गुजरात में टेंडर कोकोनट उत्पादन में 20% की उछाल, दो वर्षों में 26 करोड़ नारियल का रिकॉर्ड
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात सरकार की बागवानी प्रोत्साहन नीतियों के चलते राज्य में टेंडर कोकोनट का उत्पादन पिछले दो वर्षों में लगभग 20 प्रतिशत बढ़ गया है। आज किसान सालाना लगभग 26 करोड़ नारियल का उत्पादन कर रहे हैं — एक ऐसा आँकड़ा जो गुजरात को बागवानी क्षेत्र में एक उभरती शक्ति के रूप में स्थापित करता है। राज्य के 28,000 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली नारियल की खेती और सरकारी सब्सिडी ने मिलकर किसानों की आय को नई ऊँचाई दी है।
उत्पादन के आँकड़े और प्रमुख ज़िले
वर्ष 2024-25 के आँकड़ों के अनुसार, गुजरात में टेंडर कोकोनट की औसत उत्पादकता लगभग 9,260 नारियल प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई है। नारियल उत्पादन में गिर सोमनाथ, जूनागढ़, भावनगर, वलसाड, नवसारी, कच्छ और द्वारका जिलों का सबसे अधिक योगदान है। राज्य का विशाल समुद्री तट नारियल की खेती के लिए प्राकृतिक रूप से अनुकूल है, जो किसानों को सीधा लाभ देता है।
सरकारी प्रोत्साहन और सहायता योजनाएँ
गुजरात सरकार के बागवानी विभाग द्वारा किसानों को नारियल की बुवाई पर 75 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जाती है। इसके साथ ही मल्चिंग और इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट जैसी आधुनिक पद्धतियों के उपयोग के लिए भी सहायता प्रदान की जाती है। बागवानी विभाग की नर्सरी से किसानों को ऊँची किस्म, वामन किस्म और हाइब्रिड किस्मों के उच्च-गुणवत्ता वाले पौधे उपलब्ध कराए जाते हैं। गुजरात ग्रीन रिवॉल्यूशन कंपनी लिमिटेड द्वारा टपक सिंचाई पद्धति में भी सहायता दी जाती है।
व्हाइटफ्लाई संकट और देसी समाधान
चोरवाड से उना तक का समुद्र तटवर्ती क्षेत्र 'लीली नाघेर' (हरियाले क्षेत्र) के रूप में जाना जाता है। पिछले दो वर्षों में इस क्षेत्र में रोगस व्हाइटफ्लाई (सफेद मक्खी) के प्रकोप ने किसानों को कठिनाई में डाल दिया था। हालाँकि, सरकार के मार्गदर्शन और किसानों के प्रयासों से स्थिति में सुधार देखा जा रहा है।
गिर सोमनाथ जिले के सूत्रापाडा के युवा किसान दिनेश सोलंकी ने इस समस्या का देसी उपाय खोजा — 1,000 लीटर पानी में गुड़ और गिर गाय के दूध का मिश्रण तैयार कर व्हाइटफ्लाई को नष्ट करने में सफलता प्राप्त की। इस प्रयोग से पहले उनके खेत में सालाना मात्र 1,000 से 1,500 नारियल का उत्पादन होता था, जो अब बढ़कर 8,000 से 10,000 नारियल प्रति वर्ष हो गया है। उनकी वार्षिक आय अब ₹12 से ₹15 लाख तक पहुँच गई है, और उनकी सफलता से प्रेरित होकर अन्य किसान भी यह पद्धति अपना रहे हैं।
भविष्य की योजना और वैश्विक महत्वाकांक्षा
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य सरकार का लक्ष्य आगामी वर्षों में नारियल की खेती का क्षेत्रफल 70,000 हेक्टेयर तक बढ़ाना है। इसके अतिरिक्त, वर्जिन कोकोनट ऑयल और कोकोनट पाउडर जैसे मूल्यवर्धित उत्पादों के ज़रिये निर्यात बाज़ारों में प्रवेश के लिए भी प्रयास जारी हैं। यह ऐसे समय में आया है जब भारत का कृषि क्षेत्र परंपरागत खेती से निर्यातोन्मुखी और प्रौद्योगिकी-आधारित खेती की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है। गौरतलब है कि यदि यह लक्ष्य हासिल होता है, तो गुजरात नारियल-आधारित उद्योगों के वैश्विक केंद्र के रूप में उभर सकता है।