मुंबई में खुले मैनहोल से दो मौतें: कांग्रेस ने बीएमसी को घेरा, भाजपा ने पूर्व प्रशासन पर मढ़ा दोष
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई में 3 जुलाई को भारी मानसूनी बारिश के बीच खुले मैनहोल में गिरने से दो लोगों की मौत हो गई — एक 11 वर्षीय बच्चा और एक 55 वर्षीय बुजुर्ग — जिसके बाद शहर में तीखा राजनीतिक संग्राम छिड़ गया। कांग्रेस ने इसे बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) की प्रशासनिक विफलता करार दिया, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और शिवसेना ने दशकों के कुप्रबंधन का ठीकरा पूर्व शिवसेना-यूबीटी नेतृत्व वाले बीएमसी प्रशासन पर फोड़ा।
मुख्य घटनाक्रम
भारी बारिश के चलते मुंबई की सड़कें जलमग्न हो गईं और कई इलाकों में खुले मैनहोल मौत के जाल बन गए। दो अलग-अलग घटनाओं में एक बच्चे और एक बुजुर्ग की जान गई। इसके अलावा, कांग्रेस विधायक अमीन पटेल ने बताया कि दो लड़कियाँ बाढ़ के पानी में एक दुकान के अंदर फंसी रहीं, और उन्हें बचाने के लिए न पुलिस पहुँची, न नगर निगम — स्थानीय निवासियों ने ही उनकी जान बचाई।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
कांग्रेस विधायक अमीन पटेल ने कहा, 'यह एक प्रशासनिक विफलता है। मुंबई की जल निकासी व्यवस्था के लिए करोड़ों रुपए बर्बाद हो गए हैं।' उन्होंने महाराष्ट्र सरकार से दोनों पीड़ित परिवारों को ₹25-25 लाख का मुआवजा देने की माँग की और चेतावनी दी कि मानसून अभी लगभग चार महीने और बाकी है।
कांग्रेस विधायक असलम शेख ने कहा, 'यह काम पहले ही पूरा हो जाना चाहिए था। क्या अधिकारी पहली दुर्घटना के बाद और लोगों की मौत का इंतजार कर रहे थे? हाई कोर्ट के निर्देशों के बावजूद खुले मैनहोल को ढका नहीं जा रहा है।' उन्होंने लापरवाही के दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की माँग की।
समाजवादी पार्टी के विधायक रईस शेख ने सीधे बीएमसी में भाजपा नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा, 'नई परिषद के सत्ता में आने के बाद से उनका ध्यान नागरिक मुद्दों के बजाय अन्य मुद्दों पर रहा है। मुंबई के महापौर को शहर की जनता से माफी मांगनी चाहिए।'
भाजपा का पलटवार
भाजपा विधायक अतुल भाटखालकर ने स्वीकार किया कि प्रशासन को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए, लेकिन उन्होंने कहा, 'शिवसेना-यूबीटी द्वारा बीएमसी पर 25 वर्षों के शासन के दौरान पैदा की गई गड़बड़ी को ठीक करने में समय लगेगा।' उनका तर्क था कि मौजूदा बुनियादी ढाँचे की खामियाँ रातोरात नहीं बनीं।
आम जनता पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब मुंबई, नवी मुंबई और ठाणे के नगर निगमों पर मानसून-पूर्व तैयारियों को लेकर पहले से ही सवाल उठ रहे थे। जल निकासी व्यवस्था के लिए आवंटित करोड़ों रुपयों के बावजूद शहर की स्थिति बदहाल है, जो आम नागरिकों के लिए हर साल जानलेवा साबित होती है। गौरतलब है कि उच्च न्यायालय पहले भी खुले मैनहोल ढकने के निर्देश दे चुका है।
क्या होगा आगे
विपक्षी दलों ने सरकार से तत्काल मुआवजे और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की माँग की है। मानसून के अभी चार महीने शेष रहने के मद्देनज़र, नागरिक निकायों पर खुले मैनहोल बंद करने और जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त करने का दबाव और बढ़ेगा। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच असली सवाल यह है कि जवाबदेही कब और कैसे तय होगी।