3 जुलाई 2026
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मुंबई में खुले मैनहोल से दो मौतें: कांग्रेस ने बीएमसी को घेरा, भाजपा ने पूर्व प्रशासन पर मढ़ा दोष

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मुंबई में खुले मैनहोल से दो मौतें: कांग्रेस ने बीएमसी को घेरा, भाजपा ने पूर्व प्रशासन पर मढ़ा दोष

सारांश

मुंबई में मानसून की पहली भारी बारिश में खुले मैनहोल ने दो जानें ली — एक बच्चे और एक बुजुर्ग की। इसके बाद जो शुरू हुआ वह राहत अभियान नहीं, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप था। कांग्रेस ने बीएमसी को कटघरे में खड़ा किया, भाजपा ने 25 साल पुराना हिसाब सामने रख दिया।

मुख्य बातें

मुंबई में 3 जुलाई को भारी बारिश के दौरान खुले मैनहोल में गिरने से 11 वर्षीय बच्चे और 55 वर्षीय बुजुर्ग की मौत हुई।
कांग्रेस विधायक अमीन पटेल ने घटना को 'प्रशासनिक विफलता' बताते हुए दोनों परिवारों को ₹25-25 लाख मुआवजे की माँग की।
कांग्रेस विधायक असलम शेख ने कहा कि उच्च न्यायालय के निर्देशों के बावजूद खुले मैनहोल नहीं ढके गए।
समाजवादी पार्टी विधायक रईस शेख ने बीएमसी में भाजपा नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराया और महापौर से माफी माँगने की माँग की।
भाजपा विधायक अतुल भाटखालकर ने दोष शिवसेना-यूबीटी के 25 वर्षों के बीएमसी शासन पर मढ़ा।
मुंबई, नवी मुंबई और ठाणे के नगर निगम आपातकालीन प्रतिक्रिया में विफल रहे; स्थानीय निवासियों ने फंसी लड़कियों को बचाया।

मुंबई में 3 जुलाई को भारी मानसूनी बारिश के बीच खुले मैनहोल में गिरने से दो लोगों की मौत हो गई — एक 11 वर्षीय बच्चा और एक 55 वर्षीय बुजुर्ग — जिसके बाद शहर में तीखा राजनीतिक संग्राम छिड़ गया। कांग्रेस ने इसे बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) की प्रशासनिक विफलता करार दिया, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और शिवसेना ने दशकों के कुप्रबंधन का ठीकरा पूर्व शिवसेना-यूबीटी नेतृत्व वाले बीएमसी प्रशासन पर फोड़ा।

मुख्य घटनाक्रम

भारी बारिश के चलते मुंबई की सड़कें जलमग्न हो गईं और कई इलाकों में खुले मैनहोल मौत के जाल बन गए। दो अलग-अलग घटनाओं में एक बच्चे और एक बुजुर्ग की जान गई। इसके अलावा, कांग्रेस विधायक अमीन पटेल ने बताया कि दो लड़कियाँ बाढ़ के पानी में एक दुकान के अंदर फंसी रहीं, और उन्हें बचाने के लिए न पुलिस पहुँची, न नगर निगम — स्थानीय निवासियों ने ही उनकी जान बचाई।

विपक्ष की प्रतिक्रिया

कांग्रेस विधायक अमीन पटेल ने कहा, 'यह एक प्रशासनिक विफलता है। मुंबई की जल निकासी व्यवस्था के लिए करोड़ों रुपए बर्बाद हो गए हैं।' उन्होंने महाराष्ट्र सरकार से दोनों पीड़ित परिवारों को ₹25-25 लाख का मुआवजा देने की माँग की और चेतावनी दी कि मानसून अभी लगभग चार महीने और बाकी है।

कांग्रेस विधायक असलम शेख ने कहा, 'यह काम पहले ही पूरा हो जाना चाहिए था। क्या अधिकारी पहली दुर्घटना के बाद और लोगों की मौत का इंतजार कर रहे थे? हाई कोर्ट के निर्देशों के बावजूद खुले मैनहोल को ढका नहीं जा रहा है।' उन्होंने लापरवाही के दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की माँग की।

समाजवादी पार्टी के विधायक रईस शेख ने सीधे बीएमसी में भाजपा नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा, 'नई परिषद के सत्ता में आने के बाद से उनका ध्यान नागरिक मुद्दों के बजाय अन्य मुद्दों पर रहा है। मुंबई के महापौर को शहर की जनता से माफी मांगनी चाहिए।'

