जेपीएससी-जेएसएससी विवाद: रांची में हजारों छात्रों का विधानसभा घेराव, कंटीले तारों की बैरिकेडिंग, धारा 163 लागू
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड की राजधानी रांची में 10 अगस्त 2026 को जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली के विरोध में चल रहा छात्र आंदोलन अपने 17वें दिन निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया। राज्य सरकार के साथ रविवार को हुई तीसरे दौर की वार्ता बेनतीजा समाप्त होने के बाद, राज्यभर से हजारों की संख्या में पहुँचे परीक्षार्थी झारखंड विधानसभा का घेराव करने के लिए सड़कों पर उतर आए।
मार्च का आगाज़ और छात्रों की तैयारी
सुबह 10 बजे से जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से शुरू होने वाले इस विशाल मार्च के लिए रविवार सुबह से ही बसों, ट्रेनों और निजी वाहनों के जरिए छात्र रांची पहुँचने लगे थे। सैकड़ों अभ्यर्थियों ने जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम, अटल स्मृति वेंडर मार्केट और आसपास के परिसरों में खुले आसमान के नीचे रात बिताई। सोमवार की भोर होते ही बिरसा चौक और आसपास के इलाकों में तिरंगा और विरोध की तख्तियाँ थामे युवाओं का हुजूम उमड़ पड़ा।
छात्रों की मुख्य माँगें
आंदोलित छात्र जेपीएससी और जेएसएससी की सभी विवादित परीक्षाओं को रद्द करने तथा इनकी सीबीआई जाँच की माँग पर अड़े हुए हैं। गौरतलब है कि यह आंदोलन लगातार 17 दिनों से जारी है और तीन दौर की वार्ता के बावजूद गतिरोध बना हुआ है — जो सरकार और छात्रों के बीच गहरी अविश्वास की खाई को दर्शाता है।
सुरक्षा व्यवस्था और निषेधाज्ञा
विधानसभा घेराव को देखते हुए राजधानी में व्यापक सुरक्षा बंदोबस्त किए गए हैं। विधानसभा परिसर के 750 मीटर के दायरे में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 (पूर्व में धारा 144) के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है। अरगोड़ा से लेकर विधानसभा मार्ग तक करीब 12 प्रमुख स्थानों पर भारी बैरिकेडिंग की गई है, जिनमें कई जगहों पर लोहे के कंटीले तार लपेटे गए हैं। इसके अलावा करीब 2,000 अतिरिक्त पुलिस बल, रैपिड एक्शन फोर्स, दंगा नियंत्रण वाहन और वाटर कैनन तैनात किए गए हैं। रांची के एसएसपी राकेश रंजन ने अभ्यर्थियों से शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है। जमशेदपुर और हजारीबाग सहित अन्य संवेदनशील जिलों में भी निषेधाज्ञा लागू की गई है।
कंटीले तारों पर राजनीतिक विवाद
बैरिकेडिंग पर लगाए गए कंटीले तारों को लेकर राजनीति भी गरमा गई है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता चंपई सोरेन ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह कोई भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमा नहीं है जहाँ कंटीले तार बिछाए जा रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अपने हक की माँग कर रहे युवाओं पर इस तरह की बाड़ लगाना लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है और यदि कोई अभ्यर्थी घायल होता है, तो उसकी सीधी जवाबदेही राज्य सरकार की होगी।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड सरकार पहले से ही कई मोर्चों पर दबाव में है। 17 दिनों से उबल रहा छात्र असंतोष अब राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है। सरकार ने पुलिस को अनावश्यक बल प्रयोग न करने और संयम बरतने की हिदायत दी है, लेकिन घेराव और निषेधाज्ञा के टकराव से स्थिति कभी भी बिगड़ सकती है। अगले कुछ घंटे तय करेंगे कि यह आंदोलन संवाद की राह पकड़ता है या टकराव की।