6 जुलाई 2026
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मुंबई भूस्खलन पर सियासत: नाना पटोले का फडणवीस सरकार पर 55% कमीशन का आरोप

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मुंबई भूस्खलन पर सियासत: नाना पटोले का फडणवीस सरकार पर 55% कमीशन का आरोप

सारांश

मुंबई में 'मिसिंग लिंक' परियोजना के पास भूस्खलन और भारी बारिश ने राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया। कांग्रेस के नाना पटोले ने 55% कमीशन के आरोप लगाते हुए फडणवीस सरकार को जवाबदेह ठहराया, जबकि BJP ने इसे प्राकृतिक आपदा बताया। विधानसभा स्थगन ने विवाद और गहरा किया।

मुख्य बातें

6 जुलाई 2026 को मुंबई में भारी बारिश, जलभराव और 'मिसिंग लिंक' परियोजना के पास भूस्खलन से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ।
कांग्रेस नेता नाना पटोले ने फडणवीस सरकार पर आरोप लगाया कि परियोजनाओं में 55% तक कमीशन लिया जाता है, जिससे निर्माण गुणवत्ता प्रभावित होती है।
पटोले ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने विधानसभा की कार्यवाही पूरे दिन स्थगित कर विपक्ष को जवाबदेही पूछने से रोका।
BJP विधायक तमिल सेल्वन और समीर मेघे ने घटनाओं को प्राकृतिक आपदा बताया और प्रशासन की सक्रियता का बचाव किया।
पटोले ने माँग की कि सरकार आपदा प्रबंधन और विकास कार्यों पर खर्च का सार्वजनिक ब्यौरा दे।

मुंबई में 6 जुलाई 2026 को भारी बारिश और 'मिसिंग लिंक' परियोजना के पास हुए भूस्खलन के बाद महाराष्ट्र की राजनीति गरमा गई है। जलभराव, यातायात अवरोध और जनहानि के बीच विपक्ष ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सरकार को सीधे कटघरे में खड़ा किया है, जबकि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इसे प्राकृतिक आपदा बताते हुए प्रशासन की सक्रियता का बचाव किया है।

नाना पटोले के आरोप

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले ने भूस्खलन में हुई मौतों की जिम्मेदारी सीधे राज्य सरकार पर डाली। उन्होंने आरोप लगाया कि आपदा प्रबंधन और बुनियादी ढाँचे पर हजारों करोड़ रुपये खर्च करने के दावे किए गए, लेकिन उसका वास्तविक लाभ आम जनता को नहीं मिला। पटोले ने माँग की कि सरकार सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करे कि अब तक आपदा प्रबंधन और विकास कार्यों पर कितनी राशि कहाँ खर्च की गई।

पटोले ने यह भी स्वीकार किया कि भारी बारिश एक प्राकृतिक आपदा है, किंतु उनका कहना था कि सरकार का दायित्व है कि वह ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए पूर्व से तैयार रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा में विपक्ष इस मुद्दे को उठाना चाहता था, परंतु मुख्यमंत्री ने सदन की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी — जिसे पटोले ने जवाबदेही से बचने की कोशिश बताया।

भ्रष्टाचार और गुणवत्ता पर सवाल

'मिसिंग लिंक' परियोजना के पास हुए भूस्खलन का हवाला देते हुए पटोले ने दावा किया कि महाराष्ट्र में ठेके देने की प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार होता है। उन्होंने कहा कि राज्य के ठेकेदारों ने भी सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया है कि परियोजनाओं में लगभग 55 प्रतिशत तक कमीशन देना पड़ता है। उनके अनुसार, इतनी बड़ी राशि कमीशन में जाने से निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर असर पड़ना स्वाभाविक है। पटोले ने कहा कि हाल की घटनाओं ने सरकार के विकास मॉडल की वास्तविकता उजागर कर दी है।

BJP का पक्ष

BJP विधायक तमिल सेल्वन ने इन घटनाओं को प्राकृतिक परिस्थितियों का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि मानसून में तेज हवाओं के साथ अत्यधिक वर्षा होने से पेड़ गिरे और जनजीवन प्रभावित हुआ। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि अत्यंत आवश्यकता होने पर ही घरों से बाहर निकलें और प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करें। 'मिसिंग लिंक' भूस्खलन पर उन्होंने कहा कि ऐसी घटना नहीं होनी चाहिए थी और भविष्य में निर्माण कार्यों में गुणवत्ता तथा सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।

