साकीनाका मैनहोल हादसा: असलम शेख की मौत पर नेताओं की माँग — दोषी अधिकारियों-ठेकेदारों पर FIR हो
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई के साकीनाका इलाके में खैरानी रोड पर खुले मैनहोल में गिरने से 60 वर्षीय असलम शेख की दर्दनाक मौत के बाद महाराष्ट्र में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। 3 जुलाई को भारी बारिश और जलभराव के बीच हुई इस घटना ने बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (BMC) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों ने एकसुर में जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की माँग की है।
मुख्य घटनाक्रम
घटना के अनुसार, भारी मानसूनी बारिश के कारण खैरानी रोड पर जलभराव हो गया था, जिससे खुला मैनहोल दिखाई नहीं दे रहा था। असलम शेख उसमें गिर गए और उनकी मौत हो गई। आरोप है कि यह मैनहोल पहले से असुरक्षित था और अदालत के निर्देशों के बावजूद इसे ढका नहीं गया था। इस हादसे में एक 11 वर्षीय बच्चे की मौत भी बताई जा रही है, जिससे कुल मृतक संख्या दो हो गई है।
BMC कमिश्नर ने घटना के बाद सभी संबंधित अधिकारियों को सड़कों का निरीक्षण करने, मैनहोल के ढक्कनों और स्टॉर्मवॉटर ड्रेन की जाँच करने तथा व्यापक सर्वे करने के निर्देश दिए हैं।
सरकार की प्रतिक्रिया
भारतीय जनता पार्टी (BJP) विधायक अतुल भातखलकर ने घटना पर दुख जताते हुए कहा कि प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, 'मैनहोल में गिरने से जिस व्यक्ति की दुर्भाग्यपूर्ण मौत हुई, उसके मामले में हम एफआईआर दर्ज कराएंगे। मैंने कल सदन में यह माँग रखी थी और सरकार ने इस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है।' हालाँकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि पिछले 25 वर्षों में शिवसेना (यूबीटी) के कार्यकाल में BMC में हुई गड़बड़ियों को सुधारने में समय लगेगा।
शिवसेना विधायक दीपक वसंत केसरकर ने घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि जिम्मेदार सभी अधिकारियों और ठेकेदारों के विरुद्ध कानून के तहत सबसे कड़ी सजा सुनिश्चित की जानी चाहिए। शिवसेना विधायक मुरजी पटेल ने बताया कि उन्होंने रात में ही म्युनिसिपल कमिश्नर से बात की, जिसके बाद BMC ने व्यापक निरीक्षण का आदेश दिया।
विपक्ष का हमला
कांग्रेस विधायक असलम शेख ने सवाल उठाया कि पहली दुर्घटना के बाद भी प्रशासन ने जरूरी कदम क्यों नहीं उठाए। उनके अनुसार, मरम्मत और सुरक्षा संबंधी काम मानसून से पहले ही पूरे हो जाने चाहिए थे और अदालत के निर्देशों के बावजूद खुले मैनहोल को सुरक्षित नहीं बनाया गया।
कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने मृतक के परिवार को दिए गए ₹10 लाख के मुआवजे को अपर्याप्त बताया और कम से कम ₹1 करोड़ की सहायता की माँग की, ताकि उस राशि के ब्याज से परिवार का भविष्य सुरक्षित हो सके।
कांग्रेस विधायक अमीन पटेल ने इसे पूरी तरह प्रशासनिक विफलता करार दिया। उन्होंने कहा, 'मुंबई के ड्रेनेज सिस्टम के लिए रखे गए करोड़ों रुपये बर्बाद हो गए हैं। दो लोगों की जान चली गई — एक 11 साल का बच्चा और एक 60 साल के बुजुर्ग। महाराष्ट्र सरकार को दोनों पीड़ितों के परिवारों के लिए ₹25 लाख के मुआवजे का ऐलान करना चाहिए।' उन्होंने यह भी बताया कि बाढ़ में फंसी दो लड़कियों को स्थानीय लोगों ने बचाया, जबकि पुलिस और नगर प्रशासन समय पर नहीं पहुँचे।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के नेता जयंत पाटिल ने कहा कि नई सरकार बनने के बाद लोगों को बेहतर व्यवस्था की उम्मीद थी, लेकिन हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।
अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल
शिवसेना नेता मनीषा कयांडे ने नगर प्रशासन के अधिकारियों की जवाबदेही पर तीखे सवाल उठाए। उनका कहना था कि मेंटेनेंस अधिकारी, ट्री अथॉरिटी अधिकारी और फुटपाथ मेंटेनेंस अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से मुँह मोड़ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई अधिकारी 'हफ्ता वसूली' में व्यस्त हैं और अवैध निर्माण रोकने में नाकाम रहे हैं।
आगे क्या होगा
BMC के व्यापक निरीक्षण अभियान के साथ-साथ FIR दर्ज कराने की प्रक्रिया भी शुरू होने की संभावना है। गौरतलब है कि मानसून अभी शुरुआती चरण में है और बारिश का मौसम लगभग चार महीने और चलेगा, जिससे प्रशासन पर दबाव और बढ़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक ड्रेनेज सिस्टम की व्यापक मरम्मत नहीं होती, मुंबई, नवी मुंबई और ठाणे जैसे महानगरों में इस तरह के हादसों का खतरा बना रहेगा।