कन्याकुमारी में रबर की कीमतें बढ़ीं, सितंबर की गर्मी से लेटेक्स उत्पादन 30% घटा
सारांश
मुख्य बातें
कन्याकुमारी जिले में सितंबर 2026 की असामान्य गर्मी के कारण लेटेक्स उत्पादन में 30 प्रतिशत की गिरावट आई है, जिससे तमिलनाडु और पड़ोसी राज्य केरल में रबर की आपूर्ति घटी है और बाज़ार में कीमतें तेज़ हुई हैं। किसानों के लिए यह एक मिली-जुली स्थिति है — भाव तो बेहतर हैं, लेकिन बेचने के लिए माल कम है।
बाज़ार में मौजूदा कीमतें
मंगलवार को कोट्टायम बाज़ार में आरएसएस-4 ग्रेड रबर की डीलर कीमत ₹271 प्रति किलोग्राम और आरएसएस-5 की कीमत ₹266 प्रति किलोग्राम दर्ज की गई। आईएसएस-ग्रेड रबर ₹256 प्रति किलोग्राम पर बिकी।
रबर बोर्ड की आधिकारिक दरें इससे भी ऊँची रहीं। बोर्ड के अनुसार आरएसएस-4 की दर ₹279 प्रति किलोग्राम, आरएसएस-5 की ₹274 प्रति किलोग्राम और 80 प्रतिशत प्रोसेस्ड लेटेक्स की कीमत ₹191 प्रति किलोग्राम बताई गई।
उत्पादन में गिरावट की वजह
किसानों के अनुसार बीते दो हफ्तों में जिले में लेटेक्स का उत्पादन 30 प्रतिशत तक गिर गया है। गर्मी के तेज़ मौसम में रबर के पेड़ों से टैपिंग कम होती है, जिससे सप्लाई पर सीधा असर पड़ता है। जिले के पहाड़ी इलाकों में कभी-कभी हुई हल्की बारिश से कुछ राहत ज़रूर मिली और उत्पादन में आंशिक सुधार हुआ, लेकिन यह सुधार गिरावट की भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं रहा।
कीमतें क्यों बढ़ रही हैं
कुलशेखरम के एक रबर व्यापारी के अनुसार बाज़ार पर कई कारकों का एक साथ असर पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि सिंथेटिक रबर की कीमतों में पहले आई तेज़ी का कारण अमेरिका और ईरान के बीच टकराव के दौरान भारत को होने वाली कच्चे तेल की आपूर्ति में रुकावट रही। चूँकि सिंथेटिक रबर पेट्रोलियम से बनती है, इसलिए उसकी लागत बढ़ने से प्राकृतिक रबर की माँग और कीमत — दोनों में इज़ाफा हुआ।
व्यापारी ने आगे कहा कि बाद में कच्चे तेल का आयात स्थिर हो गया, फिर भी रबर की कीमतें ऊँची बनी रहीं। इसकी वजह ऑटोमोबाइल उद्योग में लगातार बढ़ रही माँग है, जबकि घरेलू उत्पादन उस माँग को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है। यह आपूर्ति-माँग असंतुलन ही कीमतों को ऊँचा रखने का मुख्य कारण है।
किसानों पर असर
कन्याकुमारी के रबर किसानों ने कीमतों में इस बढ़ोतरी का स्वागत किया है। गौरतलब है कि किसानों की कमाई केवल बाज़ार भाव पर नहीं, बल्कि उत्पादन की मात्रा पर भी निर्भर करती है। ऐसे में उत्पादन में हालिया गिरावट उनकी कुल आय पर प्रतिकूल असर डाल रही है।
यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में रबर किसान पहले से ही मौसमी अनिश्चितताओं से जूझ रहे हैं। फिलहाल वे इस बात पर नज़र रख रहे हैं कि असामान्य गर्मी के बाद बारिश से लेटेक्स उत्पादन में स्थायी सुधार होता है या नहीं।
आगे की राह
व्यापारियों का मानना है कि अगर घरेलू उत्पादन और माँग के बीच का अंतर कम होता है, तो कीमतें नरम पड़ सकती हैं। मानसून की वापसी और मौसम के सामान्य होने के साथ लेटेक्स उत्पादन में सुधार की उम्मीद बनी हुई है, जो आने वाले हफ्तों में बाज़ार की दिशा तय करेगी।