BJP विधायक समीर मेघे ने भी कहा कि बारिश जैसी प्राकृतिक आपदाएँ किसी के नियंत्रण में नहीं होतीं, लेकिन प्रशासन पूरी सक्रियता से राहत और बचाव कार्यों में जुटा हुआ है।

आम जनता पर असर

मुंबई और आसपास के इलाकों में जलभराव के कारण यातायात बुरी तरह बाधित रहा। गौरतलब है कि मुंबई हर मानसून में बाढ़ और भूस्खलन की चपेट में आती है, और यह ऐसे समय में आया है जब 'मिसिंग लिंक' जैसी बड़ी बुनियादी ढाँचा परियोजनाएँ निर्माणाधीन हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि निर्माण स्थलों के पास भूस्खलन का जोखिम बढ़ जाता है यदि सुरक्षा मानकों का पालन न किया जाए।

आगे क्या

पटोले की माँग है कि सरकार विधानसभा में आपदा प्रबंधन खर्च का पूरा ब्यौरा पेश करे। भूस्खलन प्रभावित परिवारों को राहत देने की जिम्मेदारी को लेकर विपक्ष का दबाव जारी रहने की संभावना है। मानसून अभी जारी है, और मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में भी भारी बारिश की चेतावनी बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और हर बार राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का यही चक्र चलता है — लेकिन 55% कमीशन का आरोप इस बार बहस को एक ठोस बिंदु पर केंद्रित करता है। असली सवाल यह है कि जब ठेकेदार खुद सार्वजनिक रूप से इतने बड़े कमीशन की बात कर रहे हैं, तो राज्य की सतर्कता और लेखापरीक्षा तंत्र कहाँ है। विधानसभा स्थगन का विपक्ष द्वारा जवाबदेही से बचाव के रूप में व्याख्यायित किया जाना सरकार के लिए एक राजनीतिक संकट है जिसे वह 'प्राकृतिक आपदा' की आड़ में टाल नहीं सकती।
RashtraPress
6 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'मिसिंग लिंक' परियोजना क्या है और इसके पास भूस्खलन क्यों हुआ?
'मिसिंग लिंक' मुंबई की एक बड़ी बुनियादी ढाँचा परियोजना है जो निर्माणाधीन है। भारी बारिश के दौरान इस परियोजना के पास भूस्खलन हुआ, जिसमें लोगों की जान गई। कांग्रेस का आरोप है कि निर्माण गुणवत्ता में कमी इसकी एक वजह है।
नाना पटोले ने फडणवीस सरकार पर क्या आरोप लगाए?
नाना पटोले ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में परियोजनाओं में लगभग 55% तक कमीशन देना पड़ता है, जिससे निर्माण गुणवत्ता प्रभावित होती है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने आपदा प्रबंधन पर हजारों करोड़ खर्च का दावा किया लेकिन जनता को उसका लाभ नहीं मिला।
BJP ने मुंबई भूस्खलन और बारिश पर क्या कहा?
BJP विधायक तमिल सेल्वन और समीर मेघे ने इन घटनाओं को प्राकृतिक आपदा बताया। उन्होंने कहा कि प्रशासन पूरी सक्रियता से राहत और बचाव कार्यों में जुटा है और नागरिकों को दिशा-निर्देशों का पालन करना चाहिए।
विधानसभा स्थगन पर विवाद क्यों है?
नाना पटोले का आरोप है कि विपक्ष भूस्खलन और बारिश के मुद्दे को विधानसभा में उठाना चाहता था, लेकिन मुख्यमंत्री ने सदन की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी। विपक्ष इसे सरकार की जवाबदेही से बचने की कोशिश मान रहा है।
मुंबई में मानसून के दौरान बार-बार ऐसी घटनाएँ क्यों होती हैं?
मुंबई हर मानसून में भारी बारिश, जलभराव और भूस्खलन की चपेट में आती है। विशेषज्ञों के अनुसार, निर्माणाधीन परियोजनाओं के पास सुरक्षा मानकों की अनदेखी और बुनियादी ढाँचे की गुणवत्ता में कमी इन घटनाओं के जोखिम को बढ़ाती है।
राष्ट्र प्रेस
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