पोलाची नारियल निर्यात में वापसी: खाड़ी देशों की माँग लौटी, पर ढुलाई लागत अब भी बाधा
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के प्रमुख नारियल उत्पादन केंद्र पोलाची से नारियल निर्यात में पुनरुद्धार के संकेत मिल रहे हैं — पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव में कमी और खाड़ी देशों से माँग की वापसी के बाद किसानों और निर्यातकों को राहत मिली है। 6 जुलाई 2026 तक की स्थिति के अनुसार, पिछले करीब तीन महीनों से ठप पड़ा विदेशी व्यापार धीरे-धीरे पटरी पर लौट रहा है, हालाँकि माल ढुलाई की ऊँची दरें अभी भी उद्योग के लिए गंभीर चिंता का विषय बनी हुई हैं।
निर्यात में गिरावट की पृष्ठभूमि
पश्चिम एशिया में संघर्ष के दौरान कोच्चि बंदरगाह से खाड़ी देशों को भेजे जाने वाले नारियल के कंटेनरों की आवाजाही लगभग पूरी तरह बंद हो गई थी। इस रुकावट से पहले पोलाची के निर्यातक प्रतिदिन कई कंटेनर भरकर खाड़ी बाज़ारों को भेजते थे। तीन महीनों की इस रुकावट ने व्यापारियों और किसानों दोनों को भारी आर्थिक नुकसान पहुँचाया।
घरेलू बाज़ार पर असर और कीमतों में गिरावट
निर्यात बंद रहने से घरेलू बाज़ार में नारियल की आपूर्ति अचानक बढ़ गई। परिणामस्वरूप नारियल की कीमतें तेज़ी से गिरीं — पिछले वर्ष इसी अवधि में ₹65,000 प्रति टन रहा भाव अब घटकर लगभग ₹40,000 प्रति टन रह गया है। इस वर्ष बंपर पैदावार ने बाज़ार में आपूर्ति और बढ़ा दी, जिससे कीमतों पर अतिरिक्त दबाव बना। गौरतलब है कि प्रवासी मज़दूरों की कमी के कारण नारियल तोड़ने और छीलने का काम धीमा पड़ा है, जिसने कीमतों को और अधिक गिरने से कुछ हद तक रोका।
ढुलाई लागत: राहत अधूरी
संघर्ष के दौरान शिपिंग किराया तेज़ी से बढ़ा था और कई खेपें गंतव्य तक पहुँचने से पहले ही खराब हो गईं। अब ढुलाई दरों में कुछ कमी आई है, लेकिन उद्योग से जुड़े लोगों के अनुसार यह अभी भी सामान्य स्तर से काफी अधिक है। यह स्थिति निर्यातकों के लाभ मार्जिन को दबाए हुए है और पूर्ण पुनरुद्धार में बाधा बन रही है।
आगामी सीज़न की चुनौतियाँ
किसानों को उम्मीद है कि कटाई का मौसम समाप्त होने से पहले अगले दो महीनों तक उत्पादन ऊँचा बना रहेगा। हालाँकि, अगले वर्ष की फसल को लेकर अभी से चिंताएँ उभर रही हैं। इस वर्ष सामान्य से कम वर्षा और सूखे जैसी परिस्थितियों के कारण अगले सीज़न में पैदावार घटने की आशंका है, जो आगे चलकर कीमतों में उछाल ला सकती है। पानी की कमी भी गंभीर समस्या बन गई है — भूजल स्तर गिरने से कई किसान नारियल के बागों की सिंचाई के लिए टैंकरों पर निर्भर हो गए हैं।
उद्योग की उम्मीदें
उद्योग से जुड़े लोगों को भरोसा है कि खाड़ी देशों से नई पूछताछ बढ़ने के साथ आने वाले हफ्तों में निर्यात धीरे-धीरे पहले की सामान्य स्थिति में लौटेगा। यह सुधार ऐसे समय में आया है जब किसान कम कीमतों और बढ़ती उत्पादन लागत की दोहरी मार झेल रहे थे। निर्यात में स्थायी वापसी बाज़ार में स्थिरता लाने की कुंजी मानी जा रही है।