसभा परिसर के 750 मीटर के दायरे में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 (पूर्व में धारा 144) के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है। अरगोड़ा से लेकर विधानसभा मार्ग तक करीब 12 प्रमुख स्थानों पर भारी बैरिकेडिंग की गई है, जिनमें कई जगहों पर लोहे के कंटीले तार लपेटे गए हैं। इसके अलावा करीब 2,000 अतिरिक्त पुलिस बल, रैपिड एक्शन फोर्स, दंगा नियंत्रण वाहन और वाटर कैनन तैनात किए गए हैं। रांची के एसएसपी राकेश रंजन ने अभ्यर्थियों से शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है। जमशेदपुर और हजारीबाग सहित अन्य संवेदनशील जिलों में भी निषेधाज्ञा लागू की गई है।

कंटीले तारों पर राजनीतिक विवाद

बैरिकेडिंग पर लगाए गए कंटीले तारों को लेकर राजनीति भी गरमा गई है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता चंपई सोरेन ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह कोई भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमा नहीं है जहाँ कंटीले तार बिछाए जा रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अपने हक की माँग कर रहे युवाओं पर इस तरह की बाड़ लगाना लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है और यदि कोई अभ्यर्थी घायल होता है, तो उसकी सीधी जवाबदेही राज्य सरकार की होगी।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड सरकार पहले से ही कई मोर्चों पर दबाव में है। 17 दिनों से उबल रहा छात्र असंतोष अब राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है। सरकार ने पुलिस को अनावश्यक बल प्रयोग न करने और संयम बरतने की हिदायत दी है, लेकिन घेराव और निषेधाज्ञा के टकराव से स्थिति कभी भी बिगड़ सकती है। अगले कुछ घंटे तय करेंगे कि यह आंदोलन संवाद की राह पकड़ता है या टकराव की।

संपादकीय दृष्टिकोण

इसलिए वह छात्रों को रोकने में ऊर्जा लगा रही है। जेपीएससी-जेएसएससी विवाद केवल परीक्षा धांधली का मामला नहीं रहा — यह झारखंड के लाखों युवाओं के भविष्य और राज्य की भर्ती प्रणाली की विश्वसनीयता का सवाल बन चुका है। बिना सीबीआई जाँच की स्पष्ट समयसीमा और विवादित परीक्षाओं पर निर्णय के, यह आंदोलन और भड़कने का जोखिम बरकरार रहेगा।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जेपीएससी-जेएसएससी विवाद क्या है और छात्र क्यों आंदोलन कर रहे हैं?
झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली के आरोपों को लेकर छात्र 17 दिनों से आंदोलन कर रहे हैं। उनकी मुख्य माँग है कि सभी विवादित परीक्षाएँ रद्द की जाएँ और मामले की सीबीआई से जाँच कराई जाए।
रांची में विधानसभा घेराव के दौरान क्या सुरक्षा व्यवस्था की गई है?
विधानसभा परिसर के 750 मीटर के दायरे में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू की गई है। अरगोड़ा से विधानसभा मार्ग तक 12 प्रमुख स्थानों पर कंटीले तारों सहित बैरिकेडिंग की गई है और करीब 2,000 अतिरिक्त पुलिस बल, रैपिड एक्शन फोर्स तथा वाटर कैनन तैनात किए गए हैं।
सरकार और छात्रों के बीच वार्ता क्यों विफल रही?
रविवार को राज्य सरकार के साथ तीसरे दौर की वार्ता बेनतीजा रही। छात्र विवादित परीक्षाओं को रद्द करने और सीबीआई जाँच की माँग पर अडिग हैं, जबकि सरकार की ओर से इन माँगों पर कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला, जिससे गतिरोध बना हुआ है।
BJP नेता चंपई सोरेन ने कंटीले तारों पर क्या कहा?
पूर्व मुख्यमंत्री और BJP नेता चंपई सोरेन ने कहा कि यह कोई अंतरराष्ट्रीय सीमा नहीं है जहाँ कंटीले तार बिछाए जाएँ और अपने हक की माँग करने वाले युवाओं पर इस तरह की बाड़ लगाना लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी अभ्यर्थी के घायल होने पर सीधी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।
इस आंदोलन का असर अन्य जिलों पर भी पड़ा है?
हाँ, जमशेदपुर और हजारीबाग सहित अन्य पड़ोसी जिलों के संवेदनशील इलाकों में भी निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है। राज्यभर से छात्र बसों, ट्रेनों और निजी वाहनों से रांची पहुँचे, जो इस आंदोलन की व्यापक पहुँच को दर्शाता है।
राष्ट्र प्रेस
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