भाजपा का पलटवार

भाजपा विधायक अतुल भाटखालकर ने स्वीकार किया कि प्रशासन को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए, लेकिन उन्होंने कहा, 'शिवसेना-यूबीटी द्वारा बीएमसी पर 25 वर्षों के शासन के दौरान पैदा की गई गड़बड़ी को ठीक करने में समय लगेगा।' उनका तर्क था कि मौजूदा बुनियादी ढाँचे की खामियाँ रातोरात नहीं बनीं।

आम जनता पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब मुंबई, नवी मुंबई और ठाणे के नगर निगमों पर मानसून-पूर्व तैयारियों को लेकर पहले से ही सवाल उठ रहे थे। जल निकासी व्यवस्था के लिए आवंटित करोड़ों रुपयों के बावजूद शहर की स्थिति बदहाल है, जो आम नागरिकों के लिए हर साल जानलेवा साबित होती है। गौरतलब है कि उच्च न्यायालय पहले भी खुले मैनहोल ढकने के निर्देश दे चुका है।

क्या होगा आगे

विपक्षी दलों ने सरकार से तत्काल मुआवजे और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की माँग की है। मानसून के अभी चार महीने शेष रहने के मद्देनज़र, नागरिक निकायों पर खुले मैनहोल बंद करने और जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त करने का दबाव और बढ़ेगा। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच असली सवाल यह है कि जवाबदेही कब और कैसे तय होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

नेता एक-दूसरे पर दोष मढ़ते हैं, और अगले साल फिर वही हाल। उच्च न्यायालय के निर्देश कागज़ पर रहते हैं, जल निकासी के लिए आवंटित करोड़ों रुपए कहाँ जाते हैं यह कोई नहीं पूछता। असली सवाल यह नहीं कि दोष किसका है — भाजपा का, शिवसेना का या कांग्रेस का — बल्कि यह है कि किसी भी सरकार ने अब तक जवाबदेही का ऐसा ढाँचा क्यों नहीं बनाया जो मैनहोल खुला छोड़ने वाले अधिकारी को सीधे दंडित करे। जब तक राजनीतिक प्रतिस्पर्धा जवाबदेही से बड़ी रहेगी, मुंबई के नागरिक हर बारिश में अपनी जान दाँव पर लगाते रहेंगे।
RashtraPress
3 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुंबई में मैनहोल हादसे में कितने लोगों की मौत हुई?
3 जुलाई को भारी मानसूनी बारिश के दौरान खुले मैनहोल में गिरने से दो लोगों की मौत हुई — एक 11 वर्षीय बच्चा और एक 55 वर्षीय बुजुर्ग। यह घटना मुंबई में हुई और इसने तत्काल राजनीतिक विवाद को जन्म दिया।
कांग्रेस ने मुंबई मैनहोल हादसे पर क्या माँग की?
कांग्रेस विधायक अमीन पटेल ने महाराष्ट्र सरकार से दोनों पीड़ित परिवारों को ₹25-25 लाख मुआवजा देने की माँग की। उन्होंने बीएमसी की जल निकासी व्यवस्था के लिए आवंटित धनराशि के उपयोग पर भी सवाल उठाए।
भाजपा ने मुंबई मैनहोल मौतों के लिए किसे जिम्मेदार ठहराया?
भाजपा विधायक अतुल भाटखालकर ने शिवसेना-यूबीटी के बीएमसी पर 25 वर्षों के शासन को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि उस दौरान पैदा हुई बुनियादी ढाँचे की खामियाँ रातोरात नहीं सुधरेंगी।
क्या उच्च न्यायालय ने खुले मैनहोल पर पहले कोई निर्देश दिए थे?
हाँ, कांग्रेस विधायक असलम शेख के अनुसार उच्च न्यायालय पहले भी खुले मैनहोल ढकने के निर्देश दे चुका है, लेकिन उनका पालन नहीं हो रहा। उन्होंने लापरवाह अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की माँग की।
मुंबई में मानसून के दौरान नागरिक निकाय की प्रतिक्रिया कैसी रही?
कांग्रेस विधायक अमीन पटेल के अनुसार, बाढ़ में फंसी दो लड़कियों को बचाने के लिए न पुलिस पहुँची और न ही नगर निगम — स्थानीय निवासियों ने ही उन्हें बचाया। उन्होंने मुंबई, नवी मुंबई और ठाणे के नगर निगमों को आपातकालीन प्रतिक्रिया में विफल बताया।
राष्ट्र प्रेस